सहकारी समिति कर्मी हड़ताल पर

Lakhimpur Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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समय से वेतन न मिलने पर किया आंदोलन का रुख
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लखीमपुर खीरी। वेतन मिलने में हो रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए सहकारी समिति कर्मचारियों को नियमित वेतन भुगतान के लिए प्रति समिति 25 हजार रुपये प्रति माह आर्थिक सहायता दिए जाने तथा सहकारी समिति में नियुक्त सहकारी पर्यवेक्षकों को तत्काल हटाने की मांग को लेकर जिले भर के सहकारी कर्मचारी बृहस्पतिवार से कलमबंद हड़ताल पर चले गए।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत जिले की सहकारी समिति के कर्मचारी जिलाध्यक्ष विपिन बिहारी वाजपेयी और महामंत्री नसरुद्दीन की अगुवाई में कार्य बहिष्कार कर सुबह नसीरुद्दीन मौजी हाल प्रांगण में एकत्र हुए तथा वहीं अपनी पूर्व मांगों को लेकर कुछ देर धरना प्रदर्शन करने के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। इस मौके पर हुई सभा में जिलाध्यक्ष श्री वाजपेयी ने कहा कि सहकारी समिति कर्मचारियों की मांग पर मुख्यमंत्री द्वारा सहकारी समिति कर्मचारियों को नियमित वेतन भुगतान के लिए 25 हजार रुपये प्रति माह प्रति समिति आर्थिक मदद का वादा किया था, लेकिन अभी तक यह वादा पूरा नहीं हो सका है। इससे समिति कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल पा रहा है और वह भुखमरी के कगार पर पहुंचते जा रहे हैं।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि सहकारी पर्यवेक्षकों को पैक्स समितियों से हटा कर बैंकों में समायोजित करने की मांग भी उनका संगठन करता आया है, ताकि उनका वेतन बचने से समिति कर्मचारियों का वेतन समय से मिल सके, लेकिन दोनों ही मांगों पर शासन, प्रशासन मौन साधे हुए है। जिसकी वजह से आज जिले भर केसहकारी समिति कर्मचारियों को बेमियादी हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने मांगें न माने जाने तक पूर्ण ताला बंदी का भी ऐलान किया। महामंत्री नसरुद्दीन ने कहा कि आंदोलन में भाग लेने वाले कर्मचारियों का नुकसान अगर प्रशासन करने की कोशिश करेगा तो उसे संगठन बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि लड़ाई शासन स्तर तक पहुंच चुकी है। उन्होंने मांगें न माने जाने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया। संघ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश तिवारी व श्रीकांत त्रिपाठी ने भी कर्मचारियों को एकजुट रहने की सलाह दी। संगठन नेताओं ने समिति अधिकारियों से भी लूट खसोट बंद न करने पर इसके गंभीर परिणाम भुगतने का ऐलान किया।
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ये हैं मांगें
समय से वेतन के लिए समिति कर्मचारियों को शासन स्तर से 25 हजार रुपये प्रति समिति/प्रति माह आर्थिक सहायता दी जाय।
-समितियों की आर्थिक स्थिति मजबूती को समितियों में नियुक्त सुपरवाइजर/कामदार को तत्काल समितियों से हटाया जाए तथा समितियों के आंकिकों को प्रभारी बनाया जाए।
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