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क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पर आढ़तियों के फड़ पर लगे ढेर

अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Mon, 05 Jun 2017 12:20 AM IST
गेहूं
गेहूं - फोटो : अमर उजाला
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लक्ष्य से कोसों दूर रह गई सरकारी गेहूं खरीद 
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दो माह में 50 फीसदी गेहूं नहीं खरीद सकी एजेंसियां 
15 जून के बाद बंद हो जाएगी सरकारी गेहूं खरीद

किसानों से सीधे गेहूं खरीदने के लिए खोले गए सरकारी क्रय केंद्रों के बंद होने का काउंट-डाउन शुरू हो गया है। 15 जून को अधिकारिक रूप से खरीद बंद हो जाएगी, लेकिन सरकार से मिले लक्ष्य के सापेक्ष अप्रैल से मई तक सिर्फ 33 फीसदी (1,33,179 मीट्रिक टन) खरीद हुई है। इस समय गेहूं की आवक कम होने के साथ ही क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। तो वहीं मंडी में आढ़तियों के फड़ पर नीलामी के लिए गेहूं के ढेर लग रहे हैं। 
रबी विपणन वर्ष 2017-18 में मूल्य समर्थन योजना के तहत किसानों से सीधे गेहूं खरीदने के लिए 149 क्रय केंद्र खोले गए, जिनके माध्यम से 15 जून तक सभी एजेंसियों को चार लाख छह हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदना है। जिले में इस बार रिकार्ड गेहूं उत्पादन हुआ, फिर भी सरकारी केंद्रों पर 50 फीसदी खरीद नहीं हो पाई है। सबसे ज्यादा 85 क्रय केंद्र खोलने वाले पीसीएफ ने 63 फीसदी खरीद की है। जबकि 20 क्रय केंद्र खोलने वाले खाद्य विभाग ने 60 फीसदी गेहूं खरीदा है। वहीं 13 क्रय केंद्र खोलने वाली एजेंसी पीसीयू ने 9.1 फीसदी और छह क्रय केंद्र वाली यूपीएसएस ने 6.2 फीसदी गेहूं खरीदा है। इसी तरह एसएफसी ने 51, कल्याण निगम ने 20, यूपी एग्रो ने 38, एनसीसीएफ ने 23 और एफसीआई ने 18 फीसदी खरीद की है। 
 
आढ़तियों के मुकाबले खरीद में पीछे रहे केेंद्र प्रभारी
शुरुआत में ही क्रय केंद्र प्रभारियों ने किसानों से गेहूं खरीदने में रुचि नहीं दिखाई थी, जिसका असर हुआ कि किसानों ने कम दाम के बावजूद आढ़तियों को ही गेहूं बेचने में भलाई समझी। राजापुर मंडी में अब भी गेहूं की आवक हो रही है, लेकिन क्रय केंद्रों पर सन्नाटा है। खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर 1840 मीट्रिक टन खरीद हुई, जबकि आढ़तियों ने करीब 26000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद डाला है। इसी तरह गोला, मोहम्मदी, मैगलगंज, पलिया, तिकुनियां मंडियों में किसानों ने बड़ी मात्रा में गेहूं आढ़तियों को बेचा हैै। 
 
नकद भुगतान के लिए भी आढ़ती बने पसंद
सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं न बेचकर आढ़तियों को बेचने में किसानों को नकद भुगतान मिलने की सुविधा रहती है। जबकि केंद्रों पर भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से बैंक खाते में किया जाता है। बैंकों में कैश की किल्लत के चलते मनमाफिक रुपये निकालने में दिक्कतें पेश आती हैं। लिहाजा किसान नकद भुगतान के लिए भी आढ़तियों को गेहूं बेच रहे हैं। 
 
दो माह में करीब 18 हजार किसानों से लक्ष्य के सापेक्ष करीब 33 फीसदी गेहूं खरीद की गई है। अभी 15 जून तक सभी क्रय केंद्रों पर खरीद की जाएगी, जिससे खरीद का ग्राफ और बढ़ेगा। 
- कौशल देव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी

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