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नेपाली हाथियों ने पहाडनगर गांव में धान और गन्ने की फसल को रौंदा

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Mon, 21 Oct 2019 01:32 AM IST
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बांकेगंज। किशनपुर सेंक्चुरी के मड़हा जंगल डेरा डाले नेपाली हाथियों का उत्पात कम नहीं हो रहा है। शनिवार रात हाथियों का झुंड जंगल से निकल कर अपना रुख फिर पहाड़ नगर गांव में खेतों की ओर किया। हाथियों ने दर्जनों किसानों की कई एकड़ धान और गन्ने की फसल रौंद कर नष्ट कर दी। उधर, डीटीआर बफरजोन के एसडीओ दिलीप श्रीवास्तव रविवार दोपहर पहाड़ नगर गांव पहुंचे। पीड़ित किसानों से मुलाकात कर फसल नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने नियमानुसार मुआवजा दिलाने की बात कही।
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शनिवार शाम करीब सात बजे मड़हा जंगल में घास के मैदान पर डेरा डाले नेपाली हाथियों का झुंड जंगल के बाहरी किनारे पहुंचा, जहां से यह तीन-चार झुंडों में अलग-अलग दिशाओं में बंट कर मैलानी रेंज की डीटीआर बफरजोन और टाइगर रिजर्व क्षेत्र से सटे पहाड़ नगर गांव की ओर खेतों में अपना रुख किया। हाथियों ने किसान दिलबाग सिंह की सात एकड़ धान की फसल रौंद डाली, मंदीप सिंह के खेत में सिंचाईं के लिए लगे पंपिग सेट को पलटने के बाद तोड़ दिया। धान के अलावा हाथियों ने कई किसानों की गन्ने की फसल का भी नुकसान पहुंचाया है। इसके बाद हाथियों ने बांकेगंज से कुछ दूरी पर ग्रंट नंबर तीन बीट जंगल किनारे फसलें रौंद डाली। इस इलाके में रात भर हाथी उत्पात मचाते रहे। हाथियों के चिंघाड़ने पर निगरानी में लगी वन कर्मियों, पश्चिम बंगाल से आए एक्सपर्ट ट्रैकर्स और ग्रामीणों को इनकी मौजूदगी का अहसास हुआ। निगरानी टीमें जब तक मौके पर पहुंची उससे पहले हाथी जंगल में वापस चले गए।
मालूम हो कि नेपाल की शुक्ला फाटा सेंक्चुरी से आए हाथी पिछले 15 दिन से डीटीआर बफरजोन की मैलानी रेंज जंगल के आसपास फसलों में उत्पात मचा रहे हैं। हाथी जंगल सीमा से सटे और बांकेगंज ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत पहाड़ नगर, ग्रंट नंबर 10, ग्रंट नंबर 3, जटपुरा, कुकरा, सुआाबोझ, खरेहटा, महुरेना के आसपास चहलकदमी कर फसलों को रौंद रहे हैं। अब तक 50 एकड़ से अधिक फसल का नुकसान किसान झेल चुके हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डाइरेक्टर संजय पाठक और डीटीआर बफरजोन के डीडी डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि किशनपपुर सेंक्चुरी और बफरजोन के आसपास हाथियों की चहलकदमी और उनकी गतिविधियों पर पूरी नजर रखी जा रही है। इसके लिए क्षेत्रीय रेंजर, वन कर्मियों और पश्चिम बंगाल से बुलाए गए एलीफैंट मैनेजमेंट टीम के एक्सपर्ट ट्रैकर्स को निर्देशित किया गया है।
24 ट्रैकर्स पर 5 हजार रुपये रोज हो रहा खर्च
पश्चिम बंगाल से आए 24 एक्सपर्ट ट्रैकर्स की टीम पर वन विभाग इनके खानपान और आवागमन पर 5 हजार रुपये रोज खर्च कर रहा है। बावजूद इसके नेपाल के चतुर हाथियों को ट्रैक पर लाने में उन्हें सफलता नहीं मिल रही है। इस समस्या से जूझ रहे ट्रैकर्स आशीष मंडल दुर्गा हैमब्रान, तपन बौरी, अमर लईक आदि ने बताया कि दुधवा का जंगल काफी घना और क्षेत्रफल के लिहाज से काफी बड़ा है। नेपाल से आए हाथी बहुत चतुर और बुद्धिमान हैं। दिन में यह हाथी मड़हा के वर्षों पुराने बांस के जंगल और उससे सटे लंबे और ऊंचे घास के मैदान में शरण लेते हैं। जहां से इनका कोई मूवमेंट नहीं होता। अंधेरा होने पर हाथी वहां से इकट्ठा निकलते हैं, जंगल के बाहरी किनारों पर आने पर ये कई झुंडों में बंट कर अलग-अलग दिशाओं की ओर रुख करते हैं। जिसके चलते हाथियों को ट्रैक करने में दिक्कतें आ रही हैं।
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