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परंपरागत फसलों से दूर हो रहे किसान

Lakhimpur Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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जूट और मसालों की फसलें हुईं लुप्त, मेंथा, फल, सब्जियों की ओर रुझान
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लखीमपुर खीरी। जिले में परंपरागत फसलों से किसानों का मोह भंग होता जा रहा है। पहले जिले में बहुतायत से पैदा होने वाली जूट और मसालों की फसलें लुप्त हो चुकी हैं। उनकी जगह गन्ने की फसल ने ले ली है। पिछले दस-पंद्रह वर्षों से यहां केला, आदि फलों के अलावा मेंथा और सब्जियों की खेती शुरू हुई है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो भूमि की उर्वरा शक्ति कायम रखने के लिए फसल चक्र में निरंतर बदलाव जरूरी है।
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जिले के किसान अब नहीं उगाते जूट
खीरी में पैदा होने वाली जूट जिले की पहचान थी। इसकी मांग पूरे देश में थी। जूट विपणन के लिए सहकारी जूट संघ स्थापित किया गया था, जो अब दूसरे व्यवसाय कर रहा है।

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तराई से गायब हुई मसालों की गमक
जिले के निघासन और धौरहरा तहसीलों में हल्दी, मिर्चा, धनिया, मेथी का उत्पादन बड़ी मात्रा में होता था। निघासन में मिर्चा की बड़ी मंडी लगती थी। दूर-दूर तक सूखती मिर्च की लालिमा से बड़े-बड़े मैदान लाल हो जाते थे। यहां के मसालों को खरीदने के लिए बाहरी प्रांतों के व्यापारी पहले से डेरा डाले रहते थे।
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दलहनी फसलों का उत्पादन भी हुआ कम
दलहनी फसलों में मेहनत और समय ज्यादा लगने और उत्पादन अपेक्षाकृत कम होने से किसानों को दलहनी फसलों की ओर से भी मोह भंग हो रहा है। अब यहां अरहर, उरद और मसूर आदि दलहनी फसलों का उत्पादन कम हुआ है। तिलहन के उत्पादन में भी भारी कमी आई है। तिल का उत्पादन तो करीब-करीब खत्म ही हो गया है। सरसों का उत्पादन जिले में जरूर है जो किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।
जिले में एक-एक कर नौ चीनी मिलों की स्थापना से जिले में गन्ने के उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई है। गन्ना किसानों की समृद्धि का माध्यम भी बना।
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किसान कर रहे सब्जियों की खेती
किसानों ने मेंथा, केला, स्ट्राबेरी और सब्जियों की खेती शुरू की है। धौरहरा क्षेत्र के बेंहटा, परसिया, अदलीशपुर, हरदी और रामनगर लहबड़ी और बांकेगंज कस्बे के आसपास किसानों की समृद्धि का साधन बन रही है। इसी तरह लखीमपुर, बेहजम, मितौली और फूलबेहड़ ब्लाकों में मेंथा की खेती में बढ़ोतरी हुई है।
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फसल चक्र में बदलाव से बढ़ती है उर्वरा शक्ति
लगातार खेत में एक ही फसल बोने से भूमि की उर्वरा शक्ति में कमी आती है। फसल चक्र में बदलाव से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इधर गन्ने के साथ दूसरी सहायक फसलें लेना भी फायदेमंद हो सकता।
-धीरेंद्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी

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