जेई के विशेष अभियान को झटका

Lakhimpur Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
न बनी कार्ययोजना न आई वैक्सीन
एक दिसंबर से शुरू होना था अभियान
शिवकुमार गौड़
लखीमपुर खीरी। जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) जैसी घातक बीमारी को लेकर चलाए जाने वाले अभियान को शुरू होने से पहले ही झटका लग गया है। जिले को इस बीमारी से मुक्त करने में न तो स्वास्थ्य विभाग ने कोई गंभीरता दिखाई और न शासन ने। इसी का नतीजा है कि एक दिसंबर से शुरू होने वाला यह अति महत्वपूर्ण अभियान ठंडे बस्ते में चला गया है। हालत यह है कि इसको लेकर न तो स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई कार्ययोजना बनाई गई है और न ही शासन स्तर से इसके लिए वैक्सीन आई है। इसलिए यह अभियान शुरू ही नहीं हो पाया है।
जिले का अधिकतर क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है। इसलिए जलभराव और मच्छर यहां की प्रमुख समस्याएं हैं। जिले की निघासन, पलिया, धौरहरा तथा लखीमपुर तहसीलों का अधिकतर हिस्सा कई महीनों तक जलमग्न रहता है। इन क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष जापानी इंसेफ्लाइटिस जैसी घातक बीमारियां फैलती हैं। पहली बार वर्ष 2002 में इसका प्रकोप जिले में देखने को मिला। वर्ष 2002 में दर्जनोें लोग दिमागी बुखार की चपेट में आए। इसके बाद इसका प्रकोप प्रत्येक वर्ष देखने को मिला। संसाधनविहीन स्वास्थ्य विभाग किसी तरह इससे जूझता रहा। वर्ष 2006 में फिर इस बीमारी का विकराल रूप सामने आया, जब 108 लोग संभावित जापानी बुखार से पीड़ित चिह्नित किए गए । इनकी जांच में 48 लोगों में जापानी इंसेफ्लाइटिस की पुष्टि हुई और 16 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद वर्ष 2011 में फिर 19 लोग इस बीमारी की चपेट में आए। इनमें जांच में छह लोगों में जापानी इंसेफ्लाइटिस की पुष्टि हुई। इसमें भी चार लोगों की मौत हो गई। फिर 2012 में भी तीन लोगों में जेई की पुष्टि हुई, इसमें एक व्यक्ति की मौत हुई। बीते वर्षों में जापानी इंसेफ्लाइटिस से कई लोगों की मौत हुई और तमाम लोग मानसिक रूप से विकलांग हुए। पिछले वर्षों के हालात को देखते हुए शासन ने जापानी इंसेफ्लाइटिस के विशेष अभियान में जिले को चयनित किया। इस योजना के तहत जेई पीड़त गांवों और उसमें रहने वाले बच्चों की सूची, इन गांवों के नक्शे तथा पूरी कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजनी थी। एक दिसंबर से इसका विशेष अभियान चलाया जाना था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में इसको लेकर अब तक कोई चर्चा तक नहीं है। सूत्रों की माने तो स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए कोई कार्ययोजना ही शासन को नहीं भेजी है। वहीं शासन स्तर से भी योजना को गंभीरता से नहीं लिया गया है। पांच दिसंबर बीत गया है जिले में इसका वैक्सीन ही नहीं आया है। इससे जिले में जापानी इंसेफ्लाइटिस जैसी घातक बीमारी का खतरा कम होगा इस बात की संभावना एक बार फिर धूमिल हो गई है।
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वैक्सीन न आने से नहीं शुरू हुआ अभियान: तोमर
जिले में टीकाकरण का कार्य देख रहे एसीएमओ प्रतिरक्षीकरण डॉ. वीएस तोमर ने बताया कि वैक्सीन आ जाती तो कार्ययोजना बनाने में तो एक घंटे का समय लगता। पोलियो कार्यक्रम के जरिये बच्चों की सूची तो उनके पास है। अन्य तैयारियां भी लगभग पूरी हैं लेकिन मुख्य समस्या वैक्सीन के कारण है। वैक्सीन न आने से कार्य रुका हुआ है। वैक्सीन शासन से आनी है, कब तक आएगी इस संबंध में स्पष्ट रूप से कुछ भी कह पाना संभव नहीं है।

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