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छत पर लटक रहे मौत के तार, मौत के साये में जीने को मजबूर

Jhansi Bureauझांसी ब्यूरो Updated Tue, 21 May 2019 01:03 AM IST
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छत पर लटक रहे मौत के तार
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ललितपुर। शहर के वार्ड नंबर आठ मोहल्ला जुगपुरा में घरों के बीच से निकली हाईटेंशन बिजली की लाइन मोहल्लेवासियों के लिए मौत का साया बन गई है। यहां पर रहने वाले लोग न तो दिन में अपना काम ठीक से कर पा रहे हैं और न ही रात में छत पर सो पा रहे हैं। कई लोगों ने करंट के डर से मकान में सीढ़ियां ही नहीं बनवाई हैं।
वर्षों पूर्व इस क्षेत्र में कुछ ही परिवार रहा करते थे। लेकिन, समय परिवर्तन होने के साथ-साथ शहर का विस्तार होता गया। बदलते दौर में जमीन की कीमत बढ़ गई। इस कारण अब यहां पर कहीं भी खाली जगह नजर नहीं आती है। तमाम लोगों ने हाईटेंशन बिजली के तार की परवाह किए बगैर ही उसके नीचे की जमीन खरीद कर घर बनवा लिए। लेकिन, यह मकान जान पर भारी साबित हो रहे हैं। यहां पर लोगों ने लोगों ने मकान के निर्माण में लाखों रुपये लगा दिए, जिससे मकान को छोड़ने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में मोहल्ला निवासी हाईटेंशन बिजली के तारों के नीचे ही अपना जीवन यापन करने को मजबूर हो गए हैं। कई लोगों इन तारों में झुलसकर शिकार हो गए हैं।
इस समस्या के समाधान के लिए मोहल्लावासी विभागीय अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। ऐसे में आम लोगों को करंट की चपेट में आकर खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हाईटेंशन बिजली लाइन के तार कई मकानों की छत से टकरा रहे हैं, तो कई भवन स्वामियों ने खंभा को ही अपने मकान की चौहदी में कर लिया है। कुछ लोग अपने मकान का निर्माण नहीं कर पा रहे हैं। इन तारों से बचने के लिए कुछ लोगों ने निजी एंगल लगाकर तारों को ऊंचा कर दिया है। कुछ लोग लकड़ी की बल्ली का सहारा लेकर छत से तारों की दूरी बनाए हैं। कई लोगों ने करंट के डर से छत की सीढ़ी नहीं बनवाई हैं तो कई छत की सीढ़ियां चढ़ना भूल गए हैं।

लगभग तीस वर्ष से जुगपुरा में रह रहे हैं। यहां पर हाईटेंशन बिजली के तारों के डर से मकान की दूसरी मंजिल का निर्माण नहीं करा पा रहे हैं। परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ गई है, जिससे मकान छोटा पड़ने लगा है। छोटी से जगह में ही अपना जीवन गुजार रहे हैं।
- शिवराज सज्जन

हाईटेंशन तार छत के नजदीक होने से अब तक छत पर जाने में करंट की चपेट में आने का भया बना रहता है। बच्चे तो छत पर पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। रात में बिजली जाने पर भी कमरे में ही रहना पड़ता है। भले ही कितनी गर्मी हो पर, छत पर नहीं सो पा रहे हैं।
- ऋषि तिवारी

हाईटेंशन तार के टूटकर गिरने से मां और भतीजी को करंट लग चुका है। दोनों की किसी तरह जान बच पाई थी। इससे हालत यह है कि भले ही रात में घर पर सो रहे हों, लेकिन तारों के गिरने का भय बना रहता है। कई बार तो तारों से चिंगारी छूूटती है।
- धीरेंद्र राजा

ग्राम पटौराकलां संपर्क मार्ग से शुरु होकर मोहल्ला जुगपुरा तक लगभग दो सौ घरों के ऊपर से हाइटेंशन लाइन निकली है। इससे करंट लगने का भय बना रहता है। कई लोग छत होने के बावजूद छत पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। लाइन को हटाने के लिए विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन अब तक इसे हटाया नहीं गया है।
- पार्षद उदय प्रताप पटेल

कई बार हो चुकी दुघर्टनाएं
लगभग चार वर्ष पूर्व एक महिला की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई थी। बिजली का तार टूटकर गिरने से नीचे जा रहीं सात भैंसें करंट की चपेट में आने से मर गई थीं। करंट लगने की घटनाएं यहां आम बात हो गई है।

यह है प्रावधान
किसी का मकान पहले से बना है और हाईटेंशन लाइन निकाली जा रही है तो बिजली विभाग जिम्मेदार होगा। बिजली की लाइन के नीचे मकान का निर्माण करने पर भवन स्वामी स्वयं जिम्मेदार होगा। बिजली की केबिल के नीचे की जमीन बेचने से पहले बिजली विभाग से स्वीकृति लेना आवश्यक है। इसके लिए विभाग द्वारा एस्टीमेट तैयार किया जाता है। जिसकी राशि भूमि स्वामी/कॉलोनी बनाने वाले बिल्डर को जमा करनी होती है।

जमीन कारोबारियों ने कर दिया खेल
नियमत: हाईटेंशन बिजली की लाइन के नीचे की जमीन बेची नहीं जा सकती। यदि बेचनी है तो पहले तार हटाने के लिए एस्टीमेट बनाकर उसकी स्वीकृति लेनी आवश्यक है। इसके बाद ही जमीन बेची जा सकती है, लेकिन न तो जमीन कारोबारियों ने प्लाट खरीदने वालों को हकीकत बताई और न प्लाट खरीदने वालों ने इसमें रुचि दिखाई। जमीन कारोबारी केवल इतना कहते रहे कि बिजली की लाइन हटवा देंगे। अब मकान स्वामी परेशान हैं।

जहां भी मकानों के ऊपर से हाईटेंशन बिजली की लाइन निकली है। उसका सर्वे कराया जाएगा। यदि बिजली की लाइन के नीचे निर्माण कराया गया है तो संबंधित भवन स्वामियों को नोटिस दिया जाएगा।
- शैलेंद्र कुमार कटियार, अधिशाषी अभियंता, विद्युत वितरण खंड प्रथम

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