डेंगू से निपटने को पुख्ता इंतजाम नहीं

Lakhimpur Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। प्रदेश के कई जिलों में डेंगू के रोगी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के माथे पर जहां चिंता की लकीरें हैं, वहीं आम जनता में भी दहशत है। कारण यह है कि इसकी रोकथाम करने में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लाचार है। हालात यह हैं कि जिले में इसकी जांच तक के लिए कोई सुविधा नही है।
जिले में डेंगू ने पहली बार वर्ष 2006 में दस्तक दी थी। इस वर्ष 28 रोगी इसकी चपेट में आए थे। इसके बाद वर्ष 2010 में फिर दो रोगियों में डेंगू की पुष्टि हुई, इसमें एक की मौत हो गई थी। इसके बाद कोई रोगी नहीं मिलने से स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली थी। इस बार भी डेंगू को लेकर पूरे प्रदेश में दहशत है। जिला में दहशत का असर इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकिस्वास्थ्य विभाग पूरी तरह संसाधनविहीन है। पिछले वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए एलाइजा किट व अन्य सामग्री शासन से मांगी थी। शासन ने जांच में उपयोग होने वाली दवाएं तो भेज दीं, लेकिन एलाइजा रीडर नहीं भेजा। तब से कई रिमांडर मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय से भेजे गए लेकिन एलाइजा रीडर नहीं आया लाखों की दवाएं खराब हो रही हैं। इस सबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया जिले में अलर्ट जारी किया गया है। बुखार से पीड़ित जो रोगी जिला अस्पताल या सीएचसी पर आते हैं तो उनकी स्लाइड बनाई जाती है। यदि कोई रोगी संदिग्ध लगता है तो उसके खून का नमूना जांच के लिए लखनऊ भेजा जाता है। हालांकि अब तक किसी में डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है जिले में इलाज की पूरी व्यवस्था है।
00000
एडीज मच्छर से फै लता है डेंगू
डेंगू एडीज नामक मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है। यह सुबह या फिर शाम के समय काटता है दिन में और रात में छिप जाता है। यदि मच्छरों को मारने के लिए छिड़काव कराया जाए तो इसकी संभावना कम हो जाएगी। पूरे शहर में मच्छरों की भरमार है लेकिन मलेरिया विभाग ने अब तक कहीं भी छिड़काव नहीं कराया है।
00000
क्या हैं लक्षण
डेंगू का वायरस शरीर में प्रवेश कर जाने के बाद बुखार आता है। हड्डियां टूटने लगती हैं। आंखों केपीछे दर्द होता है। उल्टियां होती हैं। शरीर में चकत्ते पड़ जाते हैं। पीड़ित व्यक्ति कमजोरी महसूस करता है। यदि समय से अच्छा उपचार न मिले तो रोगी की मौत तक हो जाती है।
0000
क्या है बचाव
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एनएल यादव ने बताया कि इस बीमारी से बचाव की कोई वैक्सीन या टीका नहीं है। बुखार या अन्य परेशानियाें का इलाज किया जाता है। इससे पीड़ित रोगी को केवल पैरासीटामाल दवा देनी चाहिए और जिला अस्पताल तथा पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दिखाना चाहिए।
0000
ये अलर्ट किसके लिए
उचौलिया। सीएमओ ने डेंगू के प्रकोप को लेकर चिकित्साधिकरियों को अलर्ट रहने के निर्देश जारी किए हैं मगर, उचौलिया पीएचसी में महीनों से डाक्टर आ ही नहीं रहे हैं।
दो माह पहले जब पूरे क्षेत्र में बुखार का कहर चल रहा था उस समय भी यहां कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई थी। अब डेंगू पर नियंत्रण पर विशेष निगरानी के निर्देश हैं तब भी यहां की पीएचसी उपेक्षित पड़ी है। डॉक्टर के अलावा यहां अन्य सहायक स्टाफ भी नहीं है जिससे मरीजों को परेशानी का सामना कर पड़ रहा है। गुरुवार को गांव सुरतियापुर निवासी सुरेश बुखार की दवा लेने पीएचसी गया लेकिन उसे वहां कोई नहीं मिला तो निराश होकर लौट आया। जब डॉक्टर ही नहीं तो मरीजों को ही अलर्ट रहना होगा।

Spotlight

Most Read

Lucknow

यूपी कैबिनेट बैठक: प्रदेश के तीन शहरों को मेट्रो ट्रेन का तोहफा, स्लाटर हाउस पर भी प्रस्ताव पास

यूपी कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के तीन शहरों में मेट्रो बनाने का प्रस्ताव पास हो गया है। साथ ही स्‍लाटर हाउस को नगर निगम सीमा से हटाने का भी फैसला लिया गया।

17 जनवरी 2018

Related Videos

यूपी में ‘एनकाउंटर अभियान’ के तहत एक लाख का इनामी ढेर

यूपी एसटीएफ ने एक कार्रवाई के तहत इनामी बदमाश बग्गा सिंह को ढेर किया। जानकारी के मुताबिक एसटीएफ ने कार्रवाई लखीमपुर-खीरी के पास नेपाल बॉर्डर पर की है। बात दें कि बग्गा सिंह कई मामलों में वांछित था और इसके सिर पर एक लाख रुपये का इनाम था।

17 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper