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इंडो-नेपाल बार्डर पर विकास की रफ्तार सुस्त

Lakhimpur Updated Mon, 28 Jan 2013 05:30 AM IST
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शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
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वन क्षेत्र होने के कारण रोजगार के अवसर भी कम
योजनाओं की फाइल अभी शासन ने लंबित
सिटी रिपोर्टर
लखीमपुर खीरी। इंडो-नेपाल बार्डर पर थारू जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में विकास की गति तेजी नहीं पकड़ पाई है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव ने महत्वपूर्ण मूलभूत योजनाओं के विकास का प्रस्ताव शासन को भेजा था। कई माह बीत जाने के बावजूद महत्वपूर्ण योजनाओं के संबंध में भेजी गई पत्रावली शासन स्तर पर लंबित है। रोजगार परक शिक्षा की जरुरत महसूस की जा रही है, क्योंकि वन क्षेत्र होने के कारण रोजगार के अवसर भी कम है। अभी एसएसबी ने थारू बहुल्य क्षेत्रों में सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण देने की शुरुआत करने की ठानी है।
बार्डर एरिया को विकसित करने के लिए सपा के राष्ट्रीय महासचिव रवि वर्मा ने विकास कार्यों का विस्तृत प्रस्ताव भेजा था। जिसे पिछले साल मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव की बैठक में मंजूरी मिल चुकी है। थारू जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के सेंटर चंदन चौकी में शिक्षा की विशेष आवश्यकता महसूस करते हुए इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज खोले जाने का प्रस्ताव किया गया था। इसी तरह स्टेडियम और छात्रावास के निर्माण को मंजूरी दी जा चुकी है। वहीं आईटीआई कॉलेज में कुछ और ट्रेडों के बढ़ाने का प्रस्ताव है। स्वास्थ्य सुविधाओं को दूर करने के लिहाज से चंदन चौकी में आधुनिक सुविधाओं युक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव हो चुका है। इसी तरह चंदन चौकी में एलपीजी गैस और पेट्रोल पंप एकीकृत जनजाति विकास परियोजना के परिसर में संचालित करने का प्रस्ताव किया गया है। बार्डर और वन क्षेत्र होने के कारण कुछ योजनाओं के लिए संबंधित विभागों से अनुमति प्राप्त करना जरूरी है।
सूत्रों की माने तो विकास योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से न होने के कारण लोगों में गरीबी व अशिक्षा अभी भी व्याप्त है। वहीं लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना चुनौती बना हुआ है। हालांकि शासन ने हाल में ही नाबार्ड के सहयोग से थारूओं के परंपरागत हुनर को रोजगार परक बनाने की कवायद शुरू की है, लेकिन यह प्रयास नाकाफी बताए जा रहे है।
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थारू बाहुल्य क्षेत्र में विकास कार्यों से संबंधित प्रस्तावों का मुख्यमंत्री स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है। उम्मीद है कि शीघ्र ही शासन स्तर से पत्रावली को मंजूरी मिल जाएगी।
बीके सिंह, प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी
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बार्डर एरिया में निवास करने वाले ज्यादातर लोग अभी भी गरीबी की विभीषिका से ग्रस्त हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। एसएसबी ने कटिंग, टेलरिंग समेत कई तरह के प्रशिक्षण देने का अभियान शुरू किया है। थारू क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं।
असीम कुमार मलिक, डीआईजी, एसएसबी
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