क्षेत्र प्रमुख रामरती के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास

Lakhimpur Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
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प्रमुख के पक्ष में सिर्फ पांच, विपक्ष में 88 वोट पड़े
पूर्व बसपा विधायक राजेश गौतम की पत्नी हैं रामरती
बसपा शासन काल में लगातार दूसरी बार बनीं थीं प्रमुख
लखीमपुर खीरी। सदर क्षेत्र पंचायत प्रमुख रामरती के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव शनिवार को पांच के मुकाबले 88 मतों से पारित हो गया। रामरती बसपा के पूर्व विधायक राजेश गौतम की पत्नी हैं और लगातार दूसरी बार क्षेत्र पंचायत प्रमुख चुनी गई थीं। अविश्वास प्रस्ताव के जरिये रामरती की पदच्युति बसपा के लिए जोर का झटका माना जा रहा है।
प्रदेश में बसपा के सत्ता से हटने और सपा की वापसी के साथ ही रामरती को हटाने के लिए सदस्यों में जोड़तोड़ शुरू हो गई थी। 122 सदस्यों वाली क्षेत्र पंचायत के आधे से अधिक सदस्यों ने अप्रैल में जिलाधिकारी को शपथपत्र सौंपकर क्षेत्र पंचायत प्रमुख पर अविश्वास जताया था। डीएम ने एसडीएम सदर को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान आदि प्रक्रियाएं पूरी कराने की जिम्मेदारी दी थी।
शनिवार को सदर क्षेत्र पंचायत सभागार में एसडीएम सदर, डीपीआरओ और बीडीओ की मौजूदगी में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराया गया। मतदान में 93 सदस्यों ने भाग लिया। इनमें से 88 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष तथा पांच ने विपक्ष में मतदान किया। मतगणना के बाद एसडीएम राजेंद्र प्रसाद यादव ने अविश्वास प्रस्ताव पास होने की घोषणा की।
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राजेश के लिए दूसरा बड़ा झटका
लखीमपुर खीरी। जिले में राजनीतिक रूप से कभी काफी मजबूत माने जाने वाले बसपा के पूर्व विधायक राजेश गौतम की पत्नी एवं सदर ब्लाक प्रमुख रामरती के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का पास हो जाना उनके राजनीतिक जीवन की दूसरी सबसे बड़ी हार मानी जा रही है।
वर्ष 2002 व 2007 में हुए विधान सभा चुनाव में लगातार दो बार पैला विधान सभा सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए राजेश गौतम की गिनती बसपा शासनकाल में दबंग विधायकों में की जाती रही। जिले में डीएम तक से मुचैटा ले लेने और फिर उनका स्थानांतरण करा देने तक का दम रखने वाले राजेश की उलटी गिनती जिला पंचायत चुनाव से शुरू हुई। इस चुनाव में राजेश ने पार्टी के जोनल कोआर्डिनेटर जुगुल किशोर की पत्नी दमयंती किशोर के खिलाफ ही ताल ठोंकने का प्रयास किया था। गनीमत यह रही कि ‘माया’ दरबार के कुछ लोग बीच में पड़ गए। तब राजेश ने अपना कदम पीछे खींचा, लेकिन लगातार दूसरी बार पत्नी रामरती को सदर ब्लाक का तथा बेटे विमलेंद्र को फूलबेहड़ ब्लाक का प्रमुख बनाने से कोई ताकत रोक नहीं सकी। 2012 का विधान सभा चुनाव आया तो नये परिसीमन के कारण राजेश जिस विधान सभा क्षेत्र पैला से चुनाव लड़ते थे उसे खत्म कर दिया गया। राजेश ने उस क्षेत्र में आने वाली श्रीनगर (सुरक्षित) सीट से अपनी तैयारी की, लेकिन अंत समय में बसपा ने राजेश का टिकट काट दिया। राजेश किसी तरह पीस पार्टी से टिकट झटक लाए, लेकिन सिंबल मिलने के बाद भी पीस पार्टी के लोगों ने राजेश का विरोध ही किया और वह चुनाव हार गए। इस हार के बाद से ही राजेश का राजनीतिक कद कम होने की बात कही जाने लगी थी। शनिवार को उनकी ब्लाक प्रमुख पत्नी रामरती के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया। जिसे राजेश की दूसरी बड़ी राजनीतिक हार के रूप में देखा जा रहा है।
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तिथि तो टली, नहीं टली मुसीबत
सदर ब्लाक प्रमुख रामरती के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए पहले 19 मई की तिथि मुकर्रर हुई थी, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इसके लिए ब्लाक प्रमुख रामरती को जिस दिन नोटिस प्राप्त कराई गई थी उस दिन से निर्धारित मतदान तिथि में 15 दिन से कम का अंतर था। इसी आधार पर रामरती हाईकोर्ट चली गई थीं। जहां न्यायालय ने संबंधित नोटिस के आधार पर की जाने वाली प्रक्रिया को निरस्त करते हुए डीएम को नये सिरे से नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। इसी के चलते 19 मई को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान नहीं हो सका था, लेकिन उसी दिन जिला प्रशासन ने ब्लाक प्रमुख रामरती को नोटिस जारी करते हुए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए नौ जून की तिथि मुकर्रर कर दी थी। हालांकि इस नोटिस के खिलाफ भी रामरती हाईकोर्ट गई थीं, लेकिन उस पर कोई निर्णय होता इससे पहले ही उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया।

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