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दुधवा के घास मैदानों में पौष्टिक घासों का होगा विस्तार

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Thu, 05 Dec 2019 02:18 AM IST
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व की खाद्य शृंखला को और अधिक मजबूत करने के लिए ग्रासलैंड मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। घास मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर हाल ही में विशेषज्ञों के एक दल ने दुधवा टाइगर रिजर्व का दौरा किया। इस दल का नेतृत्व जाने-माने प्लांटीशियन एसआर यादव कर रहे थे। इस दल ने दुधवा में मिलने वाली घासों का बारीकी से अध्ययन किया।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में विशेषज्ञ दल के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि दुधवा में गन्ना प्रजाति की नरकुल के अलावा थेमेडा, वेटवेरिया, एप्लूडिका म्यूटिका, इंपरेरा आदि लंबी घास बहुतायत हैं। इन घासों को हाथी और गैंडा जैसे बड़े जानवर बेहद पसंद करते हैं और बड़े ही चाव से खाते हैं। इनके अलावा ये घास के मैदान टाइगर का सबसे अच्छा हैबिटेट माने जाते हैं।
घास मैदानों के अध्ययन में यह पाया गया कि छोटे शाकाहारी वन्यजीवों के लिए सबसे ज्यादा पौष्टिक और नर्म डाइकैन्थियम घास दुधवा में कम मात्रा में है। विशेषज्ञों ने इस घास को विकसित करने पर बल दिया। इस घास के लिए दुधवा की जलवायु उपयुक्त पाई गई है। इस घास की विशेषता यह है कि यह अधिक दिनों तक जीवित रहती है। पशुओं के चरने के बाद यह जल्दी ही बढ़ जाती है। इस घास को बारासिंगा, चीतल, पाढ़ा, कांकड़ हिरन, खरगोश आदि छोटे जानवर बड़े चाव से खाते हैं। विशेषज्ञों ने दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक को सलाह दी कि इस घास के विस्तार के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। ताकि दुधवा की खाद्य शृंखला और अधिक मजबूत हो। साथ ही जैवविविधता समृद्ध करने में मदद मिले।
पिछले साल भी घास मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर हुई थी कार्यशाला
दुधवा टाइगर रिजर्व में घास के मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर पिछले साल भी एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यशाला में ग्रासलैंड मैनेजमेंट की रूपरेखा तैयार की गई थी। उसके अनुसार काम भी शुरू हो चुका है। अब वैज्ञानिकों की राय से उपयोगी घास के विस्तार और अनुउपयोगी, हानिकारक घासों को चिह्नित कर हटाने की प्रकिया शुरू की जा रही है।
दुधवा के घास मैदान बनाते हैं यहां की जैव विविधता को समृद्ध
दुधवा टाइगर रिजर्व में घास के मैदान अन्य टाइगर रिजर्व की अपेक्षा काफी अच्छे हैं। यहां हाथी और गैंडा जैसे बड़े जानवरों से लेकर हिरन और खरगोश जैसे छोटे जानवरों तक की पसंदीदा घासें मिलती हैं, जो प्राय: दूसरी जगहों पर नहीं हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व में जैव विविधता को समृद्ध रखने के लिए घास के मैदानों का वैज्ञानिक प्रबंधन एक सतत प्रक्रिया है। यह निरंतर चलती रहती है। समय-समय पर इसमें विशेषज्ञों की सलाह और सहायता ली जाती है। हाल ही में कोल्हापुर महाराष्ट्र की शिवा जी यूनीवर्सिटी के वैज्ञानिक एसआर यादव ने दुधवा आकर यहां की घासों का अध्ययन किया है और कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। जिन पर अमल किया जा रहा है।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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