पहले भी मौत को गले लगा चुके कई

विज्ञापन
Lakhimpur Published by: Updated Mon, 28 Jan 2013 05:30 AM IST

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
अधिकांश ने फंदे पर झूलकर ही दी जान
विज्ञापन

निघासन/लखीमपुर। तराई में प्रेमी युगल के मौत को गले लगा लेने का कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहां प्रेमी युगल साथ-साथ जिंदगियां खत्म कर चुके हैं। इनमें अधिकांश मौत फांसी के फंदे पर ही झूले।
क्षेत्र के गांव मोहबतिया बेहड़ में करीब चार बरस पहले गांव की जूली को अपने पड़ोसी नीरज से मोहब्बत हो गई थी। समाज में परिजनों ने अपनी बदनामी के डर से दोनों के प्यार पर पहरा बिठाया तो दोनों फांसी के फंदे पर झूल गए। अदलाबाद में करीब नौ बरस पहले खुशीराम को भी अपने पड़ोसी चौदह साल की नाबालिग लड़की से मुहब्बत हो गई थी। परिजनों को उनका प्यार रास नहीं आया और दोनों ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। कौड़िया गांव के दिनेश को भी अपनी पड़ोसी सजातीय युवती से प्यार हो गया। प्यार की मंजिल न मिलते देख दोनों ने भी जान दे दी। करीब तीन बरस पहले गांव बल्लीपुर के एक युवक को दूसरी विरादरी की लड़की से प्यार हो गया। परिजनों ने इतना पीटा कि दो रोज बाद दोनों की मौत हो गई। इसी क्षेत्र के गांव दमनाबेहड़ में भी करीब तीन बरस पहले प्रहलाद और कुन्नी को प्रेमलाप करते पकड़ लिया गया। उसके बाद दोनों ने फांसी लगाकर जान दे दी। सिंगाही थाना क्षेत्र के गांव भिड़ौरा और उमरा, निघासन के लुधौरी, कोनहापुरवा, जगनपुरवा आदि गांवों में भी कुछ प्रेमी जोड़ों ने जब देखा कि वह साथ नहीं जी नहीं सकेंगे तो दोनों ने साथ-साथ मौत को ही गले लगा लिया।

000
फिल्म सीरियल में प्यार के आक्रमक रुख आदि को देखने के बाद नाबालिग बच्चों की मानसिकता में भी परिवर्तन आ जाता है। यह परिवर्तन कभी-कभी आक्रमक हो जाता है। इसके अलावा सोच लेते हैं कि मरने के बाद भी उनका नाम प्यार की मिशाल के रूप में लिए जाने वाले चंद नामों के साथ लिया जाएगा। इस लिए भी वह आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
डॉ. दिनेश दुआ, मानसिक रोग विशेषज्ञ
000
शिक्षा का अभाव और फिल्मी दुनिया की चकाचौंध में खोकर कुछ लोग गलत कदम उठा लेते हैं। हमें अपने बच्चों को सही गलत की बात एक बाप बनकर नहीं एक दोस्त बनकर बतानी चाहिए।
उमाकांत जायसवाल, अधिवक्ता
000
आधुनिक युग में लोग फिल्मों में दिखाई जाने वाली कहानी को अपना सब कुछ मान लेते हैं। बड़ों को उसे एक मनोरंजन मात्र बताकर असली जीवन की कला सिखानी चाहिए।
योगेश पंत योगी, प्रबंधक सिटी पब्लिक स्कूल सिंगाही

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X