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निमाई ने पिता से सीखा मूर्ति बनाना

Lakhimpur Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने में मिलता है आत्मसुख
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गोला गोकर्णनाथ। बसलीपुर निवासी निमाई मूर्तियां बनाने में पारंगत हैं। यह कला उन्हें पिता से विरासत में मिली। उनका कहना है कि अपनी बनाई मूर्तियां देखकर उन्हें आत्मसुख मिलता है।
मिल की पुरानी कॉलोनी में शारदीय नवरात्र से शुरू होने जा रही यात्रा के अंतर्गत मां वैष्णों देवी दरबार में उनका उल्लेखनीय योगदान रहेगा। समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता देर रात तक जागकर कार्यक्रम को भव्य रूप देने में जुटे हैं। तहसील क्षेत्र के बसलीपुर बंगाली कॉलोनी निवासी 35 वर्षीय मूर्तिकार निमाई अपने सहयोगियों के साथ मां वैष्णो देवी की मूर्ति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। दरबार में स्थापित की जाने वाली मां की मूर्ति को वस्त्र, आभूषणों से सुसज्जित करने के बाद दरबार की अन्य मूर्तियों को भव्यता देने का काम शुरू कर दिया गया है।

निमाई ने बताया कि उसने बचपन में ही अपने पिता के साथ रहकर इस कला को सीखा है। देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने में उसको आत्मसुख मिलता है। उसने नगर ही नहीं पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर में भी कई बार मूर्तियाें का निर्माण किया है।

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