बजट में अंतर बच्चों की सेहत पर भारी

Lakhimpur Updated Sun, 23 Dec 2012 05:31 AM IST
आवासीय विद्यालयों का मामला
लखीमपुर खीरी। आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की सेहत पर बजट का अंतर भारी पड़ रहा है। प्रति बच्चे के हिसाब से मिलने वाले बजट की तुलना में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय सबसे पीछे है। जिले में सबसे अधिक 16 विद्यालय संचालित हैं। इसके अलावा जवाहर नवोदय विद्यालय और राजकीय आश्रम पद्घति विद्यालय संचालित हैं। कई वर्षों से इनके बजट में वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन महंगाई की दर प्रतिवर्ष तेजी से बढ़ रही है। इस बावत अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराते हुए बजट वृद्धि का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अभी तक कोई नतीजा सामने नहीं आया है।
जिले में विभिन्न विभागों के अलग-अलग आवासीय विद्यालय संचालित हैं। जिनमें बच्चों को भोजन आदि की व्यवस्था सरकार के जिम्मे है। इन विद्यालयों में प्रति बच्चे पर मिलने वाले बजट में काफी अंतर है, जबकि छात्र-छात्राओं की दैनिक आवश्यकताएं लगभग एक-समान ही हैं। मसलन जनजाति विकास विभाग द्वारा संचालित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में 1200 रुपये प्रतिमाह एक छात्र पर खर्च किए जाने का प्राविधान है। जिसे दिसंबर 2008 में लागू किया गया था। प्रतिदिन प्रति छात्र 40 रुपये खर्च होते हैं। जिसमें सुबह का नाश्ता से लेकर दोनों समय का खाना और बनाने के लिए ईंधन शामिल है। इस बजट को लागू हुए करीब चार वर्ष बीत चुके है। तब से अब तक महंगाई की दर में दोगुने से भी अधिक इजाफा हो चुका है। ऐसे में छात्रों की दी जाने वाली डाइट कितनी बेहतर होगी? जिले में इस विभाग के चार विद्यालय संचालित हैं, जिनमें अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। हालांकि तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी ने इन विद्यालयों का बजट बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिस पर अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है।
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कस्तूरबा के हालात सबसे खराब!
गरीब वर्ग की छात्राओं के लिए संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में प्रति छात्रा के हिसाब से 900 रुपये प्रतिमाह का बजट निर्धारित है। यानी प्रतिदिन 30 रुपये प्रत्येक छात्रा पर खर्च किए जाने का प्रावधान है। जिसमें मंजन, नाश्ता से लेकर दोनों समय का खाना शामिल है। यह निर्धारण पिछले कई सालों से चला आ रहा है। जबकि महंगाई के चलते खाद्य वस्तुएं तेज हुई हैं। गैस सिलेंडर में भी दोगुने से अधिक वृद्धि हो चुकी है। खास बात यह भी है कि छात्राओं को यूनिफार्म के लिए अलग से बजट नहीं है, बल्कि इसी में समायोजित किया जा रहा हैै। सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी पृथ्वीराज सिंह ने बताया कि बजट की कमी से उत्पन्न दिक्कतों के चलते उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
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जवाहर नवोदय में कुछ राहत
मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय द्वारा संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय मितौली में हालात कुछ हद तक बेहतर माने जा सकते हैं। हालांकि यहां भी बच्चों के नाश्ते-खाने पर 40 रुपये प्रतिदिन खर्च किए जाने का प्राविधान है, लेकिन अन्य दैनिक वस्तुओं जैसे मंजन, तेल आदि के लिए अलग से बजट निर्धारित है।
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मामला संज्ञान में है। बैठकों में संबंधित अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया है। आवासीय विद्यालयों के अलावा मिडडेमील और जेल में कैदियों को दिए जाने वाले भोजन पर भी महंगाई का प्रतिकूल असर पड़ा है। इसके लिए शासन को अवगत कराते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
मनीष चौहान, जिलाधिकारी, लखीमपुर खीरी

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