जहरीला हो गया नदियों का पानी, पट गए कुंए

Lakhimpur Updated Mon, 05 May 2014 05:31 AM IST
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नदियों में गिराया जा रहा चीनी मिलों का गंदा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। जिले में सरकारी उपेक्षा के चलते नदियों का पानी जहरीला हो गया है। गांवों की छोटी-छोटी झीलें सूख गई हैं, इंडिया मार्का हैंडपंपों के बढ़ते प्रयोग से कुंआें का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है। कुंए पाटे जा रहे हैं जिससे पीने और पशुओं के लिए पानी का संकट है। मनरेगा योजना के तहत जिले में तालाब तो खुदवाए गए लेकिन उपेक्षा के चलते वे सूखे पड़े हैं।
जिले में शारदा, घाघरा, मोहाना, सुहेली, सरयू, उल्ल और कंडवा नदियां हैं। हालांकि शारदा और घाघरा नदियों के किनारे रहने वाले लोग तो इन नदियों के पानी का प्रयोग सिंचाई, पशुओं को नहलाने आदि के लिए करते हैं लेकिन जिले में लगने वाली चीनी मिलों ने उल्ल और कंडवा सहित कई नदियों का पानी जहरीला कर दिया है। शहर के समीप होकर निकली कंडवा नदी में चीनी मिल का गंदा पानी गिराया जाता है जिससे वहां की मछलियां मर गई हैं यह पानी पशुओं के पीने लायक नहीं बचा है। इसके अलावा शहर का कचरा और गंदा पानी भी उल्ल नदी में गिराया जाता है जिससे इस नदी का पानी भी जहरीला हो गया है। शिवसेना सहित विभिन्न संगठनों ने इसको लेकर आंदोलन भी किया लेकिन नदियों का पानी बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।
वर्षा जल संचयन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजना के तहत लगभग 350 तालाब खुदवाए गए इसके अलावा कुछ प्राकृतिक तालाब भी हैं कुल तालाबों की संख्या लगभग 1199 है लेकिन इसमें से अधिकतर तालाब सूख गए हैं। नियम यह है कि गर्मियों में इन तालाबों में पानी भरवाया जाए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इससे गांवों में भी पशुओं के लिए पानी की दिक्कत हो रही है। गांवों में जल की आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण साधन कुंए माने जाते थे लेकिन अब शायद ही किसी गांव में कोई कुंआ प्रयोग में आता हो, अधिकतर कुंओं के जल स्रोत सूख गए हैं तो तमाम कुंए कूड़े से पाट दिए गए हैं। इस तरफ भी किसी ने ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी है। शहरों में अधिकतर तालाबों को पाट कर उनपर कॉलोनियां बसा दी गईं जिससे वर्षा जल का संचयन नहीं हो पा रहा है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो जिले में बहुत जल्दी पानी का संकट खड़ा हो जाएगा।
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प्रयास किया लेकिन रहे बेनतीजा
जिले में पर्यावरण और वन्य जंतुओं की सुरक्षा के लिए कार्य करने वाले वाई डिग्री कॉलेज के सेवानिृवत्त प्रोफेसर डॉ.वीपी सिंह बताते हैं कि उन्होंने कंडवा नदी में चीनी मिल का पानी गिराने पर रोक लगाने के लिए शासन को कई बार लिखा। पर्यावरण के उप निदेशक से डीएम के सामने बात भी की, उन्होंने आश्वासन भी दिया लेकिन कुछ नहीं हो पाया।
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नदियों में गंदा पानी गिराने की होगी जांच
नदियों में जो गंदा पानी गिराया जा रहा है उसकी उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली है फिर भी वह सभी एसडीएम से इसकी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। सूखा योजना के तहत तालाबों में पानी भरवाया जाता है इसके लिए सभी अधिकारी तैयारी कर रहे हैं। प्लानिंग करके सभी तालाबों में पानी भरवाया जाएगा।
-हरिकेश चौरसिया, एडीएम, खीरी
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