...तो धान उत्पादन में पिछड़ जाएगा खीरी

Lakhimpur Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
लक्ष्य 78,200 एमटी के सापेक्ष हो सकी 35 फीसदी धान खरीद
पिछले वर्ष 58,253 एमटी धान खरीद हुई थी
अमित गुप्ता
लखीमपुर खीरी। शासन के निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक इस वर्ष धान खरीद के आंकड़े अब तक काफी कमजोर हैं। अब तक सरकारी क्रय केंद्रों पर महज 35 फीसदी यानी 27,925 एमटी धान खरीद हो सकी है, जो पिछले एक दशक में सबसे कमजोर प्रदर्शन है। इससे पहले कभी ऐसे हालात नहीं बने, लेकिन इस वर्ष अच्छे धान उत्पादन के बावजूद आंकड़ों की पैमाइश में खीरी के पीछे रह जाने के आसार बन गए हैं। पिछले खरीफ सीजन में जिले ने धान खरीद में रिकार्ड बनाया था, लेकिन इस वर्ष फिसड्डी रह गया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष दिसंबर 2011 तक क्रय केंद्रों पर 58,253 एमटी धान खरीद हुई थी। वहीं मिलर्स ने पिछले वर्ष 1,76,826 एमटी धान खरीदा था। खरीफ सीजन 2012-13 में धान खरीद को शुरुआत से ही नजर लग गई थी, क्योंकि अक्तूबर में क्रय केंद्र शुरू नहीं हो सके थे। शासन ने इस वर्ष जिले का धान खरीद लक्ष्य 78,200 एमटी निर्धारित किया, जबकि पिछले वर्ष 74,500 एमटी था। 24 दिसंबर 2012 तक धान खरीद के आंकड़ों के मुताबिक सरकारी क्रय केंद्रों पर 27,925 एमटी धान खरीद हुई है, जो कुल लक्ष्य का 35 फीसदी है। लक्ष्य में बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी मशीनरी एक्टिव नजर नहीं आई तो रही सही कसर एफसीआई ने पूरी कर दी। स्टेट व सेंट्रल पूल के बीच चली तकरार के बीच किसानों और मिलर्स की हालत खराब हुई है। हालांकि सूत्रों की माने तो धान उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले कम नहीं हुआ है, लेकिन इस बार सरकारी केंद्रों पर धान खरीद ठप होने से इसकी सप्लाई पड़ोसी प्रदेशों में की जा रही है। इससे जिले के आंकड़े गुमनामी के दौर में पहुंच गए हैं। अच्छे उत्पादन के बावजूद आंकड़ों की बाजीगरी में खीरी को पिछड़ना पड़ा है।
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सरकार भी हुई ‘नाउम्मीद’
धान खरीद में आंकड़ों के लिहाज से पिछड़ने का गम शायद सरकार को भी सता रहा है। इसलिए शासन ने निर्देश दिए हैं कि 15 जनवरी तक 50 फीसदी धान खरीद का लक्ष्य पूरा कर लिया जाए।
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किसानों के अटके 1217 लाख
काफी दिक्कतों के बाद किसान अपना धान सरकारी क्रय केंद्रों पर बेच सके थे, लेकिन अब महीनों से भुगतान पाने के लिए अफसरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। धान खरीद एजेंसी पीसीएफ पर सबसे ज्यादा 1074.81 लाख रुपये किसानों का बकाया है। कर्मचारी कल्याण निगम पर 11.53 लाख रुपये बकाया हैं। एनसीसीएफ पर किसानों के 16.92 लाख बकाया हैं। इसी तरह यूपीएसएस पर 114.54 लाख रुपये किसानों का बकाया है।
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एफसीआई ने चावल रिजेक्ट कर मुश्किलें पैदा की थीं, जिसके चलते क्रय केंद्रों पर खरीद बंद हुई तो चावल डिलीवर्ड न होने के कारण भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिससे किसानों से धान खरीद बंद करना मजबूरी था। प्रयास किए जाएंगे कि लक्ष्य के सापेक्ष 50 फीसदी खरीद पूरी कर ली जाए।
-सीबी उत्तम, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी

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