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भगवान के स्मरण से हो जाते हैं दुख दूर

Lakhimpur Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
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केन ग्रोवर्स इंटर कॉलेज में श्री रामकथा
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जंगबहादुरगंज। वृंदावन के संत श्री रामायणी भरत शरण महाराज ने कहा कि निर्बल के बलराम हैं। भगवान का भावपूर्वक स्मरण करने से जीव के दु:ख दूर हो जाते हैं।
संत रामायणी यहां केन ग्रोवर्स इंटर कॉलेज में हो रही श्रीरामकथा में अहिल्या उद्धार और जनकपुर पुष्प वाटिका के भ्रमण की कथा को श्रद्धालुओं को श्रवण करा रहे थे।
ऋषि विश्वामित्र के मुख से धनुष यज्ञ की चर्चा सुनकर भगवान श्रीराम मुनिवर के साथ चल दिए। उन्होंने रास्ते में एक आश्रम देखा। जहां जीव जंतु नहीं थे। प्रभु श्रीराम ने एक पत्थर की शिला देखी। ऋषि विश्वामित्र ने ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या के पत्थर होने की कथा प्रभुराम को सुनाई। गौतम ऋषि के श्राप से अहिल्या पत्थर की हो गई थीं। रामायणी ने कहा कि यह पत्थर की शिला प्रभु श्रीराम के चरण रज का स्पर्श चाहती है। प्रभु के पावन चरण रज से उसके शोक नष्ट हो गए। अहिल्या नारी के रूप में प्रकट हो गईं। अहिल्या बार-बार प्रभु के चरण पड़ती हैं और आनंद से भरकर परलोक चली गई।
संत रामायणी ने कहा कि दशरथ ज्ञान तथा सीता भक्ति है, जहां भक्ति होती है वहीं भगवान निवास करते हैं। इसके बाद श्रीराम-लक्ष्मण का गुरु आज्ञा से जनकपुर देखने जाना, जनकपुर तथा वहां की नर नारियों का मार्मिक वर्णन, पुण्य वाटिका में श्री राम लक्ष्मण की छवि देखने और सीताजी के गौरी पूजन की कथा सुनाई।
संत रामायणी श्री भरतशरण जी महाराज ने दान की महिमा बताते हुए कहा कि दान श्रद्धा पूर्वक दिया जाए तथा संतोष पूर्वक लिया जाना चाहिए।
कथा में डीएससीएल चीनी मिल के वरिष्ठ महाप्रबंधक प्रदीप त्यागी, अशोक कुमार, एके अग्निहोत्री, सुनील कुमार सिंह, अमित पांडेय सहित तमाम प्रमुख लोग शामिल रहे।
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