महिला की मौत पर लगाया जाम

Lakhimpur Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
पुलिस प्रताड़ना का आरोप, पति ने दी तहरीर
ओयल (लखीमपुर खीरी)। शराब बनाने के संदेह में तीन दिन पहले मरखापुर गांव से एक गर्भवती महिला को पकड़ कर ले जाने वाली आबकारी विभाग की टीम के साथ मौजूद महिला पुलिस कर्मियों पर उसे जमकर पीटने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि हालत बिगड़ने पर उसके पास से शराब बरामदगी दिखाते हुए उसके पति से दस हजार रुपये सुविधा शुल्क लेकर निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। घर आने के बाद महिला की हालत बिगड़ती गई, जिससे शनिवार को सुबह उसकी मौत हो गई। विरोध में परिवार वालों और ग्रामीणों ने गांव के सामने नेशनल हाइवे पर आधा घंटे जाम लगाया। स्थानीय पुलिस ने न तो घटना की रिपोर्ट ही दर्ज की न ही इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी।
ग्राम मरखापुर निवासी मनोज तिवारी ने बताया कि बीते बुधवार को वह अपने खेत में काम करने गया था। उसी दिन करीब तीन बजे आबकारी विभाग की दो गाड़ियां गांव पहुंची। इन वाहनों में आबकारी विभाग की टीम के साथ दो महिला पुलिस कर्मी व स्थानीय चौकी पर तैनात एक सिपाही भी था। आरोप है कि सभी उसके घर में घुस गए तथा घर का सारा सामान उलट-पलट कर कमरा और बक्से का ताला तोड़ काफी खोजबीन की। आरोप है कि आपत्तिजनक कोई सामान न मिलने पर सभी ने उसकी गर्भवती पत्नी को मारते-पीटते और घसीटते हुए जीप में लाद लिया। आरोप है कि बाद में टीम के सदस्यों ने 10 हजार रुपये सुविधा शुल्क लेकर उसे जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया। घर आने के बाद महिला की हालत खराब होने लगी। जिससे सुबह उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत को लेकर परिवार के लोग व ग्रामीण पहले चौकी पुलिस से कार्रवाई की मांग करने गए। पुलिस ने नहीं सुना तो सभी मृतका के शव को लेकर सड़क पर उतर आए। दुपहर सभी ने नेशनल हाइवे जाम किया तो पुलिस हरकत में आई। थानाध्यक्ष खीरी जनमेजय सचान व चौकी इंचार्ज महेंद्र सिंह मय फोर्स मौके पर पहुंच गए। पहले तो पुलिस वालों ने पीड़ितों को ही डराने की कोशिश की, जब मामला बनता नहीं देखा तो मृतका के पति से तहरीर लेकर कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खुलवा दिया तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी शुरू कर दी।
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न रिपोर्ट दर्ज की, न उच्चाधिकारियों को दी सूचना
ओयल। इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका खासी गैर जिम्मेदाराना रही। यह बात अलग है कि एसओ व चौकी इंचार्ज ने मौके पर पहुंचकर उत्तेजित भीड़ को किसी तरह शांत तो करा दिया, लेकिन ग्रामीणों के प्रदर्शन आदि की उच्चाधिकारियों को जानकारी तक नहीं दी। यही नहीं मृतका के पति से तहरीर तो ले ली, लेकिन देर सायं तक उसकी रिपोर्ट भी नहीं लिखी थी। देर सायं जब एएसपी सौमित्र यादव से बात की गई तो उन्होंने घटना की जानकारी तक न होने की बात कहते हुए स्थानीय पुलिस की इस कारगुजारी पर हैरानगी भी जताई।
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मृतका के पति द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। मामला तीन दिन पुराना है। संगीता की मौत पुलिस प्रताड़ना से नहीं बल्कि इलाज न कराने से हुई है। आबकारी टीम बार-बार छापा न मारे इसलिए भी यह आरोप लगा रहे हैं।
-जनमेजय सचान, एसओ खीरी
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टीम तीन दिन पहले गांव गई थी। संगीता के साथ एक अन्य महिला को भी पकड़ कर लाई थी। संगीता के पास से करीब चार लीटर कच्ची शराब बरामद हुई थी। उसे जमानती मुचलके पर छोड़ा गया था। प्रताड़ना की बात गलत है।
-रामअधरपाल, इंस्पेक्टर आबकारी

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