बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
TRY NOW

विकास के साथ कदमताल में धूमिल पड़ती लोक संस्कृति

Lakhimpur Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
थारुओं का पहनावा, बोलचाल, खेतीबाड़ी का तरीका और रंग-ढंग बदला
विज्ञापन

लखीमपुर खीरी। आजादी के बाद चली विकास की बयार थारू वनवासियों की अनूठी लोक संस्कृति को ही उड़ा ले गई। थारुओं का परंपरागत पहनावा, लोककला, लोक संगीत, लोकनृत्य सब कुछ कम हो गया। गांव-गांव में स्कूल खुले तो थारुओं में शिक्षा का प्रसार हुआ। बाहरी दुनिया से संपर्क बढ़ा। इससे थारुओं का आर्थिक विकास तो हुआ, लेकिन उनकी लोक संस्कृति को काफी नुकसान भी पहुंचा।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों में बसे थारू वनवासियों की बाहरी दुनिया से उनकी अपनी अलग ही दुनिया थी। सतरंगी परिधानों में सजी महिलाएं अपनी कड़ी मेहनत और लगन से दुनिया खुद सजाती थीं। उनके पुष्ट हाथों से लिपी-पुती और खूबसूरत लोक कलाकृतियों से सजी झोपड़ियां देखकर तो बड़े-बड़े महलों में रहने वाले लोग भी यहां रहने को ललचा उठते थे।

थारू अपने को राजपूताने से संबधित बताते हैं। इस समाज की महिलाओं का पहनावा भी काफी हद तक राजस्थानी है।
आजादी के बाद सरकार ने आदिवासी थारू जनजाति के विकास पर विशेष ध्यान दिया। एक-एक कर सभी थारू गांवों में स्कूल खुलते गए। शिक्षा का प्रसार हुआ तो बाहरी दुनिया से संपर्क बढ़ा और उनके पहनावा, बोलचाल, खेतीबाड़ी का तरीका और रंग-ढंग सब कुछ बदल गया। वर्तमान दौर में थारू पढ़ लिखकर अच्छी सरकारी नौकरियां कर रहे हैं।
0000
यह आया थारू समाज में बदलाव
विकास के साथ महिलाओं ने अपने परंपरागत परिधान को छोड़ कर साड़ी और सलवार सूट पहनने शुरू कर दिए। पुरुष भी धोती-फतुही छोड़कर जींस और पैंट-शर्ट पर उतर आए हैं। खूबसूरत झोपड़ी की जगह अब पक्के मकान नजर आ रहे हैं। खेती बाड़ी के तौर तरीकों में भी बदलाव आया है। थारुओं के रहन-सहन में भी बड़ा बदलाव आया है। अब थारू राजनीति में भी सक्रिय होने लगे हैं।
0000
थारू विकास को चल रही योजनाएं
चंदन चौकी, वनकटी में चिकित्सालय स्थापित, चंदन चौकी, नझौटा में पशु चिकित्सालय, लखीमपुर में आश्रम पद्धति विद्यालय, चंदनचौकी में आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय, राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय बेला परसुआ में, सौनहा में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय कक्षा छह से 12 तक, कड़िया डांगा, बेला परसुआ में आयुर्वेदिक अस्पताल, थारू गांवों में रोशनी के लिए सोलर लाइट की व्यवस्था
0000
जल्दी ही शुरू होने वाली और योजनाएं
स्कूलों का उच्चीकरण, थारू ग्रामों में अस्पतालों का निर्माण, चंदनचौकी में राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना, थारू क्षेत्र में स्टेडियम का निर्माण, चंदनचौकी स्थित आईटीआई में ट्रेडों की संख्या 14 से बढ़ा कर 24 करना, सीमा पर सड़कों का निर्माण, बलेरा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय का इंटर कॉलेज में उच्चीकरण करना, चंदनचौकी में महिला चिकित्सालय की स्थापना व एंबुलेंस की व्यवस्था।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us