बाजार में नहीं मिल रहीं पुस्तकें, कैसे पढ़ें बच्चे

Lakhimpur Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। नए शिक्षण सत्र के बारह दिन बीत गए हैं, लेकिन अब तक बाजार में क क्षा छह से इंटर तक की किताबें नहीं आई हैं। किताबें न मिलने से बच्चों की पढ़ाई पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। बच्चे और उनके अभिभावक किताबों की दुकानों पर जाते हैं और वापस चले आते हैं। विद्यालयों में कक्षाओं का विधिवत संचालन नहीं हो पा रहा है।
नया शिक्षण सत्र दो जुलाई से शुरू हुआ है। विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल बनाने के लिए जो शैक्षिक पंचांग भेजा गया है उसके अनुसार कक्षा छह और नौ केप्रवेश आठ जुलाई तक हो जाने चाहिए थे। इनमें शिक्षण कार्य भी तत्काल शुरू कर दिया जाना था। इसके अलावा कक्षा 7,8,9 और कक्षा 12 का शिक्षण कार्य तत्काल शुरू कर देना चाहिए था। सरकार ने दावा किया था कि शिक्षण सत्र शुरू होने के एक सप्ताह के अंदर बाजार में किताबें आ जाएंगी, लेकिन स्थिति यह है कि विद्यालयों में सब कुछ तो हो रहा है लेकिन जो सबसे महत्वपूर्ण है वही शिक्षण कार्य नहीं हो पा रहा है। कारण यह है कि जहां कक्षा 6,7 और 8 की सरकारी किताबें अब तक सहायता प्राप्त स्कूलों में नहीं पहुंची हैं, वहीं बाजार में भी किताबें नहीं हैं। हालत यह है, कि प्राइवेट किताबों को चलाना प्रतिबंधित है और माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित अब तक कक्षा ग्यारह और बारह की एक भी किताब बाजार में नहीं आई है। कक्षा नौ व दस की भी एक दो छोड़ कोई किताब बाजार में नहीं हैं। इस संबंध में गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य नरायण सिंह चौहान बताते हैं कि विद्यालय में कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया गया है। शिक्षक वही विषय वर्षों से पढ़ाते चले आ रहे हैं, इसलिए उन्हेें कोई दिक्कत नहीं होती है। बच्चों को कुछ दिक्कत तो होती ही है, लेकिन शिक्षण कार्य रोका भी नहीं जा सकता है।
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क्या कहते हैं बुक सेलर्स
पुस्तक विक्रेता मनीष गुप्ता बताते हैं, कि बेसिक शिक्षा से लेकर माध्यमिक तक की एक भी किताब प्रकाशकों से नहीं मिल पा रही है। अभिभावक आते हैं और वापस चले जाते है। ऐसी स्थिति इसलिए है क्योंकि सरकार गंभीर नहीं है। प्रकाशकों को शीघ्र बाजार में किताबों की सप्लाई करनी चाहिए।
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पढ़ाई पर असर तो पड़ेगा ही
कक्षा ग्यारह की पाठ्य सामग्री में कुछ बदलाव हुआ है, लेकिन अब तक उनके पास विभाग से इस तरह के कोई दिशा निर्देश नहीं आए हैं। अब तक उनके पास किताबाें और उनके प्रकाशकों की सूची भी नहीं आई है। शिक्षण सत्र शुरू करा दिया गया है। ऐसी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई पर असर तो पड़ेगा ही। वे इस संबंध में अपर सचिव माध्यमिक शिक्षा से बात करेंगे और स्थिति से अवगत कराएंगे।
-दीपचंद, जिला विद्यालय निरीक्षक, खीरी

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