टांडा के साथियों के करीब पहुंची पुलिस!

Lakhimpur Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
भैयाजी नाम से साथियों में थी टांडा की पहचान
लखीमपुर, सीतापुर, लखनऊ में था सक्रिय
सर्विलांस की मदद से मिले अहम सुराग
लखीमपुर खीरी। मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात सुमित टांडा के पास से मिले मोबाइल फोन के जरिए पुलिस टांडा के साथियों के नजदीक पहुंच चुकी है। टांडा का गिरोह खीरी के अलावा सीतापुर, लखनऊ में भी सक्रिय था। टांडा की टेलीफोन डायरी पुलिस के लिए मददगार साबित हो रही है। पुलिस अफसरों का दावा है कि शीघ्र ही टांडा के साथी हत्थे चढ़ जाएंगे। सीओ सिटी डॉ.अखिलेश नारायण सिंह टांडा के साथियों की गिरफ्तारी के लिए गठित टीमों का स्वयं नेतृत्व कर रहे हैं।
रविवार की रात संकटा देवी चौकी में तैनात सिपाही उमेश कुमार को गोली मारने के बाद भाग रहे कुख्यात सुमित टांडा को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। बताते चलें कि सीतापुर जेल से टांडा की रिहाई 31 दिसंबर 2011 को हुई थी। इसके बाद से टांडा के प्रति पुलिस लापरवाह हो गई थी। जबकि उसका क्रिमिनल रिकार्ड बेहद संगीन था। पूर्वाचंल के कई जिलों में उसके खिलाफ कई मामले दर्ज होने के चलते उसने तराई में पैर जमाना मुनासिब समझा, क्योंकि लखीमपुर, सीतापुर और लखनऊ पुलिस की नजर में टांडा का अपराधिक कद अदना सा था। जानकारी के मुताबिक टांडा अपने साथियों में भैया जी के नाम से जाना जाता था। इसके चलते इन जिलों में होने वाली वारदातों में कभी उसका नाम नहीं आया। टांडा के साथियों की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटे पुलिस अधिकारी भी अब हैरान हैं कि कई माह से सक्रिय होने के बाद उसके नेटवर्क को भेदने में सफल नहीं हो सके थे।
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फायरिंग से सुर्खियों में आया टांडा
नवजीवन नर्सिंग होम में 27 अक्तूबर की रात को फायरिंग के बाद सुमित टांडा का नाम सुर्खियों में आया था। इसके पहले पुलिस को इस नाम की भनक तक नहीं थी। पुलिस ने इसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगाई थीं। इसी क्रम में रविवार को रात में पुलिस मुठभेड़ में एक सिपाही शहीद हुआ, वहीं कुख्यात सुमित टांडा भी मारा गया था।
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कई माह से प्रभारी विहीन है चौकी
सदर कोतवाली की संकटा देवी चौकी के तत्कालीन प्रभारी पवन त्रिवेदी के तबादले के बाद एसआई कल्लूराम भारती को प्रभारी बनाया गया था। लंबे समय से उनके अवकाश पर चलने के कारण कोतवाली में तैनात दरोगा जेपी यादव को चौकी से संबद्ध कर दिया गया था। बताते चलें कि इसके अलावा जिले की दो कोतवालियों के साथ कई चौकियां महीनों से प्रभारी विहीन चल रहीं हैं।
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दोबारा तैनाती के बाद शहीद हुए दो पुलिसकर्मी!
सिकंद्राबाद। नीमगांव थाने का दुर्भाग्य कहा जाए या फिर महज इत्तफाक। इस थाने में तैनात रह चुके दो पुलिसकर्मियों की दोबारा थानों में तैनाती होने के बाद उनको शहादत मिली, लेकिन फर्क इतना है कि सिपाही का हत्यारा पुलिस मुठभेड़ में तो ढेर हो गया पर दरोगा परवेज अली हत्याकांड में लूटा गया सर्विस रिवाल्वर पुलिस आज तक बरामद नहीं कर सकी।
बता दें कि बेहजम चौकी में तैनात रहे दरोगा परवेज अली की उनके आवास पर वर्ष 2006 में हत्या कर दी गई थी। परवेज अली का बेहजम से तबादला चौकी जेबीगंज कर दिया गया था, लेकिन कुछ महीने वहां रहने के बाद वह दोबारा तैनाती पर बेहजम चौकी आए थे। इसके कुछ समय बाद उनके आवास पर रात में सोते समय पेट फाड़कर हत्या कर दी गई थी और हत्यारे उनका सर्विस रिवाल्वर ले गए थे। कई वर्ष बीतने के बाद पुलिस को आज तक सर्विस रिवाल्वर का सुराग नहीं लगा। इसलिए उनकी हत्या के खुलासे को लोग संदिग्ध मानते हैं। यह दुर्भाग्य कहें या इत्तफाक कि बदमाश की गोली से मारे गए सिपाही उमेश कुमार कुछ वर्ष पूर्व नीमगांव थाने के हल्का नंबर एक में तैनात रह चुका था। साथ ही सदर कोतवाली की एलआरपी चौकी पर तैनाती के बाद उसका तबादला गैर जिला कर दिया गया था। सत्ता परिवर्तन के बाद उसने फिर जिले में अगस्त माह में आमद कराई थी। उसकी तैनाती सदर कोतवाली की संकटा देवी चौकी पर कर दी गई थी।

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