विज्ञापन

सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेज में फर्जीबाड़ा

Lakhimpur Updated Sat, 16 Jun 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
लखीमपुर खीरी। जिले के एक सरकारी सहायता प्राप्त कालेज में फर्जी तरीके से तीन शिक्षकों की भर्ती कर ली गई है, जिसकी कानों-कान खबर कालेज के स्टाफ तक को नहीं हुई। इतना ही नहीं, प्रबंधक द्वारा ‘बर्खास्त’ किए जा चुके चपरासी को अभिलेखों में हेराफेरी कर सहायक अध्यापक का दर्जा दे दिया गया। खास बात यह है पिछले साल यानी अगस्त माह से कथित शिक्षकों का वेतन बेसिक शिक्षा विभाग से आहरित हो रहा है, लेकिन अभी तक कालेज में एक भी दिन इनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हुई है और न ही इनके द्वारा कक्षाएं अटेंड की गई। फिर भी वेतन आहरित होने से कालेज के प्रबंधक, प्रधानाचार्य समेत बीएसए कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदेह के दायरे में आ गई है।
विज्ञापन

यह मामला उजागर हुआ है मितौली ब्लाक क्षेत्र के गांव परसेहरा मदारपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्मारक कुदुरतुल्ला इंटर कालेज में। कालेज के प्रबंधक व प्रधानाचार्य ने दुस्साहस का परिचय देते हुए बीते वर्ष 2011 में अपने सगे-संबंधियों की नियुक्ति शिक्षक पदों पर कर डाली हैं। गुपचुप तरीके से की गई नियुक्तियों में शासनादेश का भी उल्लघंन किया गया है। बता दें कि शिक्षकों के चयन में टीईटी लागू होने के बाद सरकुलर जारी किया गया था, जिसके मुताबिक बिना टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण किए कोई अभ्यर्थी शिक्षक नहीं बन सकता था। बावजूद इसके शासनादेशों को धता बताते हुए नियुक्तियां कर ली गई। सूत्र बताते हैं कि कालेज में फर्जीवाड़े की शुरुआत कई साल पहले से हुई थी, जब कालेज के प्रधानाचार्य विशेश्वर दयाल शुक्ला ने विभागीय नियमों की अनदेखी करते हुए अपने पुत्र मुकेश कुमार की नियुक्ति चपरासी पद पर कराई थी। कुछ समय बाद तत्कालीन प्रबंधक वलीउल्ला सिद्दीकी ने इसे बर्खास्त भी कर दिया था, लेकिन विभागीय तिकड़म के सहारे उसका वेतन आहरित होता रहा।
बाक्स
सगे-संबंधियों की हुई नियुक्तियां
गुपचुप तरीके से कालेज में जो नियुक्तियां हुई हैं, वह सभी प्रबंधक व प्रधानाचार्य के निकटतम संबंधी है। मसलन बर्खास्त चपरासी से सहायक अध्यापक बने मुकेश कुमार कालेज के प्रधानाचार्य का पुत्र है। सहायक अध्यापक पद पर नई नियुक्ति पाए अबीदुल रहमान तत्कालीन प्रबंधक वलीउल्ला सिद्दीकी का पुत्र है। सहायक अध्यापक पर नई नियुक्तियों के क्रम में तीसरा नाम सुनील कुमार दीक्षित का है, जो प्रधानाचार्य का खास रिश्तेदार बताया जाता है। यह तीनों कथित शिक्षक बिना ड्यूटी के सरकारी धन को चूना लगा रहे हैं।

बाक्स
ऐसे हुआ खुलासा
कॉलेज के खाता संचालन में प्रबंधक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। साथ ही प्रधानाचार्य का दखल रहता है। कॉलेज के सहायक अध्यापक कामता प्रसाद मौर्य करीब दस वर्ष से प्रोन्नति वेतनमान की मांग कर रहे थे। आरोप है कि इसके एवज में प्रबंधक व प्रधानाचार्य ने सुविधा शुल्क के नाम पर पैसे भी लिए, फिर भी प्रोन्नति वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया। वहीं प्रधानाचार्य व प्रबंधक अपने हित लाभ की खातिर कारगुजारियां करते रहे। इसकी जानकारी मिलने पर सहायक अध्यापक कामता प्रसाद मौर्य ने इसकी शिकायत बीएसए, लेखा कार्यालय और डीएम से की। इससे क्षुब्ध होकर प्रधानाचार्य व प्रबंधक ने सहायक अध्यापक कामता प्रसाद का वेतन भी रोक दिया है।

बाक्स
प्रबंधक ने हाजिरी भेजी: लेखाधिकारी
कॉलेज का भौतिक निरीक्षण कभी नहीं किया गया है। हमारे पास वेतन भुगतान के लिए प्रमाणित हाजिरी समेत प्रबंधक द्वारा बिल भेजा जाता है। उसी के आधार पर भुगतान कर दिया जाता है।
डीपी सिंह, वित्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा

बाक्स
डीडीओ को सौंपी जांच: डीएम
प्रकरण संज्ञान में आया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने के लिए डीडीओ दिनेश कुमार को निर्देशित किया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
अभिषेक प्रकाश, डीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us