शारदा से अधिक घाघरा ने मचाई तबाही

Lakhimpur Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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अब तक धौरहरा में 224, निघासन में आठ घर लील चुकी
लखीमपुर खीरी। जिले में इस बार शारदा से कहीं अधिक तबाही घाघरा मचा रही है। बाढ़ कटान से अब तक सर्वाधिक तबाही धौरहरा तहसील में हुई है। हालांकि इस दैवीय आपदा में 300 सौ से अधिक घर नदी में समा चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक आंकड़ों पर ही अगर विश्वास करें तो निघासन और धौरहरा में 232 घर नदी की भेंट चढ़ चुके हैं। दो जाने भी जा चुकी हैं। शनिवार को राहत आयुक्त के दौरे के बाद जिले में बचाव व राहत कार्य और तेज कर दिया गया है।
पिछले एक दशक से जिले में शारदा ही तबाही का मुख्य कारण मानी जाती रही है। यह नदी पलिया, निघासन व लखीमपुर तहसील क्षेत्र में लगभग हर साल तबाही की कोई न कोई इबारत लिखती रही है, लेकिन इस बार शारदा से कहीं अधिक तबाही घाघरा ने मचा कर नया इतिहास रचा है। हर साल सर्वाधिक नुकसान बाढ़ से होता था, लेकिन इस बार अधिक नुकसान कटान से देखने को मिल रहा है। पहले जहां पलिया तहसील शारदा से सर्वाधिक रूप से प्रभावित रहती थी, पर इस बार धौरहरा में घाघरा सर्वाधिक तबाही मचा रही है। प्रशासनिक आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। प्रशासन की माने तो जिले में शनिवार तक कुल 232 लोगों के मकान नदी में समा चुके हैं। इनमें धौरहरा के सर्वाधिक 224 लोग शामिल हैं। जबकि निघासन तहसील के भी भी आठ लोगों के घर नदी में समा चुके हैं। प्रशासन ने जिले में दो लोगों की मौत बाढ़-कटान में होना मानी है, इनमे से एक जनहानि धौरहरा की है जबकि दूसरी पलिया तहसील में दर्ज की गई है।
राहत आयुक्त एल वेंकटेश्वर लू द्वारा शनिवार को ली गई बैठक के बाद जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में बचाव व राहत कार्य तेज कर दिया है। जिलाधिकारी मनीष चौहान ने प्रभावित तहसीलों के तहसीलदार व एसडीएम को मानवता दृष्टिकोण अपनाते हुए पीड़ितों को राहत-सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक जिन 232 ग्रामीणों के मकान नदी में समा चुके हैं, उनमे से कच्चे मकान वाले पीड़ितों को प्रति पीड़ित 15 हजार रुपये तथा पक्के मकान वालों को प्रति व्यक्ति 35 हजार रुपये का गृह अनुदान प्रदान किया गया है। बाढ़-कटान में मृतक हुए दो लोगों को 1.50 लाख रुपये प्रति पीड़ित की दर से सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 3000 लंच पैकेट वितरण का भी दावा किया है।
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चहमलपुर-मूड़ामऊ
मार्ग 100 मीटर कटा
धौरहरा। तहसील क्षेत्र के चहमलपुर-मूड़ामऊ मार्ग पर बसे सात कटान पीड़ितों के घर भी आज शारदा ने लील लिए। यहां 100 मीटर मार्ग भी कट गया है।
क्षेत्र के चहमलपुर गांव की आबादी को पहले ही शारदा अपने आगोश में ले चुकी है। कटान पीड़ित यह परिवार क्षेत्र के चहमलपुर-मूड़ामऊ मार्ग पर झोपड़ी डालकर गुजर-बसर कर रहे थे। नदी ने यहां भी कटान करना शुरू कर दिया। बीते 24 घंटे में नदी ने सड़क किनारे बसे चेतराम, जगतराम, दनकुम, सुखलाल, मुरली, सर्वेश तथा केवल के घर को लीलने के बाद यहां करीब 100 मीटर मार्ग को भी अपने आगोश में ले लिया है। जिसके चलते यह कटान पीड़ित एक बार फिर बेघर हो गए हैं।
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शारदा ने एक बार फिर रुख बदला
निघासन। शारदा नदी ने एक बार फिर अपना रुख बदलकर झौवा पुरवा गांव की ओर किया है। नदी ने करीब पंद्रह दिन पहले झौवा पुरवा गांव से अपना मुंह मोड़ लिया था। करीब दो सौ मीटर की दूरी बना ली थी। गांव वाले नदी के बदले रुख से काफी खुश थे, लेकिन उनकी खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं रही। खमरिया गांव के पास शारदा नदी दक्षिण की ओर है। उसके बाद झौवा पुरवा गांव के पास नदी ने उत्तर दिशा की ओर मुड़ गयी है। झौवा पुरवा गांव के बाहर होते ही नदी ने फिर दक्षिण तथा पूरब दिशा की ओर रुख कर दिया। बैलहा, मंड़प फार्म का वजूद भी संकट में दिख रहा है। मंडप फार्म में कृषि योग्य भूमि निगल रही है।
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दौलतापुर में थमा कटान
पलियाकलां। दौलतापुर में शारदा नदी का कटान थम गया है और वहीं लगदाहन में भी नदी ने कटान की गति काफी धीमी कर दी है। इससे गांव वालों ने काफी राहत महसूस की है।
दौलतापुर में गोंडा मैलानी रेल प्रखंड पर ट्रैक के पास हो रहा कटान अब थम गया है। नदी में पानी काफी कम हो गया है। रेल महकमे का बचाव कार्य काफी धीमा हो गया है। गांव वालों का कहना है कि महकमा पानी का स्तर काफी घट जाते ही काम बंद कर देता है। यानि की फ्लड फाइटिंग पर ज्यादा जोर दिया जाता है और इसका लाभ पानी बढ़ने पर नहीं मिल पाता है। इसी के कारण पानी बढ़कर घटते ही कटान शुरू हो जाता है और स्थिति विषम हो जाती है। गांव वालों का कहना है कि पानी कम होने के बाद काम पुख्ता हो सकता है। इधर लगदाहन में शारदा के कटान की गति काफी धीमी हो गई है। इससे गांव वालों ने राहत महसूस की है लेकिन बचाव कार्य न शुरू किए जाने से उनके माथों पर चिंता की लकीरें अभी भी हैं। गांव वालों का मानना है कि पानी बढ़कर घटते ही फिर से कटान शुरू हो जाएगा और फिर हालात खराब होंगे। प्रशासन को अभी से ही बचाव कार्य शुरू कर देना चाहिए ताकि नदी के कटान से यहां के लोगों को हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके।
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मोहना का कटान भी थमा, थारू ग्रामीणों को राहत
नेपाली नदी मोहना का कटान भी अब थमता नजर आ रहा है। कटान थमने से थारू ग्रामीणों ने राहत महसूस की है। कटान थमने के पीछे नदी का जलस्तर काफी होना कारण माना जा रहा है।
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सांसद नकवी ने निघासन पहुंच सुना बाढ़ पीड़ितों का दुख दर्द
लखीमपुर खीरी। सांसद ज़फर अली नकवी ने निघासन पहुंचकर क्षेत्र के बाढ़-कटान पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका दुख दर्द सुना। इस दौरान उन्होंने प्रशासन पर पीड़ितों की उपेक्षा करने का भी आरोप लगाया।
सांसद नकवी ने निघासन तहसील क्षेत्र के बाढ़-कटान प्रभावित क्षेत्र सिरसी, महादेव, खमरिया, अदलाबाद, बैलहा, झाउपुरवा, महादेव, खमरिया, अदलाबाद आदि गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। इस मौके पर पीड़ितों ने प्रशासन पर उचित मुआवजा व सहायता वितरित न करने की शिकायत की साथ ही सिंर्चाई विभाग द्वारा कराए जा रहे बचाव कार्यों को महज खानापूर्ति बताया। सांसद ने सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे कार्यों में बंदरबाट की बात कहते हुए इसकी जांच कराने की बात कही। सांसद ने कहा कि राहत कार्य के लिए धन की कमी आड़े नहीं आएगी। प्रदेश व केंद्र सरकार से जो भी मदद मिल सकेगी उसे वह लाने का प्रयास करेंगे। इस मौके पर जिलाध्यक्ष प्रेम शंकर अग्रवाल, सैफ अली नकवी, शिव सहाय सिंह, अजय वर्मा, अरुण बाजपेई, पंकज शुक्ला, धनपाल गुप्ता, संजय गोस्वामी, राघवेंद्र सिंह, बरकत अली आदि मौजूद रहे।

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