क्राइम कंट्रोल करने में पुलिस बेबस

Lakhimpur Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
गांवों में फायरिंग व हमले की वारदातों का ग्राफ बढ़ा
चोरी व लूट की वारदाताें पर नहीं लगा अंकुश
हत्या जैसी जघन्य वारदातों में इजाफा
लखीमपुर खीरी। अपराधों को रोकने में पुलिस को सफलता नहीं मिल रही है। लूट व चोरी की घटनाएं रूटीन में शामिल हो गई हैं। वहीं गांवों में गुटों के बीच मारपीट के मामले बड़े संघर्ष में बदल रहे हैं। धौरहरा में दो गुटों के बीच फायरिंग का मामला हो या फिर मामूली विवाद में हैदराबाद के एक गांव में घर में घुसकर जानलेवा हमला। हाल में ही मैगलगंज थाना के गांव कुकुरगोती में प्रधान के पति की गोली मारकर हत्या करने का मामला। यह साबित करने के लिए काफी हैं कि अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं है।
जिले में अपराधों का ग्राफ बढ़ने के साथ ही हत्या, लूट और वर्ग संघर्ष जैसी वारदातों में इजाफा हुआ है। अपराधों के नियंत्रण का दावा पुलिस करती जरूर है, लेकिन असल सूरत इन्हें झुठला रही है। अपराधियों में पुलिस का खौफ नदारद है, तो पुलिस की चूक से बड़ी घटनाएं भी सामने आई हैं। मैगलगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुकुरगोती की महिला प्रधान ओमवती के पति ओमकार की 28 सितंबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना से कुछ दिन पहले विवाद हुआ था, जो थाने तक पहुंचा था। पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और बेखौफ हुए विपक्षियों ने योजनाबद्ध तरीके से कत्ल की वारदात को अंजाम दे डाला, जिसमें प्रधान के पति का एक साथी भी गंभीर रूप से घायल हुआ था। इसके बाद धौरहरा क्षेत्र के गांव सिसैया में जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्षों में हुए विवाद के बाद प्रधान के पति ने अपने साथियों संग मिलकर रविवार की सुबह खादिम अली के घर पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी, जिसमें एक पक्ष के आठ लोग घायल हुए थे। इस वारदात में गोली लगने से घायल 13 वर्षीय छात्र साकिब की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है, जिसका कोई दोष भी न था। ठीक इसी तरह 11 सितंबर 2012 को हैदराबाद थाना क्षेत्र के गांव मूड़ा भाई में नींव भरने के विवाद में हमलावरों ने एक घर में घुसकर धारदार हथियारों से हमला कर दिया था, जिसमें एक युवक अनिल कुमार की मौत हो गई थी, जबकि तीन महिलाएं भी घायल हुई थीं। यह बानगी भर तीन जानलेवा वारदातें इस ओर भी इशारा कर रहीं हैं कि ऐसे लोगों में कानून का डर कतई नहीं है और पुलिस का खौफ भी नदारद है। तभी तो जघन्य वारदातों को अंजाम देने में जरा भी संकोच नहीं होता है। वहीं पिछले एक माह के दौरान वर्ग संघर्ष की नौबत भी आ चुकी है। हालांकि मामला किसी तरह शांत हो गया। अब सवाल यह है कि सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा या फिर अपराधियों पर नकेल कसेगी।
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खुलासा न होने से बढ़ते हैं अपराध
कई बार घटनाओं का खुलासा न होना भी पुलिस की क्षमता पर सवाल उठाता है, जिससे अपराधी बेखौफ हो जाते हैं। खासकर लूट और चोरी के मामलों का ग्राफ जितना ऊंचा है, लेकिन खुलासे का ग्राफ उतना ही नीचा। बताते चलें कि कई बार पुलिस लूट व चोरी की वारदातों को दर्ज करने से कतराती है, जिससे इन मामलों में उचित कार्रवाई नहीं हो पाती। लिहाजा अपराधी बेनकाब नहीं होते और जुट जाते हैं एक और वारदात को अंजाम देने में।
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विवाद होने पर एसओ करें वैधानिक कार्रवाई: एएसपी
कुछ मामलों में राजनैतिक दखल की वजह से छोटे मामले भी बड़ा रूप धारण कर लेते हैं। पुलिस का प्रथम प्रयास है कि घटनाएं न हों, अगर घटना हुई तो उचित वैधानिक कार्रवाई की जाती है। प्राय: विवाद भी हिंसा का कारण बनते हैं। इसलिए सभी एसओ को निर्देश दिए गए हैं कि विवाद के मामलों में त्वरित वैधानिक कार्रवाई की जाए।
-सौमित्र यादव, अपर पुलिस अधीक्षक

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