सब अपने किसका साथ दें, पेशोपेश में हैं कार्यकर्ता

Lakhimpur Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। सभी उम्मीदवार तो अपने मिलने वाले हैं किसका साथ दें किसको छोड़। निकाय चुनाव में कार्यकर्ताओं के सामने यह एक बड़ समस्या है। इसके चलते कुछ कार्यकर्ताओं ने अपने को चुनाव से विल्कुल अलग कर लिया है तो कुछ ने अलग रास्ता ही अख्तियार कर लिया है। सुबह किसी उम्मीदवार के साथ तो शाम को दूसरे के साथ घूमते नजर आ रहे हैं। रात में तीसरे के पास जाकर उसके साथ होने का दावा करने में नहीं चूकते।
अब जबकि चुनाव प्रचार अपने पूरे शवाब पर है। उम्मीदवारों के सामने अधिक से अधिक साथियों को लेकर जनसंपर्क करके अपना शक्ति प्रदर्शन करना उनकी मजबूरी हैं। समस्या यह है कि उम्मीदवारों को समर्थक ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। कुछ गिने चुने कार्यकर्ता ही हर रोज उनके साथ होते हैं। बुलाने पर कार्यकर्ता कोई न कोई बहाना बनाकर कन्नी काट जाते हैं। कारण यह है कि अधिकतर उम्मीदवारों से जान पहचान होने के कारण वह किसी से विरोध मोल नहीं लेना चाहते।
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छोटा क्षेत्र, सब उम्मीदवार हैं मिलने वाले
नगर पालिका और नगर पंचायत का निर्वाचन क्षेत्र बहुत छोटा है। जो उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं उनमें अधिकांश उम्मीदवार नजदीकी हैं। जो नजदीकी नहीं हैं वह जान पहचान के तो हैं ही। ऐसे में वह किसका साथ दें किसको नाराज करें इस पेशोपेश में कार्यकर्ताओं की जान सूख रही है। कार्यकर्ताओं की यह परेशानी उम्मीदवारों पर भारी पड़ रही है।
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साझा साथियों की बड़ मुसीबत
लखीमपुर नगर पालिका चुनाव में तो इस बार कई ऐसे प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं जिनकी कुछ माह पहले तक दोस्ती और आपसी संबंधों की मिसाल दी जाती थी। सुख दुख में एक दूसरे के साथी थे। अच्छे बुरे कामों के साक्षी रहे थे। इस चुनाव में वह आमने सामने हैं। ऐसे में उनके साथी भी साझा थे। अब उनके साझा साथी सबसे ज्यादा मुसीबत में हैं। उन्हे उम्मीदवारों से मुंह चुराना पड़ रहा है।
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सुबह एक के तो शाम को दूसरे के साथ
कुछ कार्यकताओं ने इस परेशानी से बचने के लिए बीच का रास्ता निकाल लिया है। वह सुबह एक उम्मीदवार के साथ होते हैं तो शाम को दूसरे के साथ होते हैं। इस बीच भ्रमण के दौरान अगर दूसरे उम्मीदवार से उनका आमना सामना हो गया तो उनके सामने बगलें झांकने के अलावा कोई चारा नहीं होता। कुछ कार्यकर्ता सुबह शाम अलग अलग उम्मीदवारों के साथ रहने के बाद तीसरे के यहां दावत उड़ने से नहीं चूकते।
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दलगत कार्यकर्ताओं को राहत
राजनैतिक दलों से जुड़ कार्यकर्ताओं को इस मुसीबत से राहत है। वे अपनी दलीय निष्ठा जता कर दूसरे उम्मीदवारों को संतुष्ट कर लेते हैं। लेकिन कुछ दलीय कार्यकर्ता दूसरे उम्मीदवारों से यह कहने में नहीं चूकते कि पार्टी कार्यकर्ता होने के कारण पार्टी उम्मीदवार के साथ चलना उनकी मजबूरी है लेकिन हम हैं आप के साथ।
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सदस्य पद के उम्मीदवारों की बड़ मुसीबत
वार्ड सदस्य पद लिए तो चुनाव क्षेत्र और भी छोटा होता है। ऐसे में उम्म्ीदवारों के पड़सी तक मुसीबत में हैं। उनके सामने खुल कर किसी का साथ दे पाना मुश्किल हो रहा है। सभी उम्मीदवार किसी न किसी रूप में पड़सी हैं। ऐसे में वह किसी के साथ भी जनसंपर्क नहीं कर सकते। इसलिए सदस्य पद के उम्म्ीदवार किसी को साथ चलने का दबाव भी नहीं बनाते। अपने परिवार के साथ ही वोट मांगने निकल पड़ते हैं।
अशोक निगम

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