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‘ब्लैकबक’ कतर्नियाघाट में बढ़ाएगा कुनबा

Lakhimpur Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
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बरेली से लाए गए दो काले हिरन पार्क में गए छोड़े
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दुधवा के ‘चीकू’ के गायब होने के बाद पार्क में नही थे ब्लैक बक
लखीमुपर/बिजुआ। राजस्थान के विश्नोई समुदाय में पूजनीय माने जाने वाले संकटग्रस्त श्रेणी प्रथम का जीव ब्लैकबक अब दुधवा पार्क क्षेत्र के कतर्नियाघाट में अपना कुनबा बढ़ाएगा। बरेली में तस्करों के चंगुल से छुड़ाए गए इस काले हिरन के जोड़े को अनुकूल वातावरण एवं उसके स्वभाव को देखते हुए वन अफसरों ने इसे यहां छोड़ा है।
नेशनल पार्क क्षेत्र दुधवा में एक ब्लैकबक ‘चीकू’ था, जो कि अपने स्वभाव व शैतानियों से पर्यटकों का दुलारा था, लेकिन अचानक उसके लापता होने के बाद से यहां उसकी कमी खलती थी। अगर, सब ठीकठाक रहा तो कतर्नियाघाट में ब्लैकबक के जोड़े से कुनबे के फलने-फूलने की उम्मीद है, जिससे लोग भारतीय महाद्वीप में पाए जाने वाले इस खूबसूरत जीव से दोस्ती करते नजर आएंगे।
भारत के राजस्थान, गुजरात, पूर्वी भारत के अलावा देश के मैदानी इलाकों और यूपी के आगरा, बदायूं क्षेत्र में पाए जाने वाले काले हिरन की कमी दुधवा में हमेशा से खलती थी। एक साल पहले तक दुधवा में ‘चीकू’ नाम का काला हिरन था, जो कि कहीं लापता हो गया। पार्क अधिकारियों के मुताबिक वह जंगल में चला गया, हालांकि उसके बाद ब्लैकबक किसी को नही देखा। वहीं दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कतर्नियाघाट में 2002 की गणना में दो ब्लैकबक की मौजूदगी दर्ज है, लेकिन एक दशक बाद अब यहां इनकी संख्या नगण्य थी। बरेली में एक सप्ताह पूर्व तस्करी के दौरान ले जाए जा रहे ब्लैकबक के जोड़े को वनप्रभाग बरेली के अफसरों ने पकड़ा था। इनकी संकटग्रस्त श्रेणी को देखते हुए इन्हें कतर्नियाघाट में छोड़ दिया गया। यहां का अनुकूल वातावरण व उनके स्वभाव को देखते हुए इनके कुनबे के फलने फूलने की उम्मीदें ज्यादा हैं।
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पार्क के दबीर हसन के मुताबिक यह जीव एंटी लोप प्रजाति का है। इस प्रजाति में चिंकारा, काला हिरन (ब्लैक बक), नील गाय, तिब्बती कुरंग, चिरू व चौसिंगा आते हैं। इनकी अस्तित्व पर खतरा देखते हुए सरकार ने इन्हें शेड्यूल वन का जीव घोषित किया है। जिसमें हाथी, शेर, बाघ, तेंदुआ आदि आते हैं। राजस्थान में इसे कृष्ण मृग भी कहते हैं। विशभनोई समाज में पूजनीय होने से राजस्थान जैसे इलाके में लोग इनकी रक्षा करते हैं। तीन साल की उम्र में नर के सींग आते हैं, और मादा के सींग नही होतीं। आकार में ऊंचाई 70-80 सेमी व वजन 35-40 किग्रा होता है। ये महज भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाते हैं। यह जीव 10-15 के झुंड में रहते हैं। कैमूर वन्य जीव बिहार में भी पाए जाते हैं।

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