स्वास्थ्य:

Jhansi Bureau Updated Fri, 18 May 2018 01:12 AM IST
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58 फीसदी बच्चे कुपोषण में शिकार
8140 बच्चों में है गंभीर कुपोषण
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम भी जिले के नौनिहालों के जीवन में खुशियां नहीं बिखेर सके हैं। आज भी जनपद में 58 फीसद बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इनमें से 8140 अति कुपोषित बच्चों का उपचार एनआरसी के माध्यम से किया जा रहा है। जबकि आंशिक अल्प वजन के बच्चों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। उन्हें पौष्टिक आहार भी नसीब नहीं हो रहा है।
जिले में संचालित 1124 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती, धात्री माताओं के साथ बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल की जाती है। यही नहीं, उन्हें पौष्टिक आहार मुहैया कराया जाता है, लेकिन वर्तमान में वह भी नसीब नहीं हो पा रहा है। शासन स्तर से पौष्टिक आहार की आपूर्ति ठप चल रही है। इस स्थिति में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन और उनका टीकाकरण ही किया जा रहा है। यहां प्रत्येक शनिवार को क्षेत्र में तैनात एएनएम द्वारा गर्भवती महिलाओं व बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। यदि वजन के दौरान बच्चा का वजन उम्र के हिसाब से कम है, तो एएनएम द्वारा बच्चे की स्वास्थ्य की जांच की जाती है। अति कुपोषित बच्चों को गांव की आशा के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जाता है। इसमें आशा को 50 रुपये मिलते हैं तो वहीं बच्चे के साथ रहने वाली मां को नि:शुल्क भोजन दिया जाता है। इसके अलावा एक दिन का 50 रुपया पृथक से मिलता है। पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चे का प्रतिदिन वजन व स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। इतना सब होने के बाद भी नौनिहालों को कुपोषण से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। एनआरसी पर बरती जा रही लापरवाही के चलते कुछ बच्चों के बीच में ही उपचार छोड़कर केंद्र से चले जाते हैं। कई माताओं का आरोप है कि एनआरसी पर बच्चों को नियमानुसार खुराक नहीं दी जाती है। इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चुप हैं और वह कागजी घोड़े दौड़ाने में लगे हैं।

कुपोषण पर एक नजर
जनपद में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर 91565 बच्चें नामांकित हैं। इसमें से 45,559 बच्चे कुपोषित हैं। वहीं, 8140 बच्चे अतिकुुपोषित हैं। विकासखंड जखौरा पर नजर डालें तो यहां 193 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। इनमें छह माह से तीन वर्ष तक के 10154 बच्चे नामांकित हैं। तीन वर्ष से छह वर्ष 6460 बच्चे नामांकित है। इनमें छह माह से तीन वर्ष तक के 6607 बच्चे कुपोषित हैं। 686 बच्चे अतिकुपोषित हैं। तीन वर्ष से छह माह तक के 1843 बच्चे कुपोषित बच्चे हैं तो वहीं, 872 बच्चे अति कुपोषित हैं।

पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) पर ये मिल रही सेवाएं
रेफर किए गए बच्चों की पुन: जांच कर ( एसएएम ) की पहचान।
वार्ड में भर्ती बच्चों को एंटीबायोटिक्स ( आइवी व ओरल ) से इलाज करना।
भर्ती किए गए कुपोषित बच्चों की 24 घंटे उचित देखभाल करना।
सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमियों में सुधार हेतु पूरक खुराक देना।
भर्ती कुपोषित बच्चों व उनकी माताओं को निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन देना तथा इसके लिए अभिवावक से कोई शुल्क नहीं लेना।
मां एवं देखभाल करने वाले को उचित खान-पान साफ-सफाई के विषय पर परामर्श देना।
पोषण पुनर्वास केंद्र में डिस्चार्ज के बाद हर 15 दिन में 2 माह तक 4 बार फॉलोअप करना।

इतने हो चुके भर्ती एनआरसी में बच्चे
अप्रैल 2017 से मार्च 18 तक 858 बच्चों को एनआरसी पर भर्ती कराया गया, जिसमें से 37 बच्चे बीच में ही उपचार छोड़कर भाग गए। जिससे उनका उपचार अधूरा रह गया।

एनआरसी पर दी जाती पूरी खुराक
पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती होने वाले बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। साथ ही भर्ती बच्चों व मां को नि:शुल्क भोजन दिया जाता है। जो बच्चे बीच में उपचार छोड़ रहे हैं, उनके परिजनों को पूरा उपचार कराने के लिए समझाया जाता है।
- डा. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

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