गर्मी से हलक सूखे, सिंचाई का भी संकट

Lakhimpur Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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आसमान से बरसती आग ने लोगों को किया बेहाल
बिजली भी नहीं दे पा रही है पूरा साथ
लखीमपुर खीरी। गर्मी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। शहरी क्षेत्र में गर्मी के कारण लोगों को घर से निकलना मुश्किल हो गया है। बिजली भी इस गर्मी में साथ नहीं दे पा रही है। वाटर सप्लाई न होने से लोग पानी के लिए हैंडपंपों के सहारे हैं। पिछले दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी से किसानों को सबसे बड़ा झटका लगा है। उनकी फसलें सूख रही हैं, बिजली साथ नहीं दे पा रही है। रविवार को तापमान अधिकतम 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा। गर्मी के कारण बर्फ भी खूब बिका।
शहर में लोग कई दिनों से गर्मी के कारण घरों से दुपहर में निकल नहीं रहे हैं। बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलते हैं। इसपर भी अंगोछा, टोपी, चश्मा आदि के साथ निकलते हैं। धूप ही नहीं हवा में भी बेहद गर्मी होने के कारण लोगों के गले चंद मिनटों में ही सूख जाते हैं। यही कारण है कि लोग बेहद जरूरी होने पर ही घरों से निकल रहे हैं।
शहर में सभी सार्वजनिक स्थलों पर प्याऊ की सुविधा नहीं है। रोडवेज पर भी ठंडे पानी को लोगों को भटकते देखा गया। बाजार में कुछ स्थानों को छोड़ अधिकतर स्थानों पर नगरपालिका की पाइप लाइनों में टोटियां तक नहीं हैं। भीषण गर्मी के दौरान दुपहर को यहां पानी की सप्लाई बंद रही। लोगों ने हैंडपंपों के जरिए ही प्यास बुझाई।
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बोरिंग में पानी हुआ कम, सूखी किसानों की फसलें
मोहम्मदी। गर्मी चरम पर है, जिस कारण किसानों की गन्ने की फसल सूख रही है। कुछ किसान धान की रोपाई करने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन खेतों में बोरिंग ने पानी देना कम कर दिया है। यह समस्या भूड़ क्षेत्र में ज्यादा है। 8-10 फिट गहरा गड्डा खोदकर पानी निकालने के लिए भी पंप लगाया जा रहा है। किसान कहते हैं कि एक सप्ताह बरसात नहीं हुई तो जल स्तर काफी नीचे चला जाएगा। भूगर्भ में जलस्तर गिरने के कारण घरों में लगे हैंडपंपों ने भी पानी देना कम कर दिया है।
बीडीओ बीआर त्रिपाठी का कहना है कि गर्मी के चलते जलस्तर तो कम हुआ है लेकिन बोरिंग से पानी कम देने की सूचना अब तक नहीं आई है। घरों में लगे नलों की बोरिंग 40-50 फिट होगी, इसलिए यह समस्या है। उन्होंने बताया कि नदियों में भी गर्मी के कारण पानी कम है और बहाव में तीव्रता नहीं है। ममरी। मेघराज की बेरुखी और मौसम के मिजाज को देख किसान चिंतित है। बरसात न होने और गर्म हवाएं चलने से खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं। तेज गर्म हवाओं और उमस भरी गर्मी से आम आदमी, परिंदाें, पशु, वन्य जीव व्याकुल हो उठे हैं। किसानों का रोना है कि इस समय जब वर्षा की झड़ी लगी होनी चाहिए तब लू के थपेड़े झेलने पड़ रहे हैं। अब किसानों की निगाहें मेघराज पर टिकी है।
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पेयजल व्यवस्था लड़खड़ाई
बरवर। नगरवासियों ने बताया कि तपती धूप में समय से पानी न आने कारण पेयजल की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। पेयजल के साथ ही नगर में गंदगी की समस्या भी बरकरार है।
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साठा धान को सूखे का श्राप
अमीरनगर। क्षेत्र में लगे साठा धान की कटाई जोरों पर शुरू हो गई है, लेकिन इस बार बारिश न होने के कारण किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। किसान तीरथ सिंह ने बताया कि साठा धान की लागत करीब पांच से छह हजार रुपये प्रति एकड़ आई है, जिसमें तीन बोरी यूरिया खाद, दो बोरी डीएपी और कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग किया गया था। साठा धान की कीमत मंडी में करीब नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल मिल रही है।

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