डाउनलोडिंग के लिए लेना होगा लाइसेंस

Lakhimpur Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। हाईटेक दौर में मनोरंजन के विविध आयामों का व्यापार तेजी से प्रचलन में आया है। इसमें लगे कारोबारियों पर मनोरंजन कर विभाग ने अपनी दूर-दृष्टि जमा दी है। डीटीएच व उनके उपकरणों की बिक्री में लगे कारोबारियों को लाइसेंस के दायरे में लाने के बाद, अब मोबाइल चिप में डाउनलोडिंग करने वाले कारोबारियों पर शिकंजा कस दिया है। अब डाउनलोडिंग में लगे कारोबारियों को लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना लाइसेंस के चिप व मेमोरी कार्ड में वीडियो क्लिप डाउनलोडिंग करने वाले कारोबारियों के विरुद्ध चलचित्र (विनियमन) एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
पिछले कुछ सालों में मोबाइल ने आम लोगों तक में अपनी पहुंच बनाई। शुरुआत में मोबाइल का प्रयोग टेलीफोन की भांति बातचीत करने में हुआ, लेकिन कुछ समय में ही मोबाइल ’मल्टीमीडिया’ के रूप में परिवर्तित हो गया। मल्टीमीडिया मतलब मनोरंजन का फुल इंतजाम, क्योंकि इस मल्टीमीडिया मोबाइल में वीडिओ के परिवर्तित सूक्ष्म रूप माइक्रो चिप मेमोरी कार्ड ने अपनी जगह बना ली। बाजार में विभिन्न क्षमताओं के हिसाब से मेमोरी कार्ड आसानी से उपलब्ध हैं, जिनमें डीवीडी से कई गुना ज्यादा स्टोरेज क्षमता है। मोबाइल में प्रयोग की जाने वाली माइक्रो मेमोरी कार्ड को मनोरंजन के साधनों में इस्तेमाल किया जा रहा है। चिप में मनोरंजन के विविध आयाम जैसे फिल्म, गाने आदि को डाउनलोड कराने के लिए कंप्यूटर की मदद ली जाती है, जिसके एवज में लोग निश्चित चार्ज अदा करते हैं। लिहाजा शासन ने मोबाइल डाउनलोडिंग के कारोबारियों को लाइसेंस के दायरे में कर दिया है। इस कदम के पीछे की वजहों के बारे में बताते हैं कि वीडियो लाइब्रेरी की संख्या घट रही है, तो सिनेमा व्यवसाय मंदी के दौर से गुजर रहा है। जबकि सस्ते मल्टीमीडिया मोबाइल बाजार में उपलब्ध होने से डानलोडिंग के कारोबारियों की संख्या बढ़ रही है। लिहाजा अपनी साख बचाने की खातिर मनोरंजन कर विभाग ने मोबाइल डाउनलोडिंग में लगे कारोबारियों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है।
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यह हो सकती है कार्रवाई
बिना लाइसेंस डाउनलोडिंग करने पर यूपी सिनेमा रेग्युलाइजेशन एक्ट 1955 की धारा आठ केतहत 10 हजार रुपये का जुर्माना या छह माह कारावास की सजा अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं। वहीं कापीराइट एक्ट 1957 की धारा 51, 52/63 के तहत प्रथम बार पकड़े जाने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना या दो वर्ष की कैद हो सकती है। दोबारा पकड़े जाने पर दो लाख रुपये जुर्माना या तीन साल कैद का प्रावधान है।
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देना होगा शुल्क
जिला मनोरंजन कर अधिकारी दयाशंकर ने बताया कि लाइसेंस शुल्क की धनराशि निर्धारित कर दी गई है। नगर पालिका क्षेत्र में लाइसेंस के लिए तीन हजार और नगर पंचायत व ग्राम पंचायत क्षेत्र के लिए 1500 रुपये लाइसेंस फीस जमा करनी होगी।

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