पुनर्स्थापना कार्य सवालों में

Lakhimpur Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
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अमर उजाला नेटवर्क
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खजुरिया। गोविंदनगर गांव को बाढ़-कटान से बचाने के लिए सिंचाई महकमे की ओर से कराया जा रहा काम सुरक्षा कम, बजट को ठिकाने लगाने का ज्यादा दिखाई दे रहा है। मौके पर विभागीय अधिकारियों की गैर मौजूदगी में हो रहा काम मानकों को धूल चटा रहा है और इससे परियोजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शारदा नदी पिछले कई वर्षों से जमीनों को अपने आगोश में समाते हुए पीलीभीत से खीरी सीमा में प्रवेश कर मजरा संजय गांधी नगर का वजूद मिटाकर ग्राम पंचायत गोविंदनगर को निशाने पर लिए है। गांव को बचाने के लिए कई बार फ्लड फाइटिंग कार्य के नाम पर करोड़ों के बजट के पहले भी वारा न्यारा किया जा चुका है। बावजूद गोविंदनगर खतरे की दहलीज पर ही रहा। इस गांव को कटान के खतरे से बचाने के लिए हाल ही में शारदानगर आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर करीब तीन करोड़ 16 लाख रुपये का बजट दिया। सिंचाई महकमा पहले की ही तरह इस बार भी ऊल-जुलूल कार्य योजना बनाकर बजट को ठिकाने लगाने में मशगूल हो गया है। रमेश दीक्षित, चौथी प्रसाद का आरोप है कि सिंचाई महकमा कार्ययोजना का ड्राइंग चार्ट सार्वजनिक रूप से ग्रामीणों को नहीं दिखा रहा है और न ही कोई अन्य विवरण ही बता रहा है। नदी किनारे कहीं पांच तो कहीं दस मीटर चौड़ा पानी में बालू से भरी आधी-आधी बोरियों से प्लेट फार्म बनाया जा रहा है। जिसकी कहीं ऊंचाई एक मीटर है तो कहीं महज दो ही फिट है। आरोप है कि इसमें लगाई जाने वाली सीमेंट की खाली बोरियां भी डैमैज हालत की हैं, जो पानी में ज्यादा दिन नहीं टिक सकती हैं और पानी के तेज बहाव में बह जाएंगी।
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गाइड लाइन का कितना पालन
बाढ़ व कटान राहत कार्यों में सेंटर वाटर कमीशन की गाइड लाइन को आधार माना जाता है। सीसीडब्ल्यूसी का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी बाढ़ परियोजना की डिजाइन हाईफ्लो को आधार मानकर बनाई जाए, लेकिन ग्रामीणों की मानें तो सीडब्ल्यूसी के निर्देशों पर पानी फेरकर काम किया जा रहा है। सारा काम लो फ्लो के आधार पर हो रहा है। इससे इस परियोजना का बाढ़ में बह जाने का पूरा अंदेशा बना हुआ है।


सिंचाई महकमे के अधिकारियों ने किसी भी ठेकेदार को ड्राइंग चार्ट उपलब्ध नहीं कराया है। ठेकेदार मनमाने तरीके से सड़ी गली सीमेंट की खाली बोरियों में बालू भरकर इस्तेमाल कर रहे हैं, जो टिकाऊ नहीं होंगी। उच्चाधिकारियों ने जल्द ही कोई हस्तक्षेप न किया तो इसका हश्र भी पुरानी परियोजना की तरह होगा। सीएम और डीएम से मिलकर एक प्रतिनिधि मंडल इस घालमेल की शिकायत करेगा।
लल्लन प्रसाद गौड़, प्रधान, गोविंद नगर

कार्य मानक के अनुसार
गोविंदनगर में बाढ़, कटान से बचाव का कार्य मानक के अनुसार हो रहा है। कार्य अंतिम चरण में होगा तब ग्रामीणों को परियोजना का स्वरूप समझ में आ जाएगा।
- एके सक्सेना, जेई, सिंचाई
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