बाढ़ राहत में खानापूर्ति का आरोप, प्रदर्शन भी

Lakhimpur Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, सभी को सामग्री मुहैया कराने की मांग
पलियाकलां। बाढ़ राहत सामग्री वितरण में प्रशासन पर महज खानापूर्ति का आरोप लगाते हुए फुलवरिया और मुजहा गांव के अनेक महिलाओं और पुरुषों ने तहसील मुख्यालय पर जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपकर शत-प्रतिशत राहत मुहैया कराए जाने की मांग की।
समाजसेवी व राज्य मानवाधिकार आयोग की पूर्व शक्ति वाहिनी सविता तिवारी के नेतृत्व में एकत्र हुए फुलवरिया और मुजहा गांवों के अनेक पुरुषों और महिलाओं ने तहसील मुख्यालय पहुंचकर क्षेत्र में बाढ़ राहत सामग्री वितरण में महज खानापूर्ति करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी और प्रदर्शन किया। पूर्व शक्तिवाहिनी ने कहा कि 20 सितंबर को आई बाढ़ में मुजहा और फुलवरिया गांव बुरी तरह से प्रभावित हुए थे, लेकिन लेखपाल के अलावा क्षेत्र में कोई भी अधिकारी हाल देखने भी नहीं पहुंचा। इसके साथ ही चंबरबोझ समेत कई गांवों में राहत सामग्री वितरण के नाम पर महज खानापूर्ति की गई। यहां गरीब तबका निवास करता है और उसको दो वक्त की रोटी के लिए जूझना पड़ रहा है। तमाम लोग अब भी खाने की व्यवस्था कर पाने में नाकाम हैं। इसके बाद उपजिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया, जिसमें सभी बाढ़ पीड़ितों को शत प्रतिशत राहत सामाग्री मुहैया कराने की मांग की गई।
इसमें प्रहलाद, रामनिवास, विक्की, प्रसाद, सुरेंद्र, गजोधर, रमनप्रसाद, राजेंद्र, गुरनाम सिंह, रंजीत सिंह, लालवचन, शकुंतला, तुलसी, जगदेवी, मायावती, माया, कमलावती, चंपा, शीला, चमेली, गुडडी आदि शामिल रहे।
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कम नहीं हुई बाढ़ पीड़ितों की दिक्कत
उबरने में लगेगा अभी काफी समय
पलियाकलां। क्षेत्र से बाढ़ का पानी तो काफी कुछ निकल गया किन्तु छोड़ गया अपने पीछे कुछ ऐसी बीमारियां और परेशानियां, जिनसे उबर पाने में क्षेत्रवासियों को काफी समय लगेगा।
नेपाल की पहाड़ियों से गत दिनों बहकर आए अकूत जल से उफनाई इलाके की शारदा, सुहेली, नकौआ और मोहाना नदियों ने चार दिन तक यहां जो तबाही मचाई तो क्षेत्रीय किसानों से लेकर आम आदमी तक ऐसी परेशानियों में पड़ गया जिसका खामियाजा उसे काफी दिनों तक उठाना पड़ेगा और उससे उबरने में महीनों लगेंगे। सबसे अधिक इस बाढ़ के दूषित पानी ने इलाके में बीमारियां परोस दीं। आज क्षेत्र का शायद ही कोई ऐसा गांव बचा हो जहां बच्चे-बूढ़े, महिला-जवान चारपाइयों पर बीमार न पड़े हों। क्योंकि चारों तरफ कई दिनों तक भरे रहे बाढ़ के पानी से घास-फूस, फसलों के डूबने सड़ने के अलावा बड़ी संख्या में कीड़े-मकोड़े, जीव-जन्तु मरे, जो आज चारों तरफ बदबू फैलाकर बीमारियां पैदा कर रहे हैं। यही कारण है कि यहां काफी लोग वायरल, जुकाम, खांसी, पीलिया, फायलेरिया, पेटदर्द, उल्टी-दस्त, डायरिया, फोड़ा-फुंसी आदि बीमारियों से पीड़ित हैं। खासबात यह है कि तराई क्षेत्र वाली पलिया तहसील के अधिकतर ग्रामों में लगे हैंडपंप भी आर्सेनिक जल ही उगल रहे हैं। इससे रोग और भी बढ़ रहे हैं।
उधर क्षेत्र की दर्जनों ग्राम सभाओं में बाढ़ का पानी भर जाने से लोगों के घरों में रखा अनाज, ईंधन, जानवरों का भूसा एवं अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं भीग गईं हैं। गांव-गांव लगीं कंडों की बठिया बाढ़ के पानी के कई दिन तक बहने से भीग कर बह र्गइं। भूसा भीगने से जानवरों के चारे की समस्या पैदा हो गई। नतीजा पशुपालक न चाहते हुए भी गन्ने के अगौला खिलाने को विवश हैं। इसके अलावा घर गृहस्थी की तमाम छोटी वस्तुएं या तो पानी में बह गईं अथवा इधर-उधर हो गईं जिन्हें ढूंढ पाना भी कठिन हो रहा है।
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बाढ़ पीड़ितों को राहत देने में ढिलाई बरतने का आरोप
लखीमपुर खीरी। सांसद जफर अली नकवी ने बाढ़ व कटान पीड़ितों को राहत देने में प्रशासनिक ढिलाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि सहायता के नाम पर बाढ़पीड़ितों को मात्र पूड़ी के पैकेट बांटकर खानापूर्ति की जा रही है। सैकड़ों की संख्या में लोग बेघर होकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
पलिया तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद सांसद जफर अली नकवी ने कहा कि पटिहन, फुलवरिया, शास्त्रीनगर व भीरा आदि गांवों में बाढ़ पीड़ितों की हालत खराब है। उन्होंने जिला प्रशासन पर बाढ़ पीड़ितों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि दैवीय आपदा के नाम पर प्रशासन को भ्रष्टाचार का खेल नहीं खेलना चाहिए।
उनके भ्रमण के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रेम शंकर अग्रवाल, शिवसहांय सिंह, विमलेश सिंह, रमेश चंद्र गर्ग, राजेंद्र अग्रवाल, समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
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गोमती का जलस्तर बढ़ा, फसलें डूबीं
मोहम्मदी। क्षेत्र की गोमती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाने से नदी तट की फसलें डूब गई है।
किसानों ने बताया कि गोमती नदी में बाढ़ आ जाने से लौकी, कद्दू के अलावा गन्ना व धान की फसलें प्रभावित हुई है। नदी के किनारे बने झालों पर पानी पहुंचने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि पानी छोड़ा गया धीरे धीरे जल स्तर घट जाएगा।
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बाढ़ पीड़ितों में राहत, सहायता का वितरण शुरू
निघासन। तहसील प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों को राहत व सहायता देनी शुरू कर दी है। एसडीएम आरपी सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 8800 लीटर मिट्टी तेल मांगा गया था। जिसमें 2400 लीटर मिट्टी तेल का वितरण कर दिया गया है। शेष आने पर वितरित किया जाएगा। इसके अलावा 11 क्विंटल चावल, 17250 लंच पैकेट, दो हजार मोमबत्ती, 50 तिरपाल, तीस गत्ता बिस्कुट, 35 किलो चना, डेढ़ क्विंटल लइया आदि का वितरण किया गया है। जिनके घर गिर गए हैं या फसले डूब कर बर्बाद हो गई हैं उन्हें भी सहायता वितरित की जाएगी। इसके लिए लेखपालों से सर्वे कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा गया है। एसडीएम ने गांव छीटन पुरवा, मंझिली पुरवा, बिहारी पुरवा के प्रत्येक ग्रामीणों को पांच किलो चावल का वितरण भी किया है।

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