दैवीय आपदा से सुरक्षित नहीं हैं खुले में रखे गेहूं के भंडार

Lakhimpur Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
खुले आसमान के नीचे 83,056 एमटी का गेहूं का भंडारण
एक अप्रैल को खरीद शुरू होने पर क्षमता से अधिक था भंडारण
एसडब्ल्यूसी इंडस्ट्रियल एरिया में सबसे ज्यादा गेहूं असुरक्षित
लखीमपुर खीरी। पहली बारिश में ही खुले आसमान के नीचे भंडार किया गया कुछ गेहूं भीगा था, जिसके बाद कार्रवाई के खौफ से अधिकारियों में डर बना हुआ था। अब हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार से जवाब-तलब किए जाने से हालात और भी गंभीर बन गए हैं। अभी तक भारी-भरकम मात्रा में 83,056 एमटी गेहूं का खुले में भंडारण किया जा चुका है, जिसके बाद भी खुले में ही भंडारण किया जा रहा है। अधिकारी भले ही बारिश से सुरक्षित होने के लाख दावे करें, लेकिन दैवीय आपदा मसलन आग, तेज आंधी-बरसात और बाढ़ की विभीषिका पड़ने पर यह कतई सुरक्षित नहीं हैं।
बता दें कि वर्ष 2012 में रबी सीजन में 2,20,423 एमटी गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उत्पादन अच्छा रहने से एक अप्रैल से अब तक 2,22,427 एमटी गेहूं खरीद क्रय केंद्रों व आढ़तियों द्वारा कर ली गई है। लक्ष्य के पार पहुंची खरीद के अभी दो दिन शेष है। गेहूं खरीद शुरू होने से पहले एफसीआई के अफसरों ने गोदाम खाली कराने की सुधि नहीं ली थी। नतीजन एसडब्ल्यूसी इंडस्ट्रियल एरिया के गोदाम पहले से ही फुल थे। इस गोदाम में 94 हजार एमटी भंडारण की क्षमता है, लेकिन एक अप्रैल 2012 तक यहां पर क्षमता से कहीं अधिक 1,09,036 एमटी अनाज का भंडारण था। यानी गोदाम के अलावा खुले में भी अनाज लगा हुआ था, जो नियम विरुद्घ था। पिछले वर्ष 2011 में खरीदा गया 26,271 एमटी गेहूं एक साल से अधिक समय तक खुले आसमान के नीचे लगा रहा। विभागीय सूत्र बताते हैं कि खुले में रखे जाने वाले अनाज को तीन से छह माह के अंदर सुरक्षित गोदाम में पहुंचाना अनिवार्य है। गेहूं खरीद शुरू होने के बाद भंडारण की दिक्कतें शुरू हुईं, तो अफसरों के दबाव में खुले में ही भंडारण कराया गया। इस वर्ष अभी तक एसडब्यूसी इंडस्ट्रियल में 71,842 एमटी गेहूं का भंडारण किया जा चुका है, जिसमें 54,672 एमटी गेहूं खुले में रखा गया है। यहां पर छह हजार एमटी क्षमता का ही प्लेटफार्म (चबूतरा) है, शेष सड़क पर बल्ली डालकर लगाया गया है। प्लेटफार्म के चलते ट्रांसपोर्टनगर, राजापुर मंडी, जेके सहगल, खालसा एग्रो, अजमानी इंडस्ट्रीज, अजमानी आयल एंड दाल मिल, जगदीश गुप्ता, नैमिष इंडस्ट्रीज में भी गेहूं का भंडारण कराया गया है।

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कहां खुले में लगा गेहूं
लखीमपुर में 54,672 एमटी के अलावा राज्य भंडार गृह भंसड़िया ने गोला मंडी में 15,786 एमटी, राज्य भंडार गृह पलिया ने भीरा स्थित हनुमान इंडस्ट्री में दो हजार एमटी, तिकुनिया में 2656 एमटी और मैगलगंज में 7,942 एमटी गेहूं का खुले में भंडारण किया गया है। जानकारों की माने तो तेज आंधी या बारिश होने पर अनाज को नुकसान पहुंच सकता है।

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एफसीआई ही रिलीज करेगी अनाज
खुले में रखे गए गेहूं को सुरक्षित जगह पहुंचाने का जिम्मा भारतीय खाद्य निगम का है, क्योंकि गेहूं उन्हीं के सुपुर्द किया जा चुका है। दैवीय आपदा के समय खुले में रखे गेहूं के प्रभावित होने की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता। नियमत: तीन से छह माह के भीतर खुले में रखे अनाज को सुरक्षित जगह पहुंचाया जाना चाहिए।
धनंजय सिंह, जिला प्रबंधक, एसडब्यूसी इंडस्ट्रियल एरिया

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