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बिना काम कराए ही हड़पे 33.80 लाख

Lakhimpur Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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विभागीय जांच में हुआ घोटाले का खुलासा
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बाढ़ से विद्युत परिसंपत्तियों के अनुरक्षण को मिला था धन
लखीमपुर खीरी। बिजली विभाग को दैवीय आपदा मद में मिली धनराशि के हड़पे जाने का मामला प्रकाश में आया है। वित्तीय वर्ष 2011-12 में निघासन क्षेत्र में बाढ़ से हुई विद्युत विभाग की परिसंपत्तियों के नुकसान की मरम्मत और पुर्नस्थापना के लिए विद्युत वितरण खंड प्रथम को 33.80 लाख रुपये की यह धनराशि दी गई थी। इस धनराशि का निर्धारित मद में उपयोग न कर पूरा का पूरा हड़प लिया गया। इस घोटाले का खुलासा एडीएम के निर्देश पर हुई विभागीय जांच में हुआ है।
शासन से मिली इस दैवीय आपदा मद की धनराशि से वित्तीय वर्ष 2011-12 में निघासन क्षेत्र के विद्युत वितरण उप खंड द्वितीय के 33/11 विद्युत उपकेंद्र निघासन से जुड़े ग्राम मंझरा पूरब, महादेव मुड़िया, लुधौरी, बिहारी पुरवा, मण्डप फार्म, बरोठा टावर की 11 केवी लाइन मंडी रोड, रामपुर लाल बोझी, दौलतपुर पलिया रोड मांझा, जुनेजा फार्म, अनूप नगर, सूरत नगर, त्रिपाठी फार्म की लाइन की मरम्मत और अनुरक्षण का कार्य किया जाना था। इस धन को कहां खर्च किया गया इसका उल्लेख भी विभागीय अभिलेखों में नहीं है।

मौजूदा अधिशासी अभियंता राधे श्याम भाष्कर ने एडीएम के निर्देश पर उपखंड अधिकारी पीके सिंह से इन कार्यों का सत्यापन कराया तो सारी कलई खुलकर सामने आ गई। सत्यापन के दौरान पता चला कि निघासन क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2011-12 में किसी भी अवर अभियंता ने दैवीय आपदा मद से न कोई काम कराया न ही इसके लिए विद्युत भंडार गृह से कोई सामग्री ही ली।
इस बारे में जांच के दौरान जब निविदा कोटेशन आमंत्रण व कार्यादेश आदि जारी करने वाले आशु लिपिक राजीव भारती से पूछा गया तो उसने बताया कि दैवीय आपदा मद में काम के लिए टेंडर तो समाचार पत्रों में प्रकाशित कराए गए थे लेकिन किसी निविदादाता ने कुटेशन आदि नहीं डाले। यही नहीं तत्कालीन उपखंड अधिकारी विद्युत वितरण उपखंड द्वितीय अरविंद कुमार ने भी जांच अधिकारी को लिखित रूप से अवगत कराया है कि वित्तीय वर्ष 2011 में क्षतिग्रस्त परिसंपत्त्यिों की मरम्मत व पुर्नस्थापना के लिए आपदा राहत से संबंधित कार्य उनके अधीनस्थ अवर अभियंता एके कुशवाहा व गया सिंह ने नहीं कराया है।
अधिशाषी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम ने एडीएम को भेजी गई अपनी आख्या में कहा है कि दैवीय आपदा मद में मिली 33 लाख 80 हजार की धनराशि का निर्धारित मद में नियमानुसार उपयोग नहीं किया गया। उसको विभागीय अभिलेखों में भी दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जांच आख्या से स्पष्ट है कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम बृज मोहन ने कु छ कार्यालय कर्मियों के सहयोग से धन का हरण कर लिया है। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की संस्तुति भी की है।

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