आरोप पत्र दाखिल करने में छूट जाएंगे पुलिस को पसीने

Lakhimpur Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। जीईओ बैग घोटाला मामले में दर्ज एफआईआर में कई ऐसे पेंच हैं, जिसके चलते पुलिस को आरोप पत्र दाखिल करने में पसीने छूट सकते हैं। यही नहीं इस मामले में विभागीय अधिकारियों की पक्षपात पूर्ण कार्रवाई का लाभ भी आरोपियों को मिल सकता है।
बताते चलें की जिले में नदी कटान से गांव की आबादी आदि को बचाने के लिए बाढ़ खंड द्वारा पिछले साल करोड़ों रुपये की लागत से बचाव कार्य कराया गया था। विभागीय सूत्रों की मानें तो करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से जीईओ बैग के सहारे रैनी, समदहा, मोचनापुर, हटवा, झबरा, मटपुरवा आदि स्थानों पर कार्य कराया गया था। इसके लिए करीब 20 लाख जीईओ बैग विभिन्न जीईओ बैग निर्माता कंपनियों तथा प्रदेश के करीब नौ ट्रेडर्स द्वारा भी इन्हीं जीईओ बैग निर्माता कंपनियों से जीईओ बैग खरीद कर बाढ़ खंड को आपूर्ति किए गए। बताया जाता है कि उस समय भी विभागीय अधिकारियों द्वारा कुछ ठेकेदारों से मिली भगत कर जीईओ बैग के स्थान पर उसी तरह के बैग आपूर्ति करने की बात सामने आई थी। पड़ताल के बाद सबसे पहले अमर उजाला ने अपने 14 जुलाई 2010 के अंक में इसका खुलासा किया। तब विभागीय अधिकारियों ने जीईओ बैग को असली बता अपना पल्ला झाड़ लिया था। यही नहीं मामला सुर्खियों में आ जाने के बाद विभागीय अधिकारियों ने अपनी कलम न फंसे इसके लिए ट्रेडर्स फर्मों का भुगतान भी प्रयोगशाला से जीईओ बैग की टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही करने की बात कही।
जिसके बाद से विभागीय अधिकारियों ने संबंधित फर्म व कंपनियों द्वारा आपूर्ति किए गए जीईओ बैग में से नमूने जांच के लिए मुंबई स्थित बिट्रा प्रयोगशाला भिजवाया। जहां से सभी के नमूने टेस्ट में पास होने की रिपोर्ट आने पर अधिकारियों ने सभी को भुगतान भी कर दिया। अब उन्हीं जीईओ बैग को अधोमानक बता विभागीय अधिकारियों ने लोकल नौ फर्मों में से सात के खिलाफ धोखाधड़ी आदि का मुकदमा दर्ज करा दिया है।

जांच में यह फंसेगा पेंच:
विभागीय अधिकारियों की ओर से दर्ज एफआईआर में सिर्फ जीईओ बैग के अधोमानक होने की बात कही गई है, लेकिन सवाल यह उठता है कि जिन जीईओ बैग को अधिकारी अधोमानक होने की आशंका जता रहे हैं उसकी जांच प्रयोग शाला से वह पहले ही करा चुके हैं तथा उसी जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने भुगतान भी किया है। इसके अलावा 70 फीसदी जीईओ बैग आपूर्ति महाराष्ट्र तथा गुजरात स्थित करीब पांच जीईओ बैग निर्माता कंपनियों ने की है, लेकिन उनके खिलाफ तथा बैग प्राप्त करने व इसका भुगतान करने के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई? इसका उत्तर विभागीय अधिकारियों के पास नहीं है। यही नहीं लोकल की नौ फर्मों में से भी सिर्फ सात के खिलाफ भी एफआईआर क्यों दर्ज कराई गई? इसका भी उत्तर खोजना होगा।

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इन कंपनियों से भी खरीदे गए जीईओ बैग
टेक्नो फेब्रिक पूना (महाराष्ट्र), गरवारे (महाराष्ट्र), हाईटेक अहमदाबाद (गुजरात) व टेक्सटायल कंपनी।

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मैंने अधीनस्थ अधिकारियों को जीईओ बैग आपूर्ति करने वाले लोकल फर्मों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए थे। अगर किसी अधिकारी द्वारा इसमें पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए कुछ फर्मों को छोड़ दिया गया है तो उसकी जांच कराई जाएगी तथा आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भुगतान कैसे हुआ तथा कैसे अधोमानक जीईओ बैग विभाग के पास पहुंचे, इसका उत्तर मैं नहीं दे सकता। क्योंकि यह सब मेरे यहां आने से पहले का मामला है।
एमओ सिद्दीकी, अधिशाषी अभियंता बाढ़ खंड

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