अब कुंओं के सहारे आर्सेनिक से लड़ने की तैयारी

Lakhimpur Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
नदी किनारे बसे गांवों में ज्यादा है आर्सेनिक
कुंओं के पानी को परखा तो नहीं मिला आर्सेनिक
लखीमपुर खीरी। आर्सेनिक की अधिकता से तराई के कई इलाकों का पानी जहरीला हो गया है। आर्सेनिक युक्त पानी पीकर लोग घातक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हालांकि आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में हैंडपंपों की रीबोरिंग का काम चल रहा है लेकिन इसमें भी महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है। हाल ही में एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि कु एं के पानी में आर्सेनिक नही मिला। इसकी तस्दीक होने के बाद अब जिले में भी कुंओं को बचाने की मुहिम शुरू हो गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक जिस जगह पानी में आयरन की मात्रा ज्यादा होती है वहां उतनी ही आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा होने की संभावना होती है। अगर 10पीपीपी के ऊपर आर्सेनिक पाया जाय तो पानी जहरीला हो जाता है। यह पानी अगर तीन साल तक लगातार इस्तेमाल किया जाए तो कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। आर्सेनिक से एरसिनोसियोसिस और मिलैनोसिस बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जब यह बीमारी आगे बढ़ती है तो स्किन कैंसर का रूप ले लेती है।
रिसर्च में पाया गया कि नदी के किनारे जो गांव बसे हैं उनमें सबसे ज्यादा आर्सेनिक की मात्रा पाई जाती है। आर्सेनिक की मात्रा 100 से 200 फिट की गहराई के पानी में ज्यादा मिलता है। जिन हैंडपंपों की बोरिंग 100 से 150 फिट गहरी है उनमें आर्सेनिक अधिक मात्रा में मिल रहा है। इसी वजह से जल निगम अब आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में 250 से 300 फिट गहरी बोरिंग करा रहा है। जो पुराने नल कम गहरी बोरिंग के लगे हैं उनको अधिक गहरा रीबोर कराया जा रहा है।

इंसेट.....
जिले में पांच ब्लाक आर्सेनिक प्रभावित
जलनिगम के मुताबिक खीरी जिले के पांच ब्लाक पलिया, निघासन, रमियाबेंहड़, ईसानगर और धौरहरा आर्सेनिक से बुरी तरह प्रभावित हैं। इन ब्लाकों में 150 से 200 फिट गहराई के बोरिंग वाले सरकारी हैंडपंप में बड़ी मात्रा में आर्सेनिक की मात्रा मिल रही है। जबकि निजी हैंडपंपों में आर्सेनिक न के बराबर मिला है।

इंसेट.....
कुओं के पानी में नहीं हैं आर्सेनिक
प्रोजेक्ट संखिया नामक एक संस्था ने कुओं के पानी का परीक्षण कराया तो पाया गया कि कुएं के पानी में आर्सेनिक नहीं था। इससे प्रेरित होकर संस्था ने बलिया जिले में एक सौ पैंतीस से अधिक पुराने कुओं को साफ कराकर उन्हें प्रयोग के लायक बनाया है इससे काफी हद तक आसेर्निक से निजात मिली है। इन कुओं पर टीनशेड डालकर छाया की व्यवस्था की गई है।

इंसेट......
वैशाली ने शुरू की कुएं बचाने की मुहिम
28एलकेएचपी 10
बलिया में कुआें के जरिए आर्सेनिक से बचाव की कोशिश से प्रेरित होकर केवी सेवा संस्थान की सचिव व प्रमुख समाजसेवी वैशाली अली ने कुं आं बचाने की मुहिम शुरू की है। उन्होंने आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों के ग्राम प्रधानों को पत्र लिखकर आर्सेनिक के खतरों से आगाह करते हुए अपने गांवों के कुंओं का पुनरुद्धार कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कुंआ हमारी प्राचीन संस्कृति के प्रतीक हैं। यह जल संरक्षण के बेहतर स्त्रोत हैं। इनकी सफाई कर हम आर्सेनिक जैसे जहर से अपने को बचा सकते हैं।

इंसेट......
100से 150 फिट गहराई में अधिक आर्सेनिक
जिले के पांच ब्लाकों के पानी में बड़ी मात्रा में आर्सेनिक मिला है। आर्सेनिक 100 से 150 की गहराई में अधिक मिल रहा है। इसीलिए अब इन ब्लाक क्षेत्रों में इंडिया मार्का हैंड पंप की 250 से 350 फिट गहरी बोरिंग कराई जा रही है। आर्सेनिक से बचाव के लिए कु एं एक अच्छा माध्यम बन सकते हैं।
एसबी आनंद, अधिशाषी अभियंता जलनिगम, लखीमपुर खीरी

Spotlight

Most Read

Chandigarh

हरियाणाः यमुनानगर में 12वीं के छात्र ने लेडी प्रिंसिपल को मारी तीन गोलियां, मौत

हरियाणा के यमुनानगर में आज स्कूल में घुसकर प्रिंसिपल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मामले में 12वीं के एक छात्र को गिरफ्तार किया गया है।

20 जनवरी 2018

Related Videos

यूपी में ‘एनकाउंटर अभियान’ के तहत एक लाख का इनामी ढेर

यूपी एसटीएफ ने एक कार्रवाई के तहत इनामी बदमाश बग्गा सिंह को ढेर किया। जानकारी के मुताबिक एसटीएफ ने कार्रवाई लखीमपुर-खीरी के पास नेपाल बॉर्डर पर की है। बात दें कि बग्गा सिंह कई मामलों में वांछित था और इसके सिर पर एक लाख रुपये का इनाम था।

18 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper