विज्ञापन

आजादी के उजाले में भुला दिए गए बंशीधर

Lakhimpur Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
अपनी क्रांतिकारी रचनाओं से भरा था सेनानियों में जोश
विज्ञापन
स्वतंत्रता दिवस पर भी सूनी रहती है शुक्ल की समाधि
लखीमपुर खीरी। गुलामी के अंधेरे में अपनी क्रांतिकारी रचनाओं से जनजागरण की मशाल जलाने वाले जनकवि बंशीधर शुक्ल को आजादी के उजाले में भुला दिया गया। ‘उठ जाग मुसाफिर भोर भयो.....और उठो सोने वालों सवेरा हुआ है’ जैसे अमर गीतों के रचनाकार ने अपना पूरा जीवन स्वाधीनता आंदोलन में होम कर दिया। विधायक बनने के बाद भी वह सादगी की मूर्ति बने रहे।
जिले के मन्यौरा गांव में बसंत पंचमी 1904 में जन्मे बंशीधर शुक्ल के सिर से 15 साल की उम्र ही पिता का साया उठ गया। पिता की मौत के बाद उनकी पढ़ाई छूट गई। आठवीं तक ही पढ़ पाए थे कि अभावों ने उन्हें घेर लिया। जीविका के लिए वह पुस्तक व्यवसाय से जुड़ गए। इसी बीच वह कविताएं भी लिखने लगे।
पुस्तक व्यवसाय से जुड़ने के कारण उनका अक्सर कानपुर आना-जाना होता था। इसी दौरान वह गणेश शंकर विद्यार्थी के संपर्क में आए। उन्हीं की प्रेरणा से वह 1921 में राजनीति में सक्रिय हो गए। बंशीधर शुक्ल अपनी रचनाओं के माध्यम से जमकर आग उगलने लगे।
सन 1928 में पंडित बंशीधर शुक्ल गांधी जी के आह्वान पर कांग्रेस में शामिल हो गए। दमदम कांड के बाद बंशीधर शुक्ल ने एक बेहद क्रांतिकारी रचना लिखी। यह लंबी कविता खूनी पर्चा के नाम से मशहूर हुई और बहुत लोकप्रिय हुई। 1928 में पूरे देश में एक साथ एक ही दिन रिलीज की गई। इसी दौरान लखीमपुर में बम बनाने के मामले मेें पकड़धकड़ शु़रू हुई। शुक्ला जी के पास से क्रांतिकारी साहित्य जब्त किया गया और उन्हें छह माह की जेल की सजा हुई। इसके बाद तो उनका एक पैर बाहर तो दूसरा जेल में ही रहता था।
1928 में उनकी लिखी प्रभातफेरी-‘उठो सोने वालों सवेरा हुआ है, वतन के फकीरों का फेरा हुआ है’ और 1929 में लिखी रचना ‘उठ जाग मुसाफिर भोर भयो, अब रैन कहां जो सोवत है’। जनमानस में रचबस गई। चाहे स्वदेशी आंदोलन हो या नमक सत्याग्रह सभी राजनैतिक आंदोलनों में उन्होंने खुलकर हिस्सा लिया। उन्हें क्रांतिकारियों की मदद करने में फांके तक करने पड़े।
पुलिस की नजर उनपर पहले से थी। वह वेश बदलकर ज्योतिषी बन गए और बनारस के दशाश्वमेघ घाट पर प्रवचन करते और क्रांतिकारी साहित्य वितरित करते। सन 1940 में पंडित बंशीधर शुक्ल को तीन साल की सजा हुई। स्वाधीनता आंदोलन के साथ उन्होंने क्रांतिकारी रचनाएं लिखना जारी रखा। अवधी बोली को अपनी रचना का माध्यम बनाया और आगे चलकर अवधी सम्राट के नाम से जाने गए।
आजादी के बाद 1957 में पं. बंशीधर शुक्ल विधायक बने। अपनी विधायकी के दौरान भी वह बेहद सादगी के साथ रहे। उनका विधायक आवास उनके क्षेत्र के लोगों से भरा रहता था। अक्सर पर वह खुद विधायक आवास के लान में दरी बिछाकर सो जाते थे। विधायक रहने के दौरान उन्हें जो वेतन मिलता था उसे भी वह जरूरतमंदाें पर खर्च कर देते थे।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Jammu

J&K: शोपियां से अगवा 3 एसपीओ की आंतकियों ने की हत्या, 1 को किया रिहा

जम्मू कश्मीर के शोपियां से शुक्रवार सुबह 4 पुलिसवालों के अपहरण की खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि जिन पुलिसवालों का अपहरण हुआ है उनमें 3 एसपीओ यानी स्पेशल पुलिस अफसर थे।

21 सितंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

VIDEO: जब किसानों के लिए मंडी पहुंची गुलाब देवी, दिए ये आदेश

लखीमपुर खीरी के दौरे पर आईं राज्य मंत्री गुलाब देवी ने मंडी समिति और जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। मंडी समिति के निरीक्षण के दौरान उन्हें क्रय केन्द्र पर गेहूं खरीद बंद मिली, किसान भी नजर नहीं आए।

17 मई 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree