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प्रसूताओं के पौष्टिक आहार पर ब्रेक

Lakhimpur Updated Sun, 17 Jun 2012 12:00 PM IST
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जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम में बजट का अड़ंगा
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एक माह बाद ही बैकफुट पर आई सरकार
पौष्टिक आहार के लिए 100 नहीं अब 35 रुपये का बजट
लखीमपुर खीरी। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती महिलाओं को पौष्टिक आहार मुहैया कराने की योजना फ्लाप शो साबित हुई है। विभागीय अधिकारियों ने बजट का टोटा बताते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं प्रमुख सचिव के मौखिक आदेश पर योजना के क्रियान्वयन में ढिलाई आने की बात अधिकारी कह रहे हैं। हालांकि कागजी खानापूर्ति को इस योजना के तहत जिला महिला अस्पताल में पौष्टिक आहार की जगह दूध-ब्रेड वितरित कराने का दावा सीएमएस ने किया है। वहीं गोला और पलिया में योजना का क्रियान्वयन एक अप्रैल 2012 से बंद है।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव उपरांत भर्ती महिलाओं को नि:शुल्क पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने का प्राविधान किया गया था। करीब आठ माह पूर्व यानी अक्तूबर 2011 से लागू हुई योजना कुछ महीने में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। प्रत्येक लाभार्थी महिला के लिए प्रतिदिन 100 रुपये डाइट के हिसाब से बजट का निर्धारण किया गया था। सामान्य प्रसव पर प्रत्येक महिला के लिए दो दिन और विशेष परिस्थिति या आपरेशन कराने वाली महिला के लिए भर्ती रहने के दौरान तक पौष्टिक भोजन दिया जाना था। इसके लिए सितंबर 2011 में कैटर्स के टेंडर भी पास हो गए थे। जिला महिला अस्पताल के लिए 88 रुपये प्रति लाभार्थी डाइट के हिसाब से टेंडर हुआ था।
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हालात कुछ और ही
जिला महिला अस्पताल में हालात योजना के एकदम विपरीत मिले हैं। यहां प्रसव उपरांत भर्ती महिलाओं को 100 के बजाय 35 रुपये की डाइट दिए जाने की पुष्टि सीएमएस डा.उमा प्रसाद ने की है। उन्होंने बताया कि अक्तूबर 2011 में 100 रुपये डाइट के हिसाब से भोजन दिया गया, लेकिन बाद में राज्य सरकार से बजट 35 रुपये कर दिया गया। इतने बजट में प्रत्येक लाभार्थी को प्रतिदिन एक बार दूध, ब्रेड उपलब्ध कराया जा रहा है।
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गोला और पलिया में अप्रैल से योजना बंद
इस योजना के पहले चरण में जिला महिला अस्पताल के अलावा गोला व पलिया सीएचसी को शामिल किया गया था। गोला व पलिया में अप्रैल माह से योजना का क्रियान्वयन पूरी तरह से ठप है। एनआरएचएम के समन्वयक अभय द्विवेदी ने बताया कि जिला महिला अस्पताल के लिए एनआरएचएम से बजट नहीं मिला है, बल्कि राज्य सरकार ने 35 रुपये बजट का प्राविधान किया है। हालांकि गोला व पलिया में एनआएचएम से 100 रुपये डाइट के हिसाब से बजट मिला था, लेकिन बजट के अभाव में अप्रैल से पौष्टिक आहार का वितरण बंद है।
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फास्ट फूड में भी घपला
बनिका गांव निवासी हरीश कुमार की पत्नी गुड्डी देवी ने बताया कि प्रसव के लिए गुरुवार को भर्ती हुई थी। शनिवार को तीसरा दिन है, लेकिन भोजन या नाश्ते के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है।
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दो दिन ही मिला नाश्ता
निघासन क्षेत्र के गांव झखरा निवासी राम खिलावन की पत्नी नीतू का प्रसव आपरेशन से बीते मंगलवार को हुआ था। शनिवार को भर्ती का पांचवा दिन था। नीतू ने बताया कि अभी तक दो बार ही दूध व बिस्कुट मिला है। बिस्कुट भी दो रुपये वाला था।
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