अस्पताल में हंगामा, दरोगा को पंचनामे से रोका

Lakhimpur Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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परिजनों ने जिला प्रशासन को भी सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई की मांगलखीमपुर खीरी। शहर में मोबाइक की टक्कर से अधेड़ राकेश कुमार दीक्षित की मौत के बाद उसके परिजनों ने चिकित्सकों की भूमिका को लेकर जमकर हंगामा किया। मोचर्री से शव निकालते समय मृतक के पास पड़ी उल्टी तथा सिर फटने से निकले खून को देख बवाल खड़ा हो गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों ने घायल राकेश के जीवित रहते ही उसे मृत दर्शाकर शव को मोचर्री में बंद करा दिया। परिजनों ने इस मामले में जिला प्रशासन को भी ज्ञापन दे चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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मंगलवार शाम शहर के मोहल्ला अर्जनपुरवा निवासी ठिलिया चालक राकेश कुमार दीक्षित अपने पुत्र ज्ञानू के साथ पुराना एसपी बंगला रोड पर जा रहे थे। पीछे से एक मोबाइक सवार ने उन्हें टक्कर मार दी। राकेश सड़क पर गिरे और अचेत हो गए। साथ चल रहे पुत्र ज्ञानू ने कुछ लोगों की मदद से उन्हें रिक्शे पर लाद कर जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक डा. वीके वर्मा ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया था। परिजनों के मुताबिक जिला अस्पताल प्रशासन ने राकेश के शव को अस्पताल परिसर में मौजूद मोरर्ची में रख बंद कर दिया और परिजनों से पोस्टमार्टम के लिए बुधवार को पहुंचने को कहा। आज सुबह परिजन मोरर्ची पहुंचे तो राकेश के हाथ-पैर फैले मिले तथा शव के पास उल्टी व खून भी पड़ा मिला। बस इसी बात को लेकर परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। परिजनों का कहना था कि राकेश पूरी तरह मरे नहीं थे, लेकिन चिकित्सकों ने आनन-फानन में बिना ठीक से जांच किए उन्हें मृत दर्शा दिया। परिजनों का तर्क था कि राकेश के शव को जब मोचर्री में बंद किया गया था तो उसके दोनों हाथ सीने पर रख दिए गए थे तथा पैर भी इकट्ठा कर दिए गए थे। न तो उल्टी हुई थी और न ही खून निकल रहा था। परिजनों ने इस बात को लेकर अस्पताल में घंटों बवाल किया तथा थाने से गए दरोगा को काफी देर तक पंचनामा नहीं भरना दिया। बाद में परिजन कलक्ट्रेट भी पहुंचे जहां डीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को दिया। एसडीएम ने सीएमएस को मामले की जांच के लिए कहा है।
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दो चिकित्सकों ने किया राकेश का पीएम
लखीमपुर खीरी। राकेश के मौत की घोषणा को लेकर उठे विवाद के बाद सीएमएस एनके शर्मा ने शव का पोस्टमार्टम दो डाक्टरों के पैनल डा, राजेंद्र प्रसाद व डा. केसी वर्मा से कराया।

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परिजनों के आरोप निराधार
दुर्घटना के बाद राकेश को लेकर जब उनके परिजन अस्पताल पहुंचे तो उसकी जांच की गई। जांच में 100 फीसदी मृत पाए जाने पर परिजनों को इसकी जानकारी दे दी गई। काफी देर परिजन शव के पास विलाप भी करते रहे। बाद में शव को शवगृह में रखवाया गया। परिजनों के आरोप बेबुनियाद हैं।
डा. वीके वर्मा, राकेश को इमरजेंसी में चेक करने वाले

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गैस से हो सकता है ऐसा
दुर्घटना में अगर किसी ऐसे व्यक्ति की मौत होती है जिसने कुछ देर पहले खाना खाया हो तो गैस बनने के कारण मृत को कुछ घंटों में उल्टी हो सकती है। अगर सिर में काफी चोट लगी हो तो खून भी निकल सकता है।
डा. एनएल यादव, सीएमओ
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