प्रसव के बाद 42 दिन में मौत पर देनी होगी सूचना

Lakhimpur Updated Wed, 19 Dec 2012 05:31 AM IST
स्वास्थ्य सेवाओं को और बनाया जाएगा प्रभावी
लखीमपुर खीरी। जिले में मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाया गया है। साथ ही अब जन्म से 42 दिन तक होने वाली मौतों को भी प्रसव से ही जोड़कर देखा जाएगा। सीएमओ के स्तर से इस तरह की मौतों की सूचना शासन को भेजी जाएगी।
शासन स्तर से मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए जननी सुरक्षा योजना चलाई गई हैं। गर्भवती महिला को विशेष पोषण देने और टीकाकरण आदि की व्यवस्था करानी है। देखरेख के लिए आशाओं और आंगनबाड़ी कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब महिला के गर्भवती होने के बाद से प्रसव के 42 दिन तक यदि महिला की मौत होती है तो उसकी भी सूचना शासन को भेजी जाएगी। इस तरह की मौत के कारणों का पता भी लगाया जाएगा। इस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए सीएमओ ने पिछले सप्ताह सभी सीएचसी प्रभारियों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधिकारियों के साथ बैठक कर इस योजना को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। योजना के अनुसार यदि प्रसव के 42 दिन बाद तक किसी महिला की मौत होती है तो इस बात की जांच होगी कि कहीं उसकी मौत प्रसव के चलते या प्रसव के दौरान हुए संक्रमण या कुपोषण आदि से तो नहीं हुई है। सीएमओ डॉ. प्रभाकर सिंह ने बताया इस योजना का उद्देश्य भी मातृ मृत्यु दर में कमी लाना ही है। उन्होंने कहा आशाओं को भी निदेश दिए गए। गर्भवती महिलाओं का पूरा डाटा अपने पास रखें और नियमित रूप से विभाग को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा यदि किसी महिला की मौत प्रसव के 42 दिन बात तक होती है तो आशा उसकी सूचना संबंधित पीएचसी और सीएचसी पर देगी।
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बाल संरक्षण के लिए कार्यशाला का आयोजन
लखीमपुर खीरी। कैथोलिक हेल्थ एसोसिएशन ने जिला अस्पताल में एक कार्यशाला का आयोजन किया इसमें समेकित बाल संरक्षण कार्यक्रम पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में एसीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने बताया, कि अपना प्रदेश मातृ एवं शिशु मृत्युदर में बहुत आगे है। इसमें सुधार लाने के लिए सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है। यहां चाई के समन्वयक आशुतोष मिश्रा ने बताया कि समुदाय स्तरीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए सहयोगात्मक पर्यवेक्षण की शुरुआत यूनिसेफ एवं एनआरएचएम के सहयोग से की गई थी। इसकी सफलता को देखते हुए एएनएम एलएचवी का भी सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के माध्यम से ज्ञानवर्धन व क्षमता वर्धन किया गया ताकि वे अपने क्षेत्र में गर्भवती महिलाएं, धात्री महिलाएं एवं नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए पूर्ण रूप से सक्षम हों जाएं। कार्यशाला में मुख्य रूप से जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एनके शर्मा,चाई के उपजिला समन्वयक संजय कुमार सिंह, रिजवान अली, महिला सीएमएस डॉ. रश्मि के अलावा तमाम स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।

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