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मौसम ने फिर दिखाए तल्ख तेवर

Lakhimpur Updated Sun, 24 Feb 2013 05:30 AM IST
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तेज हवाओं के साथ हुई रिमझिम बारिश, ठंड बढ़ी
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लखीमपुर खीरी। मौसम ने एक बार फिर करवट बदली। सुबह से आसमान में बादल घिर आए और तेज हवाएं चलने लगी। इसके बाद बारिश की झड़ी लग गई। यहां बारिश ज्यादा तो नहीं हुई लेकिन तेज सर्द हवाओं ने लोगों को कंपा कर रख दिया। एकाएक ठंड बढ़ने से लोगों को भारी भरकम गर्म कपड़े निकालने पड़ गए।
बेमौसम हुई इस बारिश से गेहूं की फसल को तो फायदा हुआ है लेकिन लाही, सरसों की फसल को भारी क्षति पहुंची है। तेज हवाओं के कारण फसल गिर गई। इससे फलियों के खराब हो जाने से नुकसान हुआ है। पानी बरसने से गन्ने की सिंचाई का खर्च बच गया है। तापमान में गिरावट आने से ठंड एकाएक बढ़ गई। इसके बावजूद जनजीवन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है।
पलियाकलां। तराई क्षेत्र की पलिया तहसील में एक बार फिर आसमान में घने बादल छा गए और तेज हवाओं के बीच रुक-रुककर बूंदाबांदी भी जारी रही। इससे मौसम काफी खराब हुआ और तापमान में गिरावट आई। सारे दिन सूरज नहीं निकला और आम जनजीवन प्रभावित हुआ। सर्दी का प्रकोप भी बढ़ गया और गर्म बिस्तर व कपड़े फिर निकल आए। हमारे चंदनचौकी, खजुरिया, मझगईं और भीरा सूत्रों के मुताबिक खराब मौसम के चलते ठंड बढ़ने और खेतों में कटी पड़ी लाही की फसल को काफी नुकसान हुआ है।
मैलानी। मौसम का रुख सुबह अचानक एक बार फिर बदल गया। सुबह घने बादलों के बीच ही नौ बजे आंधी भी आई। उसके बाद भी घने काले बादल छाए रहे और तेज हवाएं चलती रहीं। बादलों का डेरा देख बारिश की आशंका से किसानों की चिंताएं फिर बढ़ गईं।
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रबी फसलों पर मंडराया संकट
किसानों को नुकसान होने की आशंका
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। पिछले दो माह से मौसम में उतार-चड़ाव के चलते रबी की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे है। शुरुआती दौर की वर्षा के बाद जहां एक तरफ किसानों के चेहरे खिल उठे थे तो वहीं अब रुक-रुक कर हो रही तेज वर्षा से फसलों को हो रहे नुकसान से किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं।
क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि वर्षा अब फसलों को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा रही है। प्रगतिशील किसान हरिकिशन अग्रवाल का कहना है कि वर्षा रबी की फसल को नुकसान पहुंचाएगी। किसान संजय का कहना है कि इस बारिश में आलू की फसल चौपट हो गई है। अधिक वर्षा से फसल में रोग लगने पर उत्पादन में कमी होगी। किसान कृष्ण मोहन सेठ का कहना है कि एक तरफ जहां शुरुआती दौर की वर्षा रबी फसल के लिए वरदान साबित हुई, तो वहीं अब लगातार अधिक वर्षा से फसलों के उत्पादन पर खराब असर पड़ेगा। प्रगतिशील किसान अनिल यादव का कहना है कि इस वर्षा से खेतों में खड़ी लाही, मसूर और चने की फसलों को नुकसान हुआ है। जिससे उत्पादन में कमी होगी।
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आम का बौर हुआ कुंद
मूड़ा सवारान। मौसम की बेरुखी आम उत्पादकों पर भारी पड़ सकती है। फरवरी का आधा महीना बीतने के बाद भी आम के पेड़ों पर बौर के दर्शन नहीं हो सके हैं।
बौर आने की धीमी प्रक्रिया से आम उत्पादकों को चिंता होने लगी है। गत वर्ष क्षेत्र के कई बागों में आम की फसल ठीक न होने से आम उत्पादकों को गहरा नुकसान उठाना पड़ा था। इस साल अब तक आम के पेड़ों पर बौर आने की प्रक्रिया लगभग शून्य होने से बागबान परेशान दिख रहे हैं। क्षेत्र के कई बागबानों का कहना है कि यदि फरवरी में बौर आता है तो ठीक है लेकिन मार्च में बौर आने पर उत्पादन में कमी आएगी। क्योंकि उस समय तेज धूप, हवा, कीटों का प्रकोप अधिक होता है। जो फूल दे रहे बौर को काफी नुकसान पहुंचाता है। मौसम में आ रहे परिवर्तन से बौर आने की प्रकिया काफी धीमी है यदि मौसम में बदलाव आ जाए तो आम के उत्पादन पर काफी असर पड़ेगा।
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