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बेहिसाब खर्चा नहीं कर सकेंगे ‘प्रधान जी’

Lakhimpur Updated Mon, 11 Feb 2013 05:32 AM IST
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खर्च का रखना होगा पूरा ब्योरा
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लखीमपुर खीरी। राज्यवित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि और उससे कराए गए विकास कार्यों का लेखा-जोखा रखने के साथ भौतिक सत्यापन का विवरण भी ग्राम प्रधानों और सेक्रेटरी को रखना होगा। इस धन के व्यय पर मनमानी करने वाली ग्राम पंचायतों पर नकेल कसने के लिए मुख्य विकास अधिकारी ने विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए हैं। यही नहीं उन्होंने इसके निरीक्षण/सत्यापन के लिए सहायक विकास अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है।
ग्राम पंचायतों को मनरेगा के अलावा राज्य वित्त आयोग से भी काफी धन विकास के लिए मिलता है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक मनरेगा के तहत मिलने वाली धनराशि का तो लेखा जोखा रखने के साथ सोशल आडिट ग्राम पंचायतें कराती हैं, लेकिन राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि का लेखा जोखा आम तौर पर ग्राम पंचायतें नहीं रखती, न ही इसका आडिट आदि कराती हैं। इससे इस धन के दुरुपयोग का अधिक खतरा बना रहता है। नतीजन इस धनराशि से हुए कार्यों के बावत अधिकांश शिकायतें आती हैं। यही नहीं निरीक्षण सत्यापन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को भी खासी दिक्कत होती है। अब ग्राम पंचायत के प्रधानों व पंचायत सेक्रेटरी को इसका लेखा जोखा तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। पहले चरण में 995 ग्राम पंचायतों में से 51 ग्राम पंचायतों के निरीक्षण को अधिकारी भी नियुक्त कर दिए गए हैं।

कोष बही, बैठक से संपत्ति तक का अपडेट रखना होगा डेटा
किस वित्तीय वर्ष तक आडिट संपन्न हो चुकी है से लेकर चालू वित्तीय वर्ष में संपन्न ग्राम सभा की बैठकों के साथ किस तिथि तक कोष बही पूर्ण है इसका भी विवरण अंकित करना होगा। अचल संपत्ति रजिस्टर के साथ ही सार्वजनिक निर्माण कार्यों, जन्म-मृत्यु सूचना देने की रसीद, कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र, एजेंडा रजिस्टर/जारी अंतिम एजेंडे की तिथि, बाउचर रजिस्टर, गार्ड फाइल, सृजित परिसंपत्तियों का रजिस्टर आदि पूर्ण रखने होंगे।
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राज्य वित्त आयोग से मिले धन तथा तेरहवां वित्त आयोग से मिले धन से ग्राम पंचायत में कितने वर्ग मीटर खड़ंजा निर्माण व मरम्मत कार्य कराया गया। हैंडपंप कितने हुए मरम्मत, कितने बने भवन, कितनों की हुई मरम्मत, सफाई कर्मी किट, पेयजल, नागरिक सुविधा के लिए कराए गए कार्यों के लेखा जोखा का भी पूर्ण विवरण के साथ अभिलेख तैयार रखना होगा।
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इन अभिलेखों के पूर्ण होने से विकास कार्यों में पारदर्शिता रहेगी। प्रधान के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों की संख्या में कमी आएगी तथा गड़बड़ी व अपव्यय की गुंजाइश खत्म होगी। प्रथम चरण में 51 ग्राम पंचायतों में तैयार इन अभिलेखों के निरीक्षण के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी, सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी, एडीओ (पी) की नियुक्ति कर दी गई है। यह लोग 18,23 व 25 फरवरी को संबंधित ग्राम पंचायतों में पहुंच इसका निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण आख्या 20, 25 व 27 फरवरी को आख्या सहित डीपीआरओ व उन्हें भेजेंगे।
सुरेंद्र विक्रम, सीडीओ

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