कांग्रेस जिले में चारों खाने चित्त, भाजपा की बल्ले-बल्ले

Lakhimpur Updated Sun, 08 Jul 2012 12:00 PM IST
सपा विधायकों ने जहां लगाया जोर वहां बुरी तरह हारे समर्थित प्रत्याशी
बसपा का भी बुरा हाल, मुख्य मुकाबले तक में नहीं आए अधिकांश समर्थित प्रत्याशी
लखीमपुर खीरी। प्रदेश में सत्तारूढ़ सपा तथा दूसरे नंबर की पार्टी बसपा को अप्रत्यक्ष रूप से जिले में करारा झटका लगा है। सिंबल पर चुनाव लड़ाने के बावजूद कांग्रेस भी जिले में अपना खाता नहीं खोल सकी। कांग्रेस का यह हाल यहां तब है जब जिले की दोनों लोकसभा सीट पर उसी का कब्जा है तथा कांग्रेस के दिग्गजों में गिने जाने वाले जितिन प्रसाद व जफर अली नकवी न सिर्फ सांसद हैं बल्कि दोनों नेताओं ने पार्टी प्रत्याशियों के लिए वोट तक मांगे हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से यहां सबसे अधिक फायदा भाजपा को मिला है।
बात सबसे पहले कांग्रेस की करते हैं। पार्टी ने जिले की चार नगर पालिका परिषद, छह नगर पंचायतों में से तीन नगर पालिका परिषदों तथा तीन नगर पंचायतों में सिंबल पर प्रत्याशी उतारे थे। गोला नगर पालिका परिषद में पार्टी ने मीनाक्षी अग्रवाल तथा खीरी नगर पंचायत में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अलाउद्दीन अंसारी को अपना समर्थन दिया था। बरवर तथा ओयल में पार्टी ने सिंबल पर उम्मीदवार नहीं उतारा था। पार्टी सिंबल पर उतारे गए सभी कांग्रेसी चुनाव जीतना तो दूर संतोष जनकर प्रदर्शन भी नहीं कर सके।
सपा व बसपा ने इस बार भले ही पार्टी सिंबल पर अपने कोई उम्मीदवार नहीं उतारे हों, लेकिन दोनों ही पार्टियों ने पर्दे के पीछे से अधिकांश स्थानों पर किसी न किसी उम्मीदवार का समर्थन जरूर किया। बावजूद इसके अधिकांश स्थानों पर मतदाताओं ने कथित सपा व बसपा समर्पित उम्मीदवारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। यही नहीं लखीमपुर नगर पालिका परिषद में दिव्या सिंह, गोला में लोकेश गुप्ता, पलिया में आरिफ के समर्थन में तो मौजूदा पार्टी विधायकों व पूर्व विधायकों तक ने जोर लगाया, लेकिन इसके बाद भी वह अपने इन समर्थित उम्मीदवारों को मुख्य मुकाबले तक में नहीं ला सके।
बसपा का प्रदर्शन भी खासा निराशा जनक रहा। पार्टी ने लखीमपुर में निर्वतमान चेयरमैन ज्ञान प्रकाश बाजपेई, पलिया में पूर्व चेयरमैन महमूद हुसैन, सिंगाही में पूर्व चेयरमैन की भाभी अफरोज जहां पर दांव लगाया। इसके अलावा मोहम्मदी में अनीता शुक्ला, बरवर में नरवीर कुशवाहा तथा खीरी में राकेश का समर्थन किया, लेकिन सिंगाही को छोड़ शेष अन्य स्थानों पर उनके समर्थित प्रत्याशी मुख्य मुकाबले तक में नहीं आ सके। गोला, ओयल तथा मैलानी में पार्टी ने किसी उम्मीदवार को अपना समर्थन नहीं दिया।
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एक-एक उम्मीदवार ने बचाई लाज
सपा व बसपा समर्थित एक-एक उम्मीदवार ने नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा पार्टी की लाज बचाई। मैलानी में सपा ने पार्टी पदाधिकारी नरेश यादव की पत्नी अनीता यादव को समर्थन देकर तो सिंगाही में बसपा ने पूर्व चेयरमैन मोहम्मद कय्यूम की भाभी अफरोज जहां पत्नी यूसुफ को अपना समर्थन देकर चुनाव लड़ाया था। दोनों ही उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर अपनी-अपनी पार्टी की लाज बचाई।
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भाजपा को सबसे अधिक फायदा
निर्दलियों को अगर छोड़ दें तो राजनीतिक दलों में सबसे अधिक फायदा भाजपा को मिला है। जिले की सभी दस सीटों में से छह सीटों लखीमपुर, मोहम्मदी, पलिया, गोला, सिंगाही तथा धौरहरा में पार्टी सिंबल पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसमे पार्टी प्रत्याशी डा. इरा श्रीवास्तव तथा दुर्गा मेहरोत्रा ने जिले की महत्वपूर्ण नगर पालिका कही जाने वाली क्रमश: लखीमपुर व मोहम्मदी के अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा जमा लिया। इसके अलावा सिंगाही में भी पार्टी उम्मीदवार गीता मिश्रा का प्रदर्शन बेहतर रहा।

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