बेअसर रही स्वास्थ्य बीमा योजना

Lakhimpur Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
सिर्फ 117 स्मार्ट कार्डधारकों को मिल सका इलाज
3.43 लाख गरीब परिवारों में 90 हजार को मिले स्मार्ट कार्ड
40 फीसदी क्लेम हुए रिजेक्ट, गड़बड़ी के संकेत
लखीमपुर खीरी। बीपीएल परिवारों के इलाज को शुरू की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना महज लॉलीपाप बनकर रह गई है। जरूरतमंदों को कार्ड ही न मिल सके, तो जिन्हें कार्ड मिले उन्हें इलाज नहीं मिला। जिले के 3.43 लाख बीपीएल परिवारों के मुकाबले महज 90,110 परिवारों को ही स्मार्ट कार्ड मुहैया कराए गए, जिसमें केवल 117 स्मार्ट कार्डधारकों को ही इलाज की सुविधा मिल सकी। 22 मार्च 2012 को स्मार्ट कार्ड की वैधता समाप्त होने के बाद से गरीबों का इलाज बंद है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 3.17 लाख तथा नगरीय क्षेत्र में 26 हजार बीपीएल परिवारों को स्मार्ट कार्ड मुहैया कराने का जिम्मा, वर्ष 2011 में ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी को मिला था। जनवरी 2011 से स्मार्ट कार्ड बनाने का काम शुरू होना था, लेकिन 15 फरवरी से शुरू हुआ। इसके बाद कार्यदायी संस्था की धीमी प्रगति पर कार्रवाई करते हुए तत्कालीन नोडल अफसर/जिला विकास अधिकारी ने दुबारा नए सिरे से स्मार्ट कार्ड बनाने के निर्देश दिए। इस दौरान योजना का क्रियान्वयन का जिम्मा स्थानांतरित कर स्वास्थ्य विभाग को दिया गया। कार्यदायी संस्था ओरियंटल इंश्योरेंस ने सितंबर तक 90,110 बीपीएल परिवारों को स्मार्ट कार्ड जारी किए, जबकि 2,52,890 बीपीएल परिवारों को स्मार्ट कार्ड ही नहीं मिल सके, जिससे स्वास्थ्य सेवा के लाभ से कई लोग वंचित रह गए। इसके बाद स्मार्ट कार्ड की वैधता 22 मार्च 2012 को खत्म हो गई, तब तक केवल 117 स्मार्ट कार्डधारकों को लाभ मिल सका। इसके बाद से योजना का क्रियान्वयन बंद है। हालांकि अप्रैल 2012 से नए कार्ड जारी किए जाने थे, जिसका जिम्मा आईसीआईसीआई लोम्बार्ड को मिला है। ताजा हालात यह है कि आधा सत्र बीत चुका है, लेकिन कार्ड जारी करने का काम शुरू नहीं हो सका है।
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इन अस्पतालों में कार्डधारकों का हुआ इलाज
सलूजा नर्सिंग होम ने 30 कार्डधारकों का इलाज किया, जिसके लिए 3,16,000 रुपये का क्लेम, शिवलोक अस्पताल में नौ का इलाज और 1,05,500 रुपये क्लेम, नवजीवन नर्सिंग होम में सात का इलाज और 89,000 रुपये क्लेम, सिटी अस्पताल में तीन का इलाज और 37,500 रुपये क्लेम, गुप्ता अस्पताल में दो का इलाज और 38 हजार क्लेम, गोला आई अस्पताल में पांच का इलाज और 34 हजार क्लेम, वरदान अस्पताल मोहम्मदी में 55 का इलाज और 5.22 लाख रुपये क्लेम, जिला अस्पताल में पांच का इलाज और 33500 रुपये क्लेम, जिला महिला अस्पताल में एक का इलाज और 4500 रुपये क्लेम किया गया। खास बात यह है कि वरदान अस्पताल मोहम्मदी के सबसे ज्यादा 41 क्लेम रिजेक्ट किए गए, जिसमें 3.93 लाख रुपये फंस गए हैं। इसी तरह सलूजा नर्सिंग होम के नौ और शिवलोक, नवजीवन व जिला अस्पताल का एक-एक क्लेम रिजेक्ट हुआ है।
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स्मार्ट कार्ड के लाभ
स्मार्ट कार्डधारक को एक साल में तीस हजार रुपये तक का इलाज चिह्नित अस्पतालों में मुफ्त करने का प्रावधान है। कार्डधारक के अलावा उसके परिवार के तीन सदस्यों को भी इलाज की सुविधा है। इसमें गंभीर रोगों की जांच, इलाज आदि शामिल है। अस्पताल तक आने-जाने का खर्च एक हजार रुपये तक देने का प्रावधान है।
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कार्ड की वैधता समाप्त होने से पहले 117 स्मार्ट कार्डधारकों को इस योजना से लाभान्वित किया जा चुका है। अब नए कार्ड जारी होने पर ही इलाज की सुविधा फिर से मिलेगी।
-डॉ.वीबी राम, नोडल अधिकारी

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