सड़कों पर उतरे वनवासी, जुलूस निकाला

Lakhimpur Updated Thu, 13 Sep 2012 12:00 PM IST
कहा-जंगल, जमीन और जीने की आजादी दी जाए, नारेबाजी भी की
लखीमपुर खीरी। वनाधिकार कानून लागू होने के बावजूद अपने अधिकार न मिलने पर बुधवार को वनवासी सड़कों पर उतर आए। उन्होंने शहर के मुख्य मार्गों पर जुलूस निकालकर अपने अधिकारों कर मांग करते हुए जंगल महकमे व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
राष्ट्रीय वन-जन श्रमजीवी मंच के बैनर तले आयोजित सम्मेलन में आए वनवासियों के सड़कों पर कदमताल से शहर थम सा गया। बिलोवी मेमोरियल हाल में वनवासियों ने अपने अधिकारों को लेकर शहर के मुख्य मार्गों पर जंगल महकमे व सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। इसके बाद जुलूस बिलोवी हाल में एक सम्मेलन तब्दील हो गया।
सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के पूर्व राज्यमंत्री व मंच के संस्थापक अध्यक्ष एडवाइजरी कमेटी संजय गर्ग मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि देश को आजादी मिलने पर हम जश्न में डूब गए लेकिन गरीब और जंगल पर निर्भर लोगों पर जुल्म कम न हुए। 65 सालों के बाद हमें फिर से एक आजादी की लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
मंच के महासचिव अशोक चौधरी ने सरकार की दोहरी नीति पर उंगली उठाई, उन्होंने कहा कि प्रदेश में मौजूदा सरकार इसे लागू कराने में कतई गंभीर नही है, इसका उदाहरण हैं प्रदेश में बनी वनाधिकार निगरानी समिति भंग कर दी गई है, इसके चलते वनवासियों के अधिकारों की लड़ाई पर असर पड़ रहा है।
मंच की संगठन सचिव रोमा ने कहा कि एक ओर सरकार वनाधिकार लागू कर रही है दूसरी ओर भूमि अधिग्रहण की बात कर रही है, ये अब नही चलेगा। सम्मेलन को शांता भट्टाचार्य, गंगा आर्या, लालती, कदमा देवी, जंगबहादुर, रूकमा देवी, अभिजीत, रजनीश, रामचंद्र राणा ने भी संबोधित किया।
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पहली बार जिले पर हुआ सम्मेलन
वनवासियों के लिए ये पहला मौका था जब जिला मुख्यालय पर एक साथ इतनी बड़ी तादात में अपनी मांगों के लिए आवाज बुलंद की। यहां सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर, गोंडा, बहराइच, बुंदेलखंड, चित्रकूट, सहारनपुर, पीलीभीत के वनवासी एवं टांगिया समुदाय के लोग पहुंचे।
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थारू महिलाओं की रैली में जोरदार मौजूदगी
सम्मेलन में जिला मुख्यालय पर पहली बार आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंची। अपने हक के लिए इन वनवासियों ने जोरदार आवाज बुलंद की।
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वनाधिकार जागरूकता सम्मेलन में उठी मांगें
- वनाधिकार कानून को पूरी ईमानदारी से लागू किया जाए।
-जंगल की जमीन और वन संपदा पर वनवासियों को अधिकार मिले।
-जंगल की जड़ी बूटियों पर वनवासियों का नैसर्गिक अधिकार है। इसके संग्रहण से उन्हें न रोका जाए।
-वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों का दर्जा मिले।
-वन विभाग वनवासियों का उत्पीड़न बंद करे और उनके अधिकारों से वंचित न करे।
- राज्य स्तरीय वनाधिकार निगरानी समिति को बहाल किया जाए।

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