चार दहेज हत्यारोपियों को उम्रकैद, जुर्माना भी

Lakhimpur Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
दूर का रिश्तेदार बरी, चारों आरोपियों पर सात-सात हजार का जुर्माना भी डाला
लखीमपुर खीरी। अतिरिक्त दहेज की मांग के चलते नव विवाहिता को मौत के घाट उतारने के मामले में विशेष एडीजे कुंवर अल्लाह रक्खे खां ने पति, जेठ, जेठानी और सास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने चारों को सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश भी दिया है, जबकि दूर के रिश्तेदार को साक्ष्य के अभाव के चलते बरी किया गया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी प्रमोद सिंह ने बताया कि ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम भिडौरा निवासी झब्बूलाल उर्फ चंद्रभाल ने लड़की पुष्पा देवी की शादी ग्राम रुद्रपुर निवासी लाला उर्फ उमेश कुमार के साथ 22 जनवरी 2004 को की थी। आरोप है कुछ दिन बाद ही पति उमेश सहित ससुराल वाले अतिरिक्त दहेज में मोबाइक, रंगीन टीवी, फ्रिज मांगने लगे। इसी मांग के चलते नवविवाहिता को तकलीफ दी जाने लगी। उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया गया। इसी बीच पांच अप्रैल 2006 को मनोहर के साथ ससुराल वाले आए और पुष्पा को विदा करा ले गए। आरोप है कि अगले ही दिन छह अप्रैल 2006 की शाम साढे़ आठ बजे पति उमेश कुमार, जेठ दाताराम, जेठानी सुशीला, सास मैना और दाताराम के ससुर टीकाराम ने अतिरिक्त दहेज की मांग पूरी न होने पर पुष्पा को लाठी डंडो से पीट-पीटकर मार डाला। अभियोजन के समर्थन में शासकीय अधिवक्ता पीके सिंह, लक्ष्मीकांत अवस्थी और रमेश प्रसाद गुप्ता ने पैरवी करते हुए झब्बूलाल, मालवती, सुरेंद्र प्रताप व सीओ प्रवीण रंजन सिंह की गवाही कोर्ट में दर्ज कराई और बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालत ने सुनवाई के बाद पति उमेश, जेठ दाताराम, जेठानी सुशीला और सास मैनावती को दोषी पाया। चारों को उम्रकैद और सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई गई है। साथ ही अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि टीकाराम जेठ दाताराम का ससुर नहीं है बल्कि ससुर का भाई है जिसके खिलाफ कोई खास सबूत नहीं है, लिहाजा कोर्ट ने उसे बरी करने का हुक्म सुनाया।
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कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई थी रिपोर्ट
इस मामले में स्थानीय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो पीड़ित ने उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाया। इस बीच झब्बूलाल की ओर से कोर्ट में पैरवी करते हुए अधिवक्ता गणेश श्ंाकर मिश्र ने रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश पारित कराया। तब स्थानीय पुलिस ने 16 मई 2006 को आईजी जोन को संबोधित पुराने प्रार्थना पत्र पर रिपोर्ट दर्ज कर ली।
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नहीं चली बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष की ओर से पुष्पा की मौत को बीमारी से होना बताते हुए पीएचसी के डॉक्टर रहे अवधेश गुप्ता की गवाही दर्ज कराई। साथ ही गांव के अवधराम को पेश किया तो उसने बताया कि 40 हजार रुपये लेकर झब्बूलाल ने दहेज में दिया गया सारा सामान वापस ससुरालवालों से ले लिया था। जब सफाई में पेश हुए गवाहों से शासकीय अधिवक्ता पीके सिंह ने जिरह की तो असलियत छिप न सकी।
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अस्थियां लेकर खूब टहला था झब्बूलाल
इस मामले में आठ साल बाद भले ही फैैसला आया लेकिन झब्बूलाल को इंसाफ मिल ही गया, कचहरी के लोग बताते है कि तत्कालीन सत्तारूढ़ दल के नेताओं के चलते उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई न ही पोस्टमार्टम कराया गया था, इसी वजह से झब्बूलाल मृत पुत्री की अस्थियां मटकी में लेकर उच्चाधिकारियों के सामने कई बार पेश हुआ था।

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