यहां तो जंगल से ज्यादा बाहर घूम रहे हैं बाघ

Lakhimpur Updated Tue, 25 Dec 2012 05:30 AM IST
कई बाघ शावक दिखने से वन्यजीव प्रेमियों में खुशी
जंगल के बाहर बाघों की निगरानी में जुटा वन विभाग
लखीमपुर खीरी। इन दिनों बाघ जंगल में कम जंगल से बाहर ज्यादा नजर आ रहे हैं। जंगल से सटे इलाके में गन्ने के खेत इन बाघों को खूब रास आ रहे हैं। भले ही जंगल के बाहर बाघों की मौज ही मौज हो लेकिन वन विभाग के लिए यह मुसीबत का सबब बन गए हैं। शिकारियों की नजर से बाघों को बचाने के लिए वन विभाग को इनकी निगरानी करानी पड़ रही हैं। बाघों के खेतों में आ जाने से जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीण दहशत में हैं।
इन दिनों कई जगहों पर बाघिन शावकों के साथ देखी जा रही हैं। उत्तर खीरी वन प्रभाग के पलिया रेंज में दो दिन पहले ही एक बाघिन ने गन्ने के खेत में दो बच्चों को जन्म दिया। लगातार शावकों के दिखने से वन्यजीव विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि खीरी जिले में बाघों की आबादी बढ़ रही है। दुधवा पार्क के अधिकारियों का मानना है कि यहां बाघों की आबादी बढ़कर 110 से ज्यादा हो गई है।
जंगल में बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास की कमी नहीं है लेकिन जंगल के बाहर भोजन की प्रचुरता इन बाघों को बाहर खींच लाती है। जब गन्ने की फसल खड़ी होती है तब जंगल से निकल कर तमाम शाकाहारी जीव गन्ने के खेतों में आ जाते हैं। जब बाघ का भोजन बाहर हो तो भला बाघ जंगल में कैसे रुक सकता है। इन शाकाहारी जानवरों के शिकार के लिए बाघ भी बाहर आ जाते हैं। कभी-कभी तो यह आबादी तक आ पहुंचते हैं।
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एक माह से कई बाघ दिखे जंगल से बाहर
बीते पांच दिसंबर को मझगईं कस्बे से दो किलोमीटर दूर स्थित मटेहिया घाट पर चर रही एक भैंस को बाघ उठा ले गया। नौ सितंबर को सुमेरनगर में गुलदार एक घर में घुस कर दो बकरियां उठा ले गया। 10 दिसंबर को दुधवा के सलूकापुर रेंज में बाघ ने एक गैंडे को जख्मी कर दिया। 21 दिसंबर को मझगईं इलाके के तिकोना फार्म पर बाघ देखा गया। इसी तरह गोला-अलीगंज रोड पर नकहिया नाले के पास एक बाघिन दो शावकों के साथ कई बार देखी गई। भीरा, मैलानी और मोहम्मदी रेंज में भी कई बार ग्रामीणों को बाघ दिखा है।
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जंगल के बाहर बाघ नहीं सुरक्षित
बाघों के जंगल से बाहर निकलने पर बाघ की सुरक्षा तो खतरे में पड़ती ही है। इंसानों और पालतू मवेशियों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है। 23 दिसंबर को भीरा-पलिया रोड पर किसी वाहन की चपेट में आकर एक फिसिंग कैट की मौत हो गई। इससे पहले कई बाघ और फिसिंग कैट सड़क दुर्घटना में मारे जा चुके हैं। इनके अलावा जंगल के बाहर शिकारियों की नजर भी इन पर रहती है। कई बार इंसान और पालतू जानवर भी बाघों का शिकार बनते हैं।
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लगातार की जा रही बाघों की निगरानी
बाघों के जंगल से बाहर निकलने पर उनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग ने क्विक रिस्पांस टीम का गठन किया है। इनमें 11 प्रशिक्षित वनकर्मी शामिल है। टीम के तीन सदस्यों को ट्रैंकुलाइजेशन का प्रशिक्षण भी दिया गया है। यह टीम जंगल से बाहर सक्रिय बाघों की सतत निगरानी करती है। टीम ग्रामीणों को सुरक्षा के प्रति सचेत करती है।
-नीरज कुमार, डीएफओ (साउथ, खीरी)

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