करोड़ों खर्च, फिर भी किसानों के काम न आईं छोटी मंडियां

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Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2020 02:13 AM IST

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लखीमपुर खीरी। किसानों को उनके घर के पास ही फसल का उचित समर्थन मूल्य और मंडी की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 10 किमी की परिधि में एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब (एएमएच) बनाए गए हैं, लेकिन यह किसानों के काम नहीं आ रहे है। वर्ष 2011 से 2014 तक जनपद के अलग-अलग 68 गांवों में एएमएच स्थापित किए गए हैं, जिनमें नीलामी चबूतरे और दुकानें बनी हैं। इनके निर्माण पर करीब 16.60 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं, जिसका फायदा अब तक निर्माण एजेंसी और ठेकेदारों ने उठाया है। वहीं किसानों के लिए एएमएच सिर्फ सफेद हाथी बने हुए हैं।
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गांवों में एएमएच को निश्चित दूरी के मानक के हिसाब से स्थापित किया गया है, जहां पर किसानों को मंडी की भांति सुविधा उपलब्ध करानी थी। इसके लिए एएमएच में बनी दुकानें आवंटित की जा चुकी हैं, लेकिन कहीं दुकानदार नजर नहीं आते और न ही दुकानें खुलती हैं। कई जगहों पर दुकानें आवंटित नहीं हो सकी हैं। हालात यह हैं कि किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए एएमएच सालों बाद भी शुरू नहीं हो सके हैं। इनमें व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं हो पाई हैं, तो दूसरी ओर देखरेख के अभाव में चबूतरे, टिन शेड जर्जर होने लगे हैं। लखीमपुर मंडी के क्षेत्र में 16 एएमएच बनाए गए हैैं। इनमें धौरहरा तहसील मुख्यालय पर बनाए गए एएमएच में तो चबूतरे पर रैन बसेरा बना दिया गया है। दुकानों को आवंटित कर दिया गया है, लेकिन इनमें व्यापार नहीं हो रहा है और न ही व्यापारी बैैठ रहे हैं।

कर्मचारियों की कागजों पर तैनाती
एएमएच की देखरेख और संचालन कराने के लिए इनमें कर्मचारियों की तैनाती की गई है। मसलन कुछ एएमएच में मंडी निरीक्षकों की तैनाती है, तो कहीं सुरक्षा गार्ड और मंडी सहायकों की तैनाती है। हकीकत में ड्यूटी करना तो दूर, इनमें झांकने तक कोई नहीं जाता। इसका भी कारण है कि मंडियों में ज्यादातर पद रिक्त हैं, जिससे इनमें कर्मचारियों की तैनाती संभव नहीं हो पा रही है।
अन्य व्यापारियों को दुकानें आवंटित करने के आदेश
मंडी परिषद ने अन्य व्यापारियों को दुकानें आवंटित करने के आदेश दिए हैं। इनमें अनाज की खरीद-फरोख्त की योजना फेल होने के चलते अन्य व्यापारियों को दुकानें आवंटित करके शुल्क भरपाई करने की मंशा से ऐसा किया गया है। हालांकि इस आदेश पर भी अब तक अमल नहीं कराया जा सका है।

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