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रसोई गैस की किल्लत रुक नहीं रही है ब्लैक

Lakhimpur Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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रसोई गैस से सड़कों पर फर्राटा भर रहे वाहन
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एक सिलेंडर मिलने में लग जाते हैं कई-कई दिन
लखीमपुर खीरी। रसोई गैस की किल्लत से यहां के उपभोक्ता आजिज आ चुके हैं। होम डिलीवरी की व्यवस्था तो पूरी तरह फेल हो चुकी है। बुक कराने के बाद घर तक गैस पहुंचने में बीस से पच्चीस दिन तक लग जाते हैं। जिनके पास केवल एक सिलेंडर है उन्हें तो सिलेंडर खत्म होने के बाद 10 से पंद्रह दिन तक स्टोव या चूल्हे का ही सहारा लेना पड़ता है।
जिले में कुल 15 गैस एजेंसियां और 60934 गैस कनेक्शन हैं। इनमें लखीमपुर शहर में चार गैस एजेंसियां और करीब 26585 गैस कनेक्शन हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो पूरे साल रसोई गैस की किल्लत रहती ही है। शहर में भी गैस पाने में उपभोक्ताओं को काफी परेशानी होती है। रसोई गैस की कालाबाजारी गैस किल्लत का सबसे बड़ा कारण है। रसोई गैस का इस्तेमाल व्यावसायिक कार्यों में होने के कारण आम उपभोक्ताओं को गैस मिलने में दिक्कत होती है।
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रसोई गैस से फर्राटा भरते हैं वाहन
जिले में सैकड़ों की संख्या में वाहन रसोई गैस से सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आते हैं। होटलोें और चाय की दुकानों पर भी घरेलू गैस का ही इस्तेमाल हो रहा है। इनके अलावा शादी विवाह व अन्य समारोहों में भी घरेलू गैस का ही इस्तेमाल हो रहा है। मजे की बात यह है कि आम उपभोक्ताओें को तो गैस मिलने में दिक्कत होती है जबकि व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले लोग आसानी से गैस हासिल कर लेते हैं।
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व्यावसायिक सिलेंडरों का कोई पुरसाहाल नहीं
व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए अलग से 19 किलोग्राम के सिलेंडर आते हैं लेकिन उनका मूल्य करीब 1800 रुपये है। व्यावसायिक गैस महंगी होने के कारण अधिकतर लोग घरेलू इस्तेमाल वाली गैस ही इस्तेमाल करना चाहते हैं। यही से शुरू होती है घरेलू गैस की किल्लत। कुछ गैस एजेंसी मालिक प्रति सिलेंडर दो से तीन सौ रुपये अधिक लेकर घरेलू गैस सिलेंडर व्यावसायिक कार्यों के लिए बेच देते हैं।
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देहात में गैस के लिए काटने पड़ते हैं कई दिन चक्कर
ग्रामीण क्षेत्रों में तो गैस ले पाना बेहद टेढ़ी खीर है। यहां तो कई-कई दिन चक्कर लगाने और दिन-दिन भर लाइन लगाने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में सप्ताह में एक दिन गैस वितरण का दिन निर्धारित है। निर्धारित तिथि पर लोग अपने खाली सिलेंडर लेकर सुबह से कतार में खड़े हो जाते हैं। शाम होने पर पता चलता है कि गैस अगले दिन मिलेगी। अगले दिन फिर उन्हें लाइन लगानी पड़ती है।
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गैस के लिए आए दिन होती है मारामारी
गैस आने पर आम उपभोक्ताओं से पहले ब्लैक करने वाले गैस हासिल कर लेते हैं इससे आए दिन हंगामे और मारामारी की नौबत आती है। कई बार तो रसोई गैस वितरण में पुलिस तक को हस्तक्षेप करना पड़ता है। कनेक्शन के अनुसार गैस की आपूर्ति होती है लेकिन ब्लैक हो जाने के कारण ही आम उपभोक्ता गैस पाने से वंचित रह जाते हैं। पलिया में हाल ही में कई बार गैस वितरण को लेकर हंगामा हो चुका है।
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नीमगांव में 15 दिन से नहीं बंटी गैस
सिकंद्राबाद। क्षेत्र के नीमगांव कस्बे में गैस न मिलने से उपभोक्ताओं को दिक्कत आ रही है। कस्बे में 15 दिनों से लगी लाइन और लंबी होती जा रही है। लोग अपने खाली सिलेंडर रात मेें लाइन में रखकर छोड़ जाते हैं। सुबह आकर खुद लाइन में लग जाते हैं। इस तरह करीब 15 दिन से नीमगांव में गैस के लिए मारामारी मची हुई है।
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गैस की किल्लत नहीं, कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा
जिले में गैस की खास कि ल्लत नहीं है। हमें ऐसी कोई शिकायत भी नहीं मिली है। अगर कहीं से घरेलू गैस की कालाबाजारी की कोई शिकायत मिलती है तो कार्रवाई होगी। खीरी में भी एक गैस एजेंसी स्थापित होने जा रही है। इसके बाद किल्लत कम होगी।
-ध्रुवराज यादव, जिला पूर्ति अधिकारी, लखीमपुर खीरी।

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