फर्जी प्रमाणपत्र से बन गया प्रधान

Lakhimpur Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
आरोपी के विरुद्ध नोटिस जारी
एसडीएम की जांच में खुलासा
सिटी रिपोर्टर
लखीमपुर खीरी। पलिया ब्लाक की ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर के उप चुनाव में निर्वाचित प्रधान का जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। पांच मई 2012 को की गई एक शिकायत के आधार पर डीपीआरओ ने मामले की जांच एसडीएम पलिया से कराई तो इसका खुलासा हुआ।
जानकारी के मुताबिक त्रिलोकपुर ग्राम पंचायत में अनुसूचित जनजाति वर्ग का कोई व्यक्ति निवास नहीं करता है। डीपीआरओ योगेंद्र कटियार ने ग्राम प्रधान को नोटिस भेजते हुए एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है। इसके बाद पंचायत राज अधिनियम की धारा 95(1) छ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
पलिया ब्लाक की ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर की प्रधान पद सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में इस सीट पर मजरा लोकनपुरवा निवासी कमलेश कुमार राना निर्वाचित हुए थे। कुछ समय बाद हुई जांच में प्रधान की पोल खुल गई, क्योंकि उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया था। वर्ष 2011 में पुन: हुए उपचुनाव में ग्राम पंचायत के मजरा लोकनपुरवा निवासी प्रवेश कुमार राना अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र लगाकर निर्विरोध प्रधान निर्वाचित हो गए थे। कुछ समय तक प्रवेश कुमार राना भी गांव की प्रधानी करता रहा, लेकिन पांच मई 2012 को कमलेश कुमार राना, जो प्रधान पद से हटाया जा चुका था ने मौजूदा प्रधान के खिलाफ शिकायत करते हुए जाति प्रमाण पत्र फर्जी होने का आरोप लगाया। इस पर कार्रवाई करते हुए डीपीआरओ कटियार ने एसडीएम पलिया से जांच आख्या मांगी थी। एसडीएम पलिया ने डीपीआरओ को भेजी आख्या में बताया है कि लोकनपुरवा निवासी ग्राम प्रधान प्रवेश कुमार राना की जाति ‘बोट’ है, जो अनुसूचित जनजाति या थारू के तहत नहीं आती है। माल अभिलेखागार के रिकार्ड के मुताबिक खतौनी में भी उसके पूर्वजों की जाति ‘बोट’ अंकित है। इन तथ्यों के इतर खास बात यह है कि ‘बोट’ जाति का वर्गीकरण जातियों की सूची में अभी किसी वर्ग में नहीं है। लिहाजा पशोपेश में फंसे अफसरों ने इस जाति को सामान्य वर्ग में मानकर कार्रवाई करने का मन बनाया है।
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चूक पर चूक...आखिर जिम्मेदार कौन
लखीमपुर खीरी। पलिया ब्लाक की दो ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर और निबुआबोझ अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। जबकि इन दोनों ग्राम पंचायतों में इस आरक्षित जाति का कोई व्यक्ति निवास ही नहीं करता है। ऐसे में प्रथम दृष्टया आरक्षण का फैसला ही गलत साबित हो चुका है, जो चुनाव पूर्व सर्वे के आधार पर निर्धारित किया गया था। इसके बाद त्रिलोकपुर ग्राम पंचायत में एक प्रधान पर गाज गिरने के बाद भी अफसर नहीं चेते और दूसरी बार फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे प्रधान निर्वाचित हो गया। जबकि वर्ष 2010 में निर्वाचित प्रधान का जाति प्रमाण पत्र फर्जी मिलने पर तत्कालीन एसडीएम पलिया ने भी इस ग्राम पंचायत में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियाें के निवास न करने की रिपोर्ट दी थी। वहीं निबुआबोझ में तीन सदस्यीय कमेटी को प्रधान पद की शक्तियां प्रदान की गई है, लेकिन इस कमेटी के विरुद्ध भी आरोपों की जांच चल रही है।

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