घाघरा निगल गई डेढ़ दर्जन आशियाने

Lakhimpur Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
सैकड़ों एकड़ लहलहाती फसल समेत भूमि नदी में समाई
तिनका-तिनका जोड़ बनाए घरौंदे को पर चल रहे हथौड़े
लखीमपुर खीरी। शारदा और घाघरा नदियों का जलस्तर घटने के साथ ही भू कटान और तेज हो गया है। धौरहरा क्षेत्र के भदई पुरवा गांव में पिछले 24 घंटे के अंदर 13 और घर घाघरा में समा गए। अब तक यहां कुल 68 घर कट चुके हैं। जबकि भदईपुरवा में रातभर में चार घर नदी में समा गए। निघासन क्षेत्र में बाढ़ का प्रकोप कम हुआ है जबकि कटान और अधिक तेज हो गया है।
जलस्तर घटने के बावजूद घाघरा और शारदा नदियों की विनाशलीला जारी है। पिछले 15 दिनों के अंदर तिनका-तिनका जोड़ कर बनाए गए ग्रामीणों के सैकड़ों घरौंदो को यह नदियां अपना निवाला बना चुकी हैं। इससे सैकड़ों परिवार बेघर होकर ऊंचे स्थानों या सड़क किनारे शरण लेने को मजबूर हैं। कटान पीड़ित सड़कों के किनारे त्रिपाल या बरसाती तानकर अपने परिवार सहित गुजारा करने को मजबूर हैं।
कुछ गांवों में जिला प्रशासन ने कटान पीड़ितों को मामूली सहायता प्रदान की है। लेकिन यह सहायता ऊंट के मुंह में जीरा की तरह ही है। भदईपुरवा गांव में तो कटान पीड़ितों ने यह सहायता लेने से ही इनकार कर दिया। कटान प्रभावित गांवों का यह आलम है कि ग्रामीण कटान के डर से खुद अपने आशियानों पर हथौड़ा चलाकर तोड़ रहे हैं। घर गृहस्थी का सामान और घर का मलबा सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं।
धौरहरा। तहसील क्षेत्र के ग्राम मोटेबाबा में घाघरा नदी का कटान और तेज हो गया है। यहां पिछले 24 घंटों के अंदर 13 और घर घाघरा में समा गए। इस तरह यहां अब तक 68 घरों को घाघरा निगल चुकी है। नदी की विनाश लीला अभी थमी नहीं है। वह एक-एक कर घरों को निगलती जा रही है। कटान तेज होने से यहां के ग्रामीणों का दिन का चैन और रात की नींद उड़ चुकी है।
बुधवार रात घाघरा ने गांव के लालजी, गंगादीन, उमराव, कमला, छोटाला, बैजनाथ, अनंतराम, काशीनगर, बहादुर, राजेश, शिवकुमारी, गोविंद, सोहन समेत 13 लोगों के घर नदी में समा गए। नदी को आगे बढ़ते देख लोग अपने मकान खुद उजाड़कर पलायन करने को मजबूर हैं। अब तक ने तो यहां कोई जिलास्तरीय अधिकारी पहुंचा है और न ही किसी समाजसेवी ने कटानपीड़ितों का दर्द जानने की कोशिश की है। इसी तरह भदई पुरवा गांव में रात भर के अंदर चार घर घाघरा में समा गए।
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सूरत नगर का वजूद मिटने के कगार पर
तिकुनियां। बार्डर की मोहाना नदी के कटान से ग्राम सूरतनगर का नामोनिशान मिटने के कगार पर पहुंच गया है। गांव में हायतौबा मची है। यहां देखते ही देखते सैकड़ों एकड़ भूमि मोहाना नदी ने निगल लिया है। मोहाना नदी से ग्राम सूरतनगर की दूरी नदी से महज बीस मीटर रह गई है। इससे ग्रामीण सहमे हुए है। एसडीएम ने बताया कि मोहाना नदी के कटान का जायजा लेने के लिए कानूनगो अवधेश कुमार को भेजा है। 0000000
कटान पीड़ितों ने प्रशासन की सहायता ठुकराई
ईसानगर। भदईपुरवा गांव में कटान पीड़ितों को जिला प्रशासन की ओर से लेखपाल सहायता राशि बांटने पहुंचा था। नदी की कटान में सब कुछ गवां चुके ग्रामीणों को मात्र ढाई-ढाई हजार रुपये के चेक दिए जा रहे थे। इसे देख ग्रामीणों ने अपने गुस्से का इजहार करते हुए सहायता राशि वापस कर दी। बाद में तहसीलदार खुद सहायता बांटने पहुंचे लेकिन ग्रामीणों ने सहायता राशि लेने से साफ मना कर दिया।

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