धू-धू कर जला बुराई का प्रतीक रावण

Lakhimpur Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। आखिरकार बुराई पर अच्छाई की, असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की जीत हुई। बुराई और अनाचार का प्रतीक रावण श्रीराम के हाथों मारा गया। इससे पहले कुंभकरण और मेधनाद का वध हुआ। रामलीला देखने वाले लोगों की भीड़ जुटी। रावण के पुतले का दहन होते ही सारा वातावरण भगवान राम के जयकारों से गूंज उठा। आतिशबाजी से आसमान रोशनी से भर गया।
शहर के मेला मैदान में चल रही ऐतिहासिक रामलीला में पहले हनुमान ने लंका जाकर मां सीता का पता लगाया। उन्हें राम का संदेश दिया। भूख मिटाने के लिए पूरी अशोक बाटिका उजाड़ डाली। बाद में मेघनाद द्वारा बांध लिए जाने पर उन्होंने सोने की लंका में आग लगा दी। पूरी लंका दहन में केवल विभीषण का घर ही सुरक्षित बचा। हनुमान ने विभीषण से मुलाकात की।
इसके बाद समुद्र पर पुल निर्माण कर श्रीराम की सेना लंका पर चढ़ाई कर देती है। इसके साथ ही शुरू हो जाता है राक्षसी सेना के विनाश का सिलसिला। रावण सेना के सारे योद्धा एक-एक कर मारे जाते हैं। तमाम सेनापतियों के मारे जाने पर रावण कुंभकरण को जगाता है। कुंभकरण जागते ही इतना भोजन करता है कि सभी दंग रह जाते हैं। पेट भरने पर कुभकरण युद्ध के लिए उद्धत होता है।
युद्ध में कुंभकरण मारा जाता है। इसके बाद मेघनाद युद्ध के लिए आता है। मेघनाद द्वारा चलाए गए शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। इससे श्रीराम की सेना में हाहाकार मच जाता है। उनके उपचार के लिए सुषेण बैद्य को बुलाया जाता है। सुषेण बैद्य कहते है कि उनका उपचार संजीवनी बूटी से हो सकता है। वीर हनुमान संजीवनी बूटी लेने के लिए हिमालय की ओर प्रस्थान करते हैं। हिमालय पहुंचकर वह संजीवनी को पहचान न पाने पर हिमालय का पूरा खंड ही उठा लाते हैं। सुषेण वैद्य संजीवनी बूटी से लक्ष्मण का उपचार करते हैं।
इसके बाद मेघनाद और लक्ष्मण के बीच हुए युद्ध में मेघनाद मारा जाता है। सारी सेना और योद्धाओं के मारे जाने पर रावण स्वयं युद्ध के लिए आता है। श्रीराम और रावण के बीच घोर युद्ध होता है, लेकिन राम रावण का जो सिर और बाहु काटते हैं वह फिर उसी तरह आ जाती है। अंत में विभीषण बताते हैं कि रावण की नाभि में संजीवनी है। तब राम उसकी नाभि पर वाण चलाते है जिससे उसकी नाभि का अमृत सूख जाता है और उसकी मौत हो जाती है।
रामलीला मे राम के अगिभनबाण से रावण धू-धू कर जलने लगता है इसी के साथ पूरा वातावरण श्रीराम के जयकारों से गूंज उठता है। आतिशबाजी से पूरा आसमान रोशनी से भर जाता है। रामलीला में रावण वध देखने वालोें की भारी भीड़ जुटी। रावण जलने के बाद लोग उसकी अस्थियां लेने के लिए टूट पड़े।
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खरदूषण सहित रावण की सभा में मची खलबली
पलियाकलां। नगर के मेला मैदान पर चल रही रामलीला में आज भगवान श्रीराम के भ्राता लक्ष्मण जी द्वारा सूपर्णखा की नाक काटने की लीला का मंचन हुआ। सूपर्णखा की नाक कटने की खबर जब खरदूषण और रावण की सभा में पहुंची तो वहां खलबली मच गई। कई बार इधर से उधर गई राक्षसी सूपर्णखा को क्रोध आ गया। इसके बाद वह अपने असली रूप में आ गई और क्रोधित हो सीता को ओर लपकी। इस पर श्रीराम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण ने उसके नाक-कान काट लिए। इसकी खबर जब खरदूषण व रावण के दरबार में पहुंची तो वहां सन्नाटा छा गया। उधर इस दृश्य को देख दर्शक भावविभोर हो भगवान श्रीराम की जय, लक्ष्मण लाल की जय के जयकारे बोलने लगे।

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